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किसानों ने बाजरा खरीद शुरू कराने की मांग करते हए दो दिन का दिया अल्टीमेट
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कोसली में एसडीएम को ज्ञापन सौंपते किसान। संवाद
- फोटो : Rewari
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कोसली में दक्षिण हरियाणा उत्थान मंच व किसान सेवा संगठन के बैनर तले किसानों ने बाजरे की सरकारी खरीद की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। किसान बाजरे की खरीद शुरू की मांग को लेकर किसान भवन से सचिवालय तक प्रदर्शन किया।
उन्होंने एमएसपी पर बाजरे की खरीद को लेकर प्रधानमंत्री व कृषि मंत्री के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। किसान वक्ताओं ने कहा कि दक्षिणी हरियाणा के साथ हमेशा से भेदभाव होता आ रहा है। जिसकी मार अब किसानों पर पड़ने लगी है। उन्होंने कहा कि पहले तो प्रकृति की मार से किसानों की बाजरे की फसल खराब हो गई। अब सरकार ने बाजरे की खरीद से इनकार कर दिया हैं। भावांतर भरपाई योजना के नाम पर सरकार किसानों को ठगने का काम कर रही। उन्होंने कहा कि सरकार दक्षिणी हरियाणा के लोगों को कमजोर ना समझे, दक्षिण हरियाणा की बदौलत ही आज सरकार सत्ता में है। किसानों ने सरकार व प्रशासन को दो दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर दो दिन के अंदर सरकार एमएसपी पर हमारा बाजरे को नहीं खरीदा तो आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। तहसील के बाहर धरना देंगे। इसके साथ ही नेताओं का बहिष्कार भी किया जाएगा।
एक दिन पहले सीएम से की थी मुलाकात
उल्लेखनीय है कि दक्षिणी हरियाणा में इस सीजन में बाजरे की फसल होती है। सरकार ने बाजरे की सरकारी खरीद नहीं करके इसे भावांतर भरपाई योजना में शामिल करते हुए 600 रुपये प्रति क्विंटल देने की बात कही है। जिससे किसानों में रोष है। एक दिन पहले ही चंडीगढ़ में दक्षिणी हरियाणा के पांच विधायकों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर भावांतर भरपाई योजना की राशि बढ़ाने की मांग की थी। बाजरे का एमएसपी 2250 रुपये है। इसके पीछे तर्क दिया था कि बाजरा 1200 रुपये क्विंटल बिक रहा है, जबकि सरकार कुल 600 रुपये देगी। इससे इलाके के किसानों को प्रति क्विंटल 450 रुपये का घाटा होगा। इस अवसर पर भाजपा के डॉ. सुभाष यादव, जेजेपी के रामफल कोसलीया, कांग्रेस के ओमप्रकाश, सरपंच जयभगवान, राजविंदर तंवर, सुरेश कुमार, जय प्रकाश सहित अन्य किसान मौजूद थे।
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उन्होंने एमएसपी पर बाजरे की खरीद को लेकर प्रधानमंत्री व कृषि मंत्री के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। किसान वक्ताओं ने कहा कि दक्षिणी हरियाणा के साथ हमेशा से भेदभाव होता आ रहा है। जिसकी मार अब किसानों पर पड़ने लगी है। उन्होंने कहा कि पहले तो प्रकृति की मार से किसानों की बाजरे की फसल खराब हो गई। अब सरकार ने बाजरे की खरीद से इनकार कर दिया हैं। भावांतर भरपाई योजना के नाम पर सरकार किसानों को ठगने का काम कर रही। उन्होंने कहा कि सरकार दक्षिणी हरियाणा के लोगों को कमजोर ना समझे, दक्षिण हरियाणा की बदौलत ही आज सरकार सत्ता में है। किसानों ने सरकार व प्रशासन को दो दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर दो दिन के अंदर सरकार एमएसपी पर हमारा बाजरे को नहीं खरीदा तो आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। तहसील के बाहर धरना देंगे। इसके साथ ही नेताओं का बहिष्कार भी किया जाएगा।
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एक दिन पहले सीएम से की थी मुलाकात
उल्लेखनीय है कि दक्षिणी हरियाणा में इस सीजन में बाजरे की फसल होती है। सरकार ने बाजरे की सरकारी खरीद नहीं करके इसे भावांतर भरपाई योजना में शामिल करते हुए 600 रुपये प्रति क्विंटल देने की बात कही है। जिससे किसानों में रोष है। एक दिन पहले ही चंडीगढ़ में दक्षिणी हरियाणा के पांच विधायकों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर भावांतर भरपाई योजना की राशि बढ़ाने की मांग की थी। बाजरे का एमएसपी 2250 रुपये है। इसके पीछे तर्क दिया था कि बाजरा 1200 रुपये क्विंटल बिक रहा है, जबकि सरकार कुल 600 रुपये देगी। इससे इलाके के किसानों को प्रति क्विंटल 450 रुपये का घाटा होगा। इस अवसर पर भाजपा के डॉ. सुभाष यादव, जेजेपी के रामफल कोसलीया, कांग्रेस के ओमप्रकाश, सरपंच जयभगवान, राजविंदर तंवर, सुरेश कुमार, जय प्रकाश सहित अन्य किसान मौजूद थे।
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