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Rewari News: घाटे में बाजरा बेचने को मजबूर किसान
Mon, 30 Sep 2024 01:11 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Mon, 30 Sep 2024 01:11 AM IST
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फोटो: 18रेवाड़ी। नई अनाज मंडी में फसल को समेटते श्रमिक। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। मौसम साफ होते ही कपास और बाजरे की फसल की कटाई तेज हो गई है। मंडी में भी इन फसलों की आवक में तेजी आने लगी है। नई अनाज मंडी में एक सप्ताह में करीब 13 हजार क्विंटल से अधिक बाजरा व 700 क्विंटल से अधिक कपास की आवक हो चुकी है, लेकिन सरकारी खरीद अभी शुरू नहीं हुई है। इसी का फायदा आढ़ती उठा रहे हैं और सरकारी भाव से कम किसानों को मिल रहा है। जरूरतमंद किसान मंदे में ही फसल बेचने को मजबूर हैं। सरकारी खरीद एक अक्तूबर से शुरू होने की उम्मीद है।
इस साल बाजरे की सरकारी रेट 2625 रुपये प्रति क्विंटल है लेकिन अभी तक सरकारी खरीद न होने की वजह से खुले में आढ़त पर 2270 से 2400 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बिक रहा है। कपास के 6200 से 7200 रुपये प्रति क्विंटल तक दाम मिल रहे हैं। कपास का कोई सरकारी रेट नहीं होता। आढ़त पर बाजरा लेकर आ रहे जरूरतमंद किसान सरकारी रेट से भी कम में बाजारा बेच रहे हैं।
इस साल घटा बाजरा और कपास का रकबा
पिछले सीजन में जिले में 83 हजार 500 हेक्टेयर में बाजरा बोया गया था जबकि इस बार 75 हजार हेक्टेयर में बाजरा बोया गया है। बीते साल कपास 9 हजार हेक्टेयर में बोया गया, जबकि इस बार 7 हजार हेक्टेयर में कपास की बिजाई की गई है। इस बार बरसात की अधिकता के कारण कुछ इलाकों में फसल भी प्रभावित हुई है, लेकिन आगामी दिनों में अनाजमंडी में खरीफ की फसलों की अच्छी आवक आने की उम्मीद लगाई जा रही है।
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कपास बेचने के लिए निजी आढ़तियों के भरोसे किसान
मंडी में बाजरे की तो सरकारी खरीद होती है लेकिन कपास की सरकारी खरीद नहीं होती। ऐसे में कपास का कोई सरकारी भाव नहीं है। किसान पूरी तरह से निजी आढ़तियों के भरोसे हैं। बाजार में मांग अधिक होती है तो ठीक भाव मिल जाता है मांग कमजोर होने पर मंदे में ही फसल बेचना किसानों की मजबूरी हो जाता है।
पिछले साल हुई थी 56 हजार 8766 क्विंटल बाजरा खरीद
पिछले सीजन अनाजमंडी में करीब 56 हजार 8766 क्विंटल बाजरा खरीदा गया था। बाजरे की एमएसपी 2500 रुपये प्रति क्विंटल थी, जिसमें 300 रुपये प्रति क्विंटल भावांतर भरपाई के थे, लेकिन इस बार बाजरे की एमएसपी 2625 रुपये प्रति क्विंटल है।
सरकारी मापदंडो के अनुसार करें खरीद : डीसी
रेवाड़ी। डीसी अभिषेक मीणा ने खरीफ सीजन की फसलों के खरीद प्रबंधों को लेकर विभिन्न खरीद एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि वह निर्धारित मापदंडों के अनुरूप किसानों की फसल की खरीद करें और तय समयावधि में फसलों का भुगतान सुनिश्चित करें। उन्होंने अनाज मंडियों से फसलों का समय पर उठान करने के निर्देश दिए। डीसी ने कहा कि किसानों को जहां पर भी कोई समस्या आती है तो जल्द से जल्द उसके समाधान का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए मंडी में अटल कैंटीन तथा पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था पुख्ता की जाए।
