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मास्टरां और किताबां खातर सड़क पर बैठीं म्हारी बेटियां.
ब्यूरो /अमर उजाला
Updated Tue, 10 Jan 2017 12:41 AM IST
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लघु सचिवालय के बाहर धरना
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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बीच सेशन में अपग्रेड हुए सुमाखेड़ा के राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल की कई बेटियां वार्ड-5 पार्षद अमित और वार्ड-3 पार्षद शारदा देवी के नेतृत्व में सोमवार को लघु सचिवालय के बाहर धरना देकर बैठ गईं। उनके अभिभावकों का कहना है कि मास्टरां और पढ़ाई के लिए किताबां खातर म्हारी बेटियों को सड़क पर बैठना पड़ ग्या। वह भी तब जबकि करीब डेढ़ महीने बाद ही 10वीं और 12वीं के बच्चों की परीक्षा होनी है। करीब तीन घंटे धरना प्रदर्शन के बाद कैंप ऑफिस में डीसी ने मंगलवार को जिले के सरप्लस टीचरों को स्कूल में पढ़ाने के लिए भेजने का वादा किया। जिसके बाद प्रदर्शन खत्म हुआ।
वापस बुला लिए थे डेपूटेशन पर आए टीचर
सुमाखेड़ा के प्राइमरी स्कूल को कुछ महीने पहले ही 12वीं कक्षा तक अपग्रेड किया गया था। स्कूल अपग्रेड होने के बाद जिला प्रशासन ने बच्चों को पढ़ाने के लिए डेपुटेशन पर कुछ टीचर भिजवाए, लेकिन 22 दिसंबर को ही सभी टीचरों को वापस बुला लिया गया। इसके बाद अब स्कूल में छठी क्लास से लेकर 12वीं तक पढ़ाने के लिए एक भी टीचर नहीं था। जिसके चलते स्कूल की छठवीं कक्षा से 12वीं कक्षा तक की छात्राओं ने लघु सचिवालय गेट पर प्रदर्शन किया।
प्राइवेट स्कूल छोड़कर सरकारी में पढ़ रहे 400 स्टूडेंट
स्कूल अपग्रेडेशन की मांग पर सुमाखेड़ी के ग्रामीण बच्चों समेत धरने पर बैठ गए थे। तब हवाला दिया गया था कि स्कूल 12वीं तक अपग्रेड करने के लिए कम से कम 317 पढ़ने वाले बच्चे होने जरूरी हैं। इसके बाद नार्म्स को पूरा करने के लिए गांव के सभी लोगों ने प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहे अपने बच्चों को वहां से सरकारी स्कूल में शिफ्ट करा दिया था। जिसके बाद अब स्कूल में 12वीं कक्षा तक कुल 425 बच्चे पढने के लिए जाते हैं। इनमें से महज प्राइमरी में पढ़ रहे 44 बच्चों के लिए ही 2 जेबीटी टीचर लगे हैं।
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टीचर नहीं लगाओगे तो बेटी कैसे पढ़ाओगे
लघु सचिवालय के सामने तीन घंटे तक शांतिपूर्वक धरना देने वाली छात्राएं ग्रामीण, सरपंच, पूर्व सरपंच, पंच और वार्ड पार्षदों के नेतृत्व में उपायुक्त कैंप कार्यालय पहुंचीं। हाथ में सरकार की बेटियों को पढ़ाने की योजनाओं पर अमल न होने वाले नारे लिखे चार्ट के साथ ही जुबां पर...टीचर नहीं लगाओगे तो बेटी कैसे पढाओगे, बेटी है अनमोल रतन, पढ़ाने का तो करो जतन, परीक्षा है सिर पर बेटी बैठी धरने पर....जैसे नारे थे। बच्चियों के पहुंचने की जानकारी पर उपायुक्त कैंप ऑफिस से बाहर आए और बच्चियों की समस्याएं सुनीं। बच्चियों ने बताया कि आठवीं तक मिलने वाली नि:शुल्क किताबें भी नहीं आई हैं।
आखिर कब टीचर आएंगे, मार्च के बाद
