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बिजली बिल 18 करोड़, जुर्माना 40 करोड़
रेवाड़ी ब्यूरो
Updated Fri, 05 Feb 2016 01:11 AM IST
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रेवाड़ी। अंधेरी नगरी चौपट राजा वाली कहावत नगर परिषद पर सटीक बैठ रही है। पिछले पंद्रह वर्षों में नप ने बिजली बिल ही नहीं जमा करवाया है। अब राशि 58 करोड़ तक पहुंच गई है। उक्त राशि में चालीस करोड़ निगम की ओर से नगर परिषद पर बिल न भरने पर जुर्माना लगाया हुआ है, जबकि बिल महज केवल 18 करोड़ है। स्ट्रीट लाइट की सुविधा के लिए शहर के उपभोक्ताओं ने अपना पैसा जमा कराकर अपना फर्ज निभाया, लेकिन नप अधिकारियों ने शहर को अंधेरे में डूबने की तैयारी कर ली है। क्योंकि बिजली निगम की ओर से बार-बार पत्र लिखने पर भी परिषद ने बिल जमा नहीं कराया तो आखिर स्थानीय अधिकारियों ने इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी है। ऐसे में कभी शहर की स्ट्रीट लाइट के कनेक्शन कटने की नौबत आ सकती है। इतना होने के बावजूद शहरी सरकार पर जूं तक नहीं रेंग रही है। बिजली निगम का कहना है कि उनके द्वारा 1999 से लेकर सैकड़ों बार नप को बिल भरने के लिए इंटीमेशन भेजा गया है। यदि यही आलम रहा तो कभी स्ट्रीट लाइट कनेक्शन काटे जा सकते हैं। शहरवासियों को होने वाली परेशानी के लिए नगर परिषद ही जिम्मेदार होगी।
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पाई-पाई जोड़कर जमा किया शुल्क, छिन सकती हैं सुविधाएं
बिजली निगम उपभोक्ताओं से म्यूनिसपल टैक्स के नाम पर पांच पैसे प्रति यूनिट वसूल करता है। उपभोक्ताओं से यह शुल्क लेने का उद्देश्य भी शहर की स्ट्रीट लाइटों से शहरवासियों का सुविधा प्रदान करने का होता है। निगम इसी एवज में उपभोक्ताओं से लगभग 12 लाख प्रति माह वसूल करता है। वसूली गई राशि निगम नगर परिषद के बने कुल बिल में से घटा कर एक नेट बिल तैयार करता है। मुद्दा यह है कि उपभोक्ताओं ने तो सुविधाओं को लेने के लिए अपना पैसा जमा किया, लेकिन बावजूद इसके नप की लापरवाही के चलते उनसे यह सुविधा कभी भी छिन सकती है।
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हर महीने का लगभग चालीस लाख का बिल करना होता है अदा
नगर परिषद की स्ट्रीट लाइटों एवं अन्य आवासीय भवनों को जोड़कर बिजली निगम के तीनों डिवीजनों के प्रति महीने का बिल लगभग चालीस लाख रुपये बनता है। इस पर लगभग 25 लाख का जुर्माना लगने के बाद वह 65 लाख तक पहुंच जाता है। डिवीजन सिटी-1 की बात करें तो लगभग साढ़े 26 करोड़ का बिजली बिल नप पर बकाया है, इसमें 10 करोड़ बिजली बिल और लगभग 16 करोड़ जुर्माना है। इधर सिटी-2 में लगभग 31 करोड़ का बिल बकाया है। इसमें सात करोड़ रुपये बिल और 24 करोड़ जुर्माना है। वहीं 2008 में सब अर्बन डिवीजन का लगभग 25 लाख नप पर बकाया है, जिसमें से 9.98 लाख रुपये जुर्माने के हैं।
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बीते दो वर्ष में केवल एक करोड़ रुपये कराए गए जमा