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रेवाड़ी। मौसम साफ होते ही कपास और बाजरे की फसल की कटाई तेज हो गई है। मंडी में भी इन फसलों की आवक में तेजी आने लगी है। नई अनाज मंडी में एक सप्ताह में करीब 13 हजार क्विंटल से अधिक बाजरा व 700 क्विंटल से अधिक कपास की आवक हो चुकी है, लेकिन सरकारी खरीद अभी शुरू नहीं हुई है। इसी का फायदा आढ़ती उठा रहे हैं और सरकारी भाव से कम किसानों को मिल रहा है। जरूरतमंद किसान मंदे में ही फसल बेचने को मजबूर हैं। सरकारी खरीद एक अक्तूबर से शुरू होने की उम्मीद है।
इस साल बाजरे की सरकारी रेट 2625 रुपये प्रति क्विंटल है लेकिन अभी तक सरकारी खरीद न होने की वजह से खुले में आढ़त पर 2270 से 2400 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बिक रहा है। कपास के 6200 से 7200 रुपये प्रति क्विंटल तक दाम मिल रहे हैं। कपास का कोई सरकारी रेट नहीं होता। आढ़त पर बाजरा लेकर आ रहे जरूरतमंद किसान सरकारी रेट से भी कम में बाजारा बेच रहे हैं।
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इस साल घटा बाजरा और कपास का रकबा
पिछले सीजन में जिले में 83 हजार 500 हेक्टेयर में बाजरा बोया गया था जबकि इस बार 75 हजार हेक्टेयर में बाजरा बोया गया है। बीते साल कपास 9 हजार हेक्टेयर में बोया गया, जबकि इस बार 7 हजार हेक्टेयर में कपास की बिजाई की गई है। इस बार बरसात की अधिकता के कारण कुछ इलाकों में फसल भी प्रभावित हुई है, लेकिन आगामी दिनों में अनाजमंडी में खरीफ की फसलों की अच्छी आवक आने की उम्मीद लगाई जा रही है।
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कपास बेचने के लिए निजी आढ़तियों के भरोसे किसान
मंडी में बाजरे की तो सरकारी खरीद होती है लेकिन कपास की सरकारी खरीद नहीं होती। ऐसे में कपास का कोई सरकारी भाव नहीं है। किसान पूरी तरह से निजी आढ़तियों के भरोसे हैं। बाजार में मांग अधिक होती है तो ठीक भाव मिल जाता है मांग कमजोर होने पर मंदे में ही फसल बेचना किसानों की मजबूरी हो जाता है।
पिछले साल हुई थी 56 हजार 8766 क्विंटल बाजरा खरीद
पिछले सीजन अनाजमंडी में करीब 56 हजार 8766 क्विंटल बाजरा खरीदा गया था। बाजरे की एमएसपी 2500 रुपये प्रति क्विंटल थी, जिसमें 300 रुपये प्रति क्विंटल भावांतर भरपाई के थे, लेकिन इस बार बाजरे की एमएसपी 2625 रुपये प्रति क्विंटल है।
सरकारी मापदंडो के अनुसार करें खरीद : डीसी
रेवाड़ी। डीसी अभिषेक मीणा ने खरीफ सीजन की फसलों के खरीद प्रबंधों को लेकर विभिन्न खरीद एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि वह निर्धारित मापदंडों के अनुरूप किसानों की फसल की खरीद करें और तय समयावधि में फसलों का भुगतान सुनिश्चित करें। उन्होंने अनाज मंडियों से फसलों का समय पर उठान करने के निर्देश दिए। डीसी ने कहा कि किसानों को जहां पर भी कोई समस्या आती है तो जल्द से जल्द उसके समाधान का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए मंडी में अटल कैंटीन तथा पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था पुख्ता की जाए।