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Rewari News: मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं केंचुए

Thu, 22 Oct 2026 12:28 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Thu, 22 Oct 2026 12:28 AM IST
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Earthworms play a crucial role in increasing soil fertility.
रेवाड़ी। स्वस्थ मिट्टी बेहतर फसल उत्पादन और टिकाऊ कृषि व्यवस्था का आधार है। मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता बनाए रखने में केंचुओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। केंचुए मिट्टी को भुरभुरा बनाने, उसमें हवा और पानी के संचार को बेहतर करने तथा जैविक पदार्थों के अपघटन में मदद करते हैं।
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इसी महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विश्व केंचुआ दिवस मनाया जाता है। बावल कृषि महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. सत्यजीत ने बताया कि स्वस्थ मिट्टी ही स्वस्थ फसलों और बेहतर कृषि उत्पादन का आधार है। केंचुए मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
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उनकी गतिविधियों से मिट्टी की संरचना में सुधार होता है और पौधों की जड़ों तक हवा तथा पानी पहुंचने में सहायता मिलती है। इससे फसलों की वृद्धि के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनती हैं।
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केंचुए मिट्टी में मौजूद सूखे पत्तों और अन्य जैविक पदार्थों को विघटित करने की प्रक्रिया में योगदान देते हैं। इससे पोषक तत्वों के चक्रण में मदद मिलती है।
केंचुओं की गतिविधियों से बनने वाली वर्मी कास्टिंग यानी केंचुआ खाद भी जैविक खेती में उपयोगी मानी जाती है। इसका इस्तेमाल मिट्टी में जैविक पदार्थों की मात्रा और पोषक तत्वों की उपलब्धता बेहतर बनाने के लिए किया जाता है।

केंचुओं की मौजूदगी जैविक स्वास्थ्य का संकेत
मिट्टी में केंचुओं की मौजूदगी उसके जैविक स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकती है। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का असंतुलित इस्तेमाल, मिट्टी में जैविक पदार्थों की कमी तथा प्रतिकूल कृषि गतिविधियां केंचुओं के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं। ऐसे में खेतों में जैविक पदार्थों का उचित प्रबंधन और मिट्टी की सेहत का ध्यान रखना आवश्यक है।

पर्यावरण संरक्षण में निभाएं जिम्मेदारी
डॉ. सत्यजीत ने बताया कि विश्व केंचुआ दिवस का मुख्य उद्देश्य केंचुओं के संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण संतुलन के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। कृषि में केंचुओं की भूमिका को समझकर किसान मिट्टी के दीर्घकालिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में कदम उठा सकते हैं। इससे टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने और भविष्य के लिए उपजाऊ मिट्टी बचाए रखने में मदद मिल सकती है।

विद्यार्थियों ने दिया मृदा संरक्षण का संदेश:

कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर बावल में विश्व केंचुआ दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें विद्यार्थियों को केंचुओं के महत्व और टिकाऊ कृषि में उनकी भूमिका के बारे में बताया गया।

कार्यक्रम संयोजक डॉ. राहुल ने पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण और मृदा स्वास्थ्य सुधार में केंचुओं के योगदान की जानकारी दी। उन्होंने जैविक खाद और वर्मी कंपोस्ट अपनाने के लिए प्रेरित किया।


कार्यक्रम में पोस्टर निर्माण, नारा लेखन और भाषण प्रतियोगिताएं कराई गईं। इनमें विद्यार्थियों ने मृदा संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और टिकाऊ कृषि का संदेश दिया। इस अवसर पर महाविद्यालय के शिक्षक भी उपस्थित रहे।
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