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किसान पांच जून को धरनास्थल पर जलाएंगे कृषि कानूनों की प्रतियां
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रेवाड़ी। कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली-जयपुर हाईवे स्थित खेड़ा बॉर्डर पर धरना दे रहे किसानों का आंदोलन वीरवार को 172वें दिन भी जारी रहा। वहीं धरनास्थल पर किसानों की समूह चर्चा दौर चलता रहा। इसके साथ ही धरनास्थल पर किसानों की संख्या भी बढ़ने लगी है। किसान नेताओं ने कहा कि पांच जून को सभी किसान धरनास्थल पर कृषि कानूनों की प्रतियां जलाएंगे।
बता दें कि दिल्ली की सीमाओं पर धरना दे रहे किसानों को समर्थन देने के लिए दिल्ली कूच कर रहे राजस्थान के किसानों को हरियाणा पुलिस ने हाईवे स्थित खेड़ा बॉर्डर पर रोक दिया था। उसके बाद से राजस्थान सहित हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र सहित अन्य प्रदेशों के किसानों ने यहीं पर धरना शुरू कर दिया था।
किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेंगे किसान
किसानों को संबोधित करते हुए किसान नेता रामकिशन महलावत व राजाराम मील ने कहा कि किसान आंदोलन को छह माह पूरे हो गए हैं। आंदोलन की गूंज देश-विदेश तक पहुंच चुकी है। आंदोलन के दौरान सैकड़ों की संख्या में किसान अपनी शहादत दे चुके हैं। किसान अभी भी डटा हुआ है और मजबूत इरादों के साथ वो फैसला कर चुका है कि जब तक तीनों किसान-विरोधी कृषि कानून और बिजली संशोधक विधेयक 2020 रद्द नहीं होंगे और एमएसपी पर गारंटी का कानून नहीं बनेगा, तब तक वे एक कदम भी पीछे नहीं हटेंगे। वहीं समूह चर्चा करते हुए किसानों ने कहा कि देशी-विदेशी पूंजीपतियों की भाजपा की केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए तीनों कृषि कानून किसानों को बर्बाद करने वाले हैं। सरकार की मंशा किसानों को उजाड़ कर सिर्फ कॉरपोरेट घरानों का खजाने भरने की है। नए कृषि कानूनों से प्राइवेट मंडियां स्थापित होंगी और इसके चलते सरकारी मंडियां बंद हो जाएंगी। नतीजा, सरकारी खरीद समाप्त होगी। इस अवसर पर रामकिशन महलावत, राजाराम मील, रणजीत सिंह, तारा सिंह सिद्ध, अमराराम, महेंद्र, नवीन, मुकेश, सुभाष व राजबीर सिंह सहित अन्य मौजूद रहे।
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बता दें कि दिल्ली की सीमाओं पर धरना दे रहे किसानों को समर्थन देने के लिए दिल्ली कूच कर रहे राजस्थान के किसानों को हरियाणा पुलिस ने हाईवे स्थित खेड़ा बॉर्डर पर रोक दिया था। उसके बाद से राजस्थान सहित हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र सहित अन्य प्रदेशों के किसानों ने यहीं पर धरना शुरू कर दिया था।
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किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेंगे किसान
किसानों को संबोधित करते हुए किसान नेता रामकिशन महलावत व राजाराम मील ने कहा कि किसान आंदोलन को छह माह पूरे हो गए हैं। आंदोलन की गूंज देश-विदेश तक पहुंच चुकी है। आंदोलन के दौरान सैकड़ों की संख्या में किसान अपनी शहादत दे चुके हैं। किसान अभी भी डटा हुआ है और मजबूत इरादों के साथ वो फैसला कर चुका है कि जब तक तीनों किसान-विरोधी कृषि कानून और बिजली संशोधक विधेयक 2020 रद्द नहीं होंगे और एमएसपी पर गारंटी का कानून नहीं बनेगा, तब तक वे एक कदम भी पीछे नहीं हटेंगे। वहीं समूह चर्चा करते हुए किसानों ने कहा कि देशी-विदेशी पूंजीपतियों की भाजपा की केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए तीनों कृषि कानून किसानों को बर्बाद करने वाले हैं। सरकार की मंशा किसानों को उजाड़ कर सिर्फ कॉरपोरेट घरानों का खजाने भरने की है। नए कृषि कानूनों से प्राइवेट मंडियां स्थापित होंगी और इसके चलते सरकारी मंडियां बंद हो जाएंगी। नतीजा, सरकारी खरीद समाप्त होगी। इस अवसर पर रामकिशन महलावत, राजाराम मील, रणजीत सिंह, तारा सिंह सिद्ध, अमराराम, महेंद्र, नवीन, मुकेश, सुभाष व राजबीर सिंह सहित अन्य मौजूद रहे।
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