बच्चों की समस्या संबंधी ज्ञापन देखकर डीसी डॉ.यश गर्ग ने सभी मौजूद लोगों को आश्वासन दिया कि उनके स्कूल में 5-6 सरप्लस टीचर भेजे जाएंगे। इस पर वार्ड-5 के जिला पार्षद अमित ने कहा कि आखिर कब टीचर भेजेंगे। मार्च में परीक्षा बीतने के बाद। इस पर उपायुक्त ने मंगलवार को ही स्कूल में जितना संभव हो सकेंगे उतने सरप्लस टीचर भिजवाने का आश्वासन दिया। जिसके बाद बच्चियां, ग्रामीणों और अन्य लोगों के साथ वापस चली गईं।
बीच सेशन क्यों हुआ था स्कूल अपग्रेड
गौरतलब है कि एक आपराधिक मामले के बाद सूमाखेड़ी स्कूल के ग्रामीणों ने पास के गांव में बच्चियों को पढ़ाने से मना करते हुए घर बैठा लिया था। गांव के ही प्राइमरी स्कूल को अपग्रेड करने के लिए ग्रामीणों ने कई दिन धरना दिया था। गांव के प्राइमरी स्कूल पर ताला भी जड़ दिया गया था। प्रशासन से बात न बनी तो शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा के बिहाफ पर पीडब्लूडी मंत्री राव नरबीर सिंह ने स्कूल को अपग्रेड कराने का आश्वासन दिया था। जिसके बाद बीच सेशन प्राइमरी स्कूल को 12वीं तक अपग्रेड किया गया था।
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मार्च में परीक्षाएं होनी हैं। लेकिन टीचर न होने के चलते पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। इसलिए धरना देना पड़ा।
-जयमाला, छात्रा, 10वीं कक्षा
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परीक्षाएं सिर पर हैं, ऐसे में जिस समय पढ़ाई होनी चाहिए थीं, उस समय धरना देना पड़ रहा है। कोर्स काफी प्रभावित हो चुका है।
-भावना, छात्रा, 12वीं कक्षा
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सरकार एक ओर बेटी बचाने और बेटी पढाने का दावा करती है। लेकिन स्कूल अपग्रेड होने के बाद टीचर न होना दावे को खोखला साबित कर रहा है।
-सतबीर सिंह, पूर्व सरपंच, गांव सूमाखेड़ा
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न टीचर ही स्कूल में पढ़ाने को हैं और न ही किताबें बच्चों के लिए पढने के लिए सरकार की ओर से आई हैं।
-युक्ता, 10वीं कक्षा छात्रा
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पहले बेटियों की सुरक्षा पर सवाल था और अब बेटियों की पढ़ाई पर भी प्रश्नचिन्ह लगा है। डर लगता है कहीं फेल न हो जाएं।
-सोनिया, 12वीं कक्षा छात्रा
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सरकार ने तब बच्चों की शिक्षा के लिए स्कूल को तत्काल अपग्रेड कर दिया था। लेकिन प्रशासन ने अब तक टीचर नहीं भेजे। यह गलत है।
-अमित यादव, जिला पार्षद, वार्ड-5
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भले ही मेरे वार्ड की समस्या नहीं थी। लेकिन बेटियों की समस्या मेरी खुद की समस्या है। इसलिए उनके साथ प्रदर्शन में शामिल हुई हूं।
-शारदा देवी, जिला पार्षद, वार्ड-3
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गांव की बेटियों की शिक्षा की जिम्मेदारी ग्रामीणों के साथ ही सरकार की भी है। प्रशासन को चाहिए कि तत्काल टीचर भेजे।
-सुनीता, पंच, गांव सुमाखेड़ी
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गांव के ही स्कूल में मिड-डे मील बनाती हूं। साथ में खुद की बेटी भी स्कूल में पढने के लिए जाती है। लेकिन टीचर बिना क्या फायदा।
