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Rewari News: बाघ के डर से खेतों से दूर किसान, कैसे होगी फसल की कटाई
Sun, 22 Sep 2024 04:26 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 22 Sep 2024 04:26 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
बावल। अलवर के सरिस्का से निकल कर झाबुआ के जंगल में छिपे बाघ को एक महीने बाद भी नहीं पकड़ा जा सका है। ऐसे में गांव के लोग सहमे हैं और खेत में नहीं जा रहे हैं। खेत में बाजरा और ज्वार की फसल पक गई है लेकिन उसे काटने के लिए बाघ के डर से श्रमिक नहीं मिल रहे हैं।
फसल की कटाई के लिए अधिकतर श्रमिक यूपी और बिहार से आते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि बाघ के डर से श्रमिक गांव में नहीं आना चाहते हैं। उन्हें डर है कि कहीं काम करते समय बाघ हमला न कर दे। झाबुआ के जंगल के पास ग्रामीणों के खेत हैं। ऐसे में श्रमिकों ने फसल की कटाई करने से भी मना कर दिया है।
इसको लेकर ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि आखिर वन विभाग को किस प्रकार का प्रशिक्षण मिला है कि वह वह एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी बाघ को नहीं पकड़ पाया है। अगर बाघ किसी पर हमला कर देगा तो बड़ी समस्या हो जाएगी। बाघ को जल्द पकड़ा जाए ताकि जनजीवन सामान्य हो सके।
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एक महीने से अधिक समय बीत गया लेकिन बाघ नहीं पकड़ा गया। लोग भयभीत हैं। रात के समय कुत्तों की आहट भी बाघ की तरह लगती है। -हुक्म सिंह खिजूरी ।
फसल पक चुकी है लेकिन बाघ के डर से मजदूर नहीं मिल रहे हैं। वन विभाग के कर्मचारी कुछ नहीं कर पा रहे हैं। फसल की कटाई भी नहीं हो पाएगी। -रण सिंह।
घर से निकलना मुश्किल हो गया है। महिलाएं व बच्चे सहमे हैं। साल में दूसरी बार बाघ झाबुआ के जंगल में पहुंचा है। सरिस्का टीम के अधिकारी दिनभर कुछ नहीं करते। आसपास दर्जनों गावों के लोग परेशान हो चुके हैं। -बलवान
हरियाणा व राजस्थान के वन विभाग के अधिकारी मिलकर भी एक बाघ को नहीं पकड़ पाए हैं। गांव के लोग सहमे हुए हैं। कुछ दिन पहले विभाग ने बड़ा पिंजरा मंगवाया था लेकिन बाघ नहीं पकड़ा गया। -प्रताप सिंह
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बाघ झाबुआ के जंगल के कंपाउंड में ही है। पिछले कई दिनों उसकी कोई गतिविधि नहीं देखने को मिली है। टीम पूरी तरह अलर्ट है।-प्रेम कुमार, वन अधिकारी, बावल।
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बावल। अलवर के सरिस्का से निकल कर झाबुआ के जंगल में छिपे बाघ को एक महीने बाद भी नहीं पकड़ा जा सका है। ऐसे में गांव के लोग सहमे हैं और खेत में नहीं जा रहे हैं। खेत में बाजरा और ज्वार की फसल पक गई है लेकिन उसे काटने के लिए बाघ के डर से श्रमिक नहीं मिल रहे हैं।
फसल की कटाई के लिए अधिकतर श्रमिक यूपी और बिहार से आते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि बाघ के डर से श्रमिक गांव में नहीं आना चाहते हैं। उन्हें डर है कि कहीं काम करते समय बाघ हमला न कर दे। झाबुआ के जंगल के पास ग्रामीणों के खेत हैं। ऐसे में श्रमिकों ने फसल की कटाई करने से भी मना कर दिया है।
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इसको लेकर ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि आखिर वन विभाग को किस प्रकार का प्रशिक्षण मिला है कि वह वह एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी बाघ को नहीं पकड़ पाया है। अगर बाघ किसी पर हमला कर देगा तो बड़ी समस्या हो जाएगी। बाघ को जल्द पकड़ा जाए ताकि जनजीवन सामान्य हो सके।
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एक महीने से अधिक समय बीत गया लेकिन बाघ नहीं पकड़ा गया। लोग भयभीत हैं। रात के समय कुत्तों की आहट भी बाघ की तरह लगती है। -हुक्म सिंह खिजूरी ।
फसल पक चुकी है लेकिन बाघ के डर से मजदूर नहीं मिल रहे हैं। वन विभाग के कर्मचारी कुछ नहीं कर पा रहे हैं। फसल की कटाई भी नहीं हो पाएगी। -रण सिंह।
घर से निकलना मुश्किल हो गया है। महिलाएं व बच्चे सहमे हैं। साल में दूसरी बार बाघ झाबुआ के जंगल में पहुंचा है। सरिस्का टीम के अधिकारी दिनभर कुछ नहीं करते। आसपास दर्जनों गावों के लोग परेशान हो चुके हैं। -बलवान
हरियाणा व राजस्थान के वन विभाग के अधिकारी मिलकर भी एक बाघ को नहीं पकड़ पाए हैं। गांव के लोग सहमे हुए हैं। कुछ दिन पहले विभाग ने बड़ा पिंजरा मंगवाया था लेकिन बाघ नहीं पकड़ा गया। -प्रताप सिंह
बाघ झाबुआ के जंगल के कंपाउंड में ही है। पिछले कई दिनों उसकी कोई गतिविधि नहीं देखने को मिली है। टीम पूरी तरह अलर्ट है।-प्रेम कुमार, वन अधिकारी, बावल।