निगम के अधिकारियों की माने तो 1999 से लेकर अब तक निगम की ओर से 2014 और 2015 में केवल एक करोड़ की राशि जमा कराई गई है। इससे पहले कभी पांच लाख तो कभी दस लाख रुपये ही जमा कराए गए जो कि जुर्माने को भी पूरा करने के लिए काफी नहीं थे।
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अधिकारी आते-जाते रहे लेकिन पंद्रह सालों में किसी ने नहीं भरा बिजली बिल
नगर परिषद अधिकारियों से जब यह पूछा गया कि उनके द्वारा कब-कब कितना बिल कराया गया है, बाबू से लेकर अधिकारी इस जवाब से बचते रहे। किसी भी बाबू एवं अधिकारी के पास सवाल का जवाब नहीं था। वहीं आलम यह था कि उन्हें यह तक नहीं पता था कि जो म्यूनिसिपल टैक्स निगम वसूलता है, वह कितना बनता है। वहीं 1999 से लेकर अब तक तीन बार चेयरमैन बदल चुके हैं। तीन साल के लिए प्रशासनिक अधिकारी ने भी कमान संभाली लेकिन किसी ने भी नप की हालत सुधारने की जहमत नहीं उठाई है। हालांकि वर्तमान चेयरपर्सन शकुंतला भांडोरिया बीते दो वर्षां में एक करोड़ रुपये जमा कराने का दावा जरूर करती है। लेकिन यह भी ऊंट के मुंह में जीरे के बराबर है।
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वर्जन
नगर परिषद को कई बार बिल जमा कराने के लिए इंटीमेशन दिया गया है, लेकिन बिल जमा नहीं हुआ। उच्चाधिकारियों को सूचित करा दिया गया है। निगम इस मामले को लेकर गंभीर है, यदि बिल जमा नहीं हुआ तो कनेक्शन काटने की कार्रवाई भी संभव है।
-राजेंद्र सिंह, एसडीओ, सिटी-1
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पुराने समय से ही बिजली बिल जमा नहीं कराए गए हैं। मैंने अपने कार्यकाल में एक करोड़ रुपये निगम में जमा कराए हैं। मेरे कार्यकाल से पहले रहे प्रधानों ने गंभीर होकर बिल नहीं भरा, जिसके चलते यह हाल है।
-शकुंतला भांडोरिया, चेयरपर्सन, नगर परिषद रेवाड़ी
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नगर परिषद पर निगम का यह बिल मेेरे समय से पहले का है। मैंने पदभार संभालते ही इसे हल कराने के लिए गंभीरता के साथ पांच फरवरी को होने वाली शुक्रवार की बैठक के एजेंडे में भी शामिल किया हुआ है। निगम के अधिकारियों से बात कर बिल को भरा जाएगा।
-डॉ. अरविंद बाल्याण, ईओ, नगर परिषद रेवाड़ी
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पाई-पाई जोड़कर जमा किया शुल्क, छिन सकती हैं सुविधाएं
बिजली निगम उपभोक्ताओं से म्यूनिसपल टैक्स के नाम पर पांच पैसे प्रति यूनिट वसूल करता है। उपभोक्ताओं से यह शुल्क लेने का उद्देश्य भी शहर की स्ट्रीट लाइटों से शहरवासियों का सुविधा प्रदान करने का होता है। निगम इसी एवज में उपभोक्ताओं से लगभग 12 लाख प्रति माह वसूल करता है। वसूली गई राशि निगम नगर परिषद के बने कुल बिल में से घटा कर एक नेट बिल तैयार करता है। मुद्दा यह है कि उपभोक्ताओं ने तो सुविधाओं को लेने के लिए अपना पैसा जमा किया, लेकिन बावजूद इसके नप की लापरवाही के चलते उनसे यह सुविधा कभी भी छिन सकती है।
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हर महीने का लगभग चालीस लाख का बिल करना होता है अदा
नगर परिषद की स्ट्रीट लाइटों एवं अन्य आवासीय भवनों को जोड़कर बिजली निगम के तीनों डिवीजनों के प्रति महीने का बिल लगभग चालीस लाख रुपये बनता है। इस पर लगभग 25 लाख का जुर्माना लगने के बाद वह 65 लाख तक पहुंच जाता है। डिवीजन सिटी-1 की बात करें तो लगभग साढ़े 26 करोड़ का बिजली बिल नप पर बकाया है, इसमें 10 करोड़ बिजली बिल और लगभग 16 करोड़ जुर्माना है। इधर सिटी-2 में लगभग 31 करोड़ का बिल बकाया है। इसमें सात करोड़ रुपये बिल और 24 करोड़ जुर्माना है। वहीं 2008 में सब अर्बन डिवीजन का लगभग 25 लाख नप पर बकाया है, जिसमें से 9.98 लाख रुपये जुर्माने के हैं।
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बीते दो वर्ष में केवल एक करोड़ रुपये कराए गए जमा
निगम के अधिकारियों की माने तो 1999 से लेकर अब तक निगम की ओर से 2014 और 2015 में केवल एक करोड़ की राशि जमा कराई गई है। इससे पहले कभी पांच लाख तो कभी दस लाख रुपये ही जमा कराए गए जो कि जुर्माने को भी पूरा करने के लिए काफी नहीं थे।
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अधिकारी आते-जाते रहे लेकिन पंद्रह सालों में किसी ने नहीं भरा बिजली बिल
नगर परिषद अधिकारियों से जब यह पूछा गया कि उनके द्वारा कब-कब कितना बिल कराया गया है, बाबू से लेकर अधिकारी इस जवाब से बचते रहे। किसी भी बाबू एवं अधिकारी के पास सवाल का जवाब नहीं था। वहीं आलम यह था कि उन्हें यह तक नहीं पता था कि जो म्यूनिसिपल टैक्स निगम वसूलता है, वह कितना बनता है। वहीं 1999 से लेकर अब तक तीन बार चेयरमैन बदल चुके हैं। तीन साल के लिए प्रशासनिक अधिकारी ने भी कमान संभाली लेकिन किसी ने भी नप की हालत सुधारने की जहमत नहीं उठाई है। हालांकि वर्तमान चेयरपर्सन शकुंतला भांडोरिया बीते दो वर्षां में एक करोड़ रुपये जमा कराने का दावा जरूर करती है। लेकिन यह भी ऊंट के मुंह में जीरे के बराबर है।
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वर्जन
नगर परिषद को कई बार बिल जमा कराने के लिए इंटीमेशन दिया गया है, लेकिन बिल जमा नहीं हुआ। उच्चाधिकारियों को सूचित करा दिया गया है। निगम इस मामले को लेकर गंभीर है, यदि बिल जमा नहीं हुआ तो कनेक्शन काटने की कार्रवाई भी संभव है।
-राजेंद्र सिंह, एसडीओ, सिटी-1
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पुराने समय से ही बिजली बिल जमा नहीं कराए गए हैं। मैंने अपने कार्यकाल में एक करोड़ रुपये निगम में जमा कराए हैं। मेरे कार्यकाल से पहले रहे प्रधानों ने गंभीर होकर बिल नहीं भरा, जिसके चलते यह हाल है।
-शकुंतला भांडोरिया, चेयरपर्सन, नगर परिषद रेवाड़ी
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नगर परिषद पर निगम का यह बिल मेेरे समय से पहले का है। मैंने पदभार संभालते ही इसे हल कराने के लिए गंभीरता के साथ पांच फरवरी को होने वाली शुक्रवार की बैठक के एजेंडे में भी शामिल किया हुआ है। निगम के अधिकारियों से बात कर बिल को भरा जाएगा।
-डॉ. अरविंद बाल्याण, ईओ, नगर परिषद रेवाड़ी