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खेड़ा बॉर्डर पर किसान आज जलाएंगे कृषि कानूनों की प्रतियां
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खेड़ा बॉर्डर पर प्रदर्शन करते किसान।
- फोटो : Rewari
रेवाड़ी। कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली-जयपुर हाईवे स्थित खेड़ा बॉर्डर पर किसान शनिवार को कृषि कानूनों की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। वहीं खेड़ा बॉर्डर पर किसानों का आंदोलन 173वें दिन भी जारी रहा। शुक्रवार को धरनास्थल पर किसानों की समूह चर्चा दौर भी चला।
बता दें कि दिल्ली की सीमाओं पर धरना दे रहे किसानों को समर्थन देने के लिए दिल्ली कूच कर रहे राजस्थान के किसानों को हरियाणा पुलिस ने हाईवे स्थित खेड़ा बॉर्डर पर रोक दिया था। उसके बाद से राजस्थान सहित हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र सहित अन्य प्रदेशों के किसानों ने यहीं पर धरना शुरू कर दिया था।
किसान नेता अमरा राम, डॉ. संजय माधव व राजाराम मील ने कहा कि पिछले साले कोविड काल में 5 जून को केंद्र सरकार ने गुपचुप तरीके से कृषि केेे तीन कानून बनाए थे। जिनका देशभर के किसान शुरू से ही लगातार विरोध करते आ रहे हैं। इन कानूनों को 5 जून को एक साल पूरा हो जाएगा। देशभर के किसान शनिवार को इन कानूनों की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारी किसान कृषि कानूनों को रद्द कराने के बाद ही घर लौटेंगे। देश का किसान अभी भी डटा हुआ है और मजबूत इरादों के साथ वो फैसला कर चुका है कि जब तक तीनों किसान-विरोधी कृषि कानून और बिजली संशोधक विधेयक 2020 रद्द नहीं होंगे और एमएसपी पर गारंटी का कानून नहीं बनेगा तब तक वे एक कदम भी पीछे नहीं हटेंगे।
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उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा किसानों को उजाड़कर सिर्फ कॉरपोरेट घरानों का खजाने भरने की है। नए कृषि कानूनों से प्राइवेट मंडियां स्थापित होंगी और इसके चलते सरकारी मंडियां बंद हो जाएंगी। नतीजा, सरकारी खरीद समाप्त होगी।
इस अवसर पर रामकिशन महलावत, रणजीत सिंह, तारा सिंह सिद्ध, महेंद्र, सुभाष, राजबीर, मुकेश व नवीन सहित अन्य मौजूद रहे।
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बता दें कि दिल्ली की सीमाओं पर धरना दे रहे किसानों को समर्थन देने के लिए दिल्ली कूच कर रहे राजस्थान के किसानों को हरियाणा पुलिस ने हाईवे स्थित खेड़ा बॉर्डर पर रोक दिया था। उसके बाद से राजस्थान सहित हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र सहित अन्य प्रदेशों के किसानों ने यहीं पर धरना शुरू कर दिया था।
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किसान नेता अमरा राम, डॉ. संजय माधव व राजाराम मील ने कहा कि पिछले साले कोविड काल में 5 जून को केंद्र सरकार ने गुपचुप तरीके से कृषि केेे तीन कानून बनाए थे। जिनका देशभर के किसान शुरू से ही लगातार विरोध करते आ रहे हैं। इन कानूनों को 5 जून को एक साल पूरा हो जाएगा। देशभर के किसान शनिवार को इन कानूनों की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारी किसान कृषि कानूनों को रद्द कराने के बाद ही घर लौटेंगे। देश का किसान अभी भी डटा हुआ है और मजबूत इरादों के साथ वो फैसला कर चुका है कि जब तक तीनों किसान-विरोधी कृषि कानून और बिजली संशोधक विधेयक 2020 रद्द नहीं होंगे और एमएसपी पर गारंटी का कानून नहीं बनेगा तब तक वे एक कदम भी पीछे नहीं हटेंगे।
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उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा किसानों को उजाड़कर सिर्फ कॉरपोरेट घरानों का खजाने भरने की है। नए कृषि कानूनों से प्राइवेट मंडियां स्थापित होंगी और इसके चलते सरकारी मंडियां बंद हो जाएंगी। नतीजा, सरकारी खरीद समाप्त होगी।
इस अवसर पर रामकिशन महलावत, रणजीत सिंह, तारा सिंह सिद्ध, महेंद्र, सुभाष, राजबीर, मुकेश व नवीन सहित अन्य मौजूद रहे।