{"_id":"68f91ebcc45feeaecf00736f","slug":"do-not-go-out-without-glasses-wash-your-eyes-frequently-with-clean-water-rewari-news-c-198-1-rew1001-227790-2025-10-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rewari News: बिना चश्मे के बाहर न निकलें, आंखों को बार-बार साफ पानी से धोएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rewari News: बिना चश्मे के बाहर न निकलें, आंखों को बार-बार साफ पानी से धोएं
विज्ञापन
फोटो: 01रेवाड़ी। नागरिक