-मुनेश देवी, गांव सुमाखेड़ी
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किताबें न होने की बात पहले संज्ञान में आई थी। जिसके बाद विभागीय उच्चाधिकारियों से बात की थी। दो से तीन दिन में किताबें आ जाएंगीं। स्टाफ न होने की बात नोटिस में नहीं थी। मंगलवार को ही यथासंभव सरप्लस टीचर स्कूल में पढ़ाने के लिए भेजे जाएंगे।
-डॉ.यश गर्ग, उपायुक्त, जिला रेवाड़ी
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वापस बुला लिए थे डेपूटेशन पर आए टीचर
सुमाखेड़ा के प्राइमरी स्कूल को कुछ महीने पहले ही 12वीं कक्षा तक अपग्रेड किया गया था। स्कूल अपग्रेड होने के बाद जिला प्रशासन ने बच्चों को पढ़ाने के लिए डेपुटेशन पर कुछ टीचर भिजवाए, लेकिन 22 दिसंबर को ही सभी टीचरों को वापस बुला लिया गया। इसके बाद अब स्कूल में छठी क्लास से लेकर 12वीं तक पढ़ाने के लिए एक भी टीचर नहीं था। जिसके चलते स्कूल की छठवीं कक्षा से 12वीं कक्षा तक की छात्राओं ने लघु सचिवालय गेट पर प्रदर्शन किया।
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प्राइवेट स्कूल छोड़कर सरकारी में पढ़ रहे 400 स्टूडेंट
स्कूल अपग्रेडेशन की मांग पर सुमाखेड़ी के ग्रामीण बच्चों समेत धरने पर बैठ गए थे। तब हवाला दिया गया था कि स्कूल 12वीं तक अपग्रेड करने के लिए कम से कम 317 पढ़ने वाले बच्चे होने जरूरी हैं। इसके बाद नार्म्स को पूरा करने के लिए गांव के सभी लोगों ने प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहे अपने बच्चों को वहां से सरकारी स्कूल में शिफ्ट करा दिया था। जिसके बाद अब स्कूल में 12वीं कक्षा तक कुल 425 बच्चे पढने के लिए जाते हैं। इनमें से महज प्राइमरी में पढ़ रहे 44 बच्चों के लिए ही 2 जेबीटी टीचर लगे हैं।
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टीचर नहीं लगाओगे तो बेटी कैसे पढ़ाओगे
लघु सचिवालय के सामने तीन घंटे तक शांतिपूर्वक धरना देने वाली छात्राएं ग्रामीण, सरपंच, पूर्व सरपंच, पंच और वार्ड पार्षदों के नेतृत्व में उपायुक्त कैंप कार्यालय पहुंचीं। हाथ में सरकार की बेटियों को पढ़ाने की योजनाओं पर अमल न होने वाले नारे लिखे चार्ट के साथ ही जुबां पर...टीचर नहीं लगाओगे तो बेटी कैसे पढाओगे, बेटी है अनमोल रतन, पढ़ाने का तो करो जतन, परीक्षा है सिर पर बेटी बैठी धरने पर....जैसे नारे थे। बच्चियों के पहुंचने की जानकारी पर उपायुक्त कैंप ऑफिस से बाहर आए और बच्चियों की समस्याएं सुनीं। बच्चियों ने बताया कि आठवीं तक मिलने वाली नि:शुल्क किताबें भी नहीं आई हैं।
आखिर कब टीचर आएंगे, मार्च के बाद
बच्चों की समस्या संबंधी ज्ञापन देखकर डीसी डॉ.यश गर्ग ने सभी मौजूद लोगों को आश्वासन दिया कि उनके स्कूल में 5-6 सरप्लस टीचर भेजे जाएंगे। इस पर वार्ड-5 के जिला पार्षद अमित ने कहा कि आखिर कब टीचर भेजेंगे। मार्च में परीक्षा बीतने के बाद। इस पर उपायुक्त ने मंगलवार को ही स्कूल में जितना संभव हो सकेंगे उतने सरप्लस टीचर भिजवाने का आश्वासन दिया। जिसके बाद बच्चियां, ग्रामीणों और अन्य लोगों के साथ वापस चली गईं।
बीच सेशन क्यों हुआ था स्कूल अपग्रेड
गौरतलब है कि एक आपराधिक मामले के बाद सूमाखेड़ी स्कूल के ग्रामीणों ने पास के गांव में बच्चियों को पढ़ाने से मना करते हुए घर बैठा लिया था। गांव के ही प्राइमरी स्कूल को अपग्रेड करने के लिए ग्रामीणों ने कई दिन धरना दिया था। गांव के प्राइमरी स्कूल पर ताला भी जड़ दिया गया था। प्रशासन से बात न बनी तो शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा के बिहाफ पर पीडब्लूडी मंत्री राव नरबीर सिंह ने स्कूल को अपग्रेड कराने का आश्वासन दिया था। जिसके बाद बीच सेशन प्राइमरी स्कूल को 12वीं तक अपग्रेड किया गया था।
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मार्च में परीक्षाएं होनी हैं। लेकिन टीचर न होने के चलते पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। इसलिए धरना देना पड़ा।
-जयमाला, छात्रा, 10वीं कक्षा
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परीक्षाएं सिर पर हैं, ऐसे में जिस समय पढ़ाई होनी चाहिए थीं, उस समय धरना देना पड़ रहा है। कोर्स काफी प्रभावित हो चुका है।
-भावना, छात्रा, 12वीं कक्षा
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सरकार एक ओर बेटी बचाने और बेटी पढाने का दावा करती है। लेकिन स्कूल अपग्रेड होने के बाद टीचर न होना दावे को खोखला साबित कर रहा है।
-सतबीर सिंह, पूर्व सरपंच, गांव सूमाखेड़ा
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न टीचर ही स्कूल में पढ़ाने को हैं और न ही किताबें बच्चों के लिए पढने के लिए सरकार की ओर से आई हैं।
-युक्ता, 10वीं कक्षा छात्रा
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पहले बेटियों की सुरक्षा पर सवाल था और अब बेटियों की पढ़ाई पर भी प्रश्नचिन्ह लगा है। डर लगता है कहीं फेल न हो जाएं।
-सोनिया, 12वीं कक्षा छात्रा
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सरकार ने तब बच्चों की शिक्षा के लिए स्कूल को तत्काल अपग्रेड कर दिया था। लेकिन प्रशासन ने अब तक टीचर नहीं भेजे। यह गलत है।
-अमित यादव, जिला पार्षद, वार्ड-5
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भले ही मेरे वार्ड की समस्या नहीं थी। लेकिन बेटियों की समस्या मेरी खुद की समस्या है। इसलिए उनके साथ प्रदर्शन में शामिल हुई हूं।
-शारदा देवी, जिला पार्षद, वार्ड-3
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गांव की बेटियों की शिक्षा की जिम्मेदारी ग्रामीणों के साथ ही सरकार की भी है। प्रशासन को चाहिए कि तत्काल टीचर भेजे।
-सुनीता, पंच, गांव सुमाखेड़ी
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गांव के ही स्कूल में मिड-डे मील बनाती हूं। साथ में खुद की बेटी भी स्कूल में पढने के लिए जाती है। लेकिन टीचर बिना क्या फायदा।
-मुनेश देवी, गांव सुमाखेड़ी
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किताबें न होने की बात पहले संज्ञान में आई थी। जिसके बाद विभागीय उच्चाधिकारियों से बात की थी। दो से तीन दिन में किताबें आ जाएंगीं। स्टाफ न होने की बात नोटिस में नहीं थी। मंगलवार को ही यथासंभव सरप्लस टीचर स्कूल में पढ़ाने के लिए भेजे जाएंगे।
-डॉ.यश गर्ग, उपायुक्त, जिला रेवाड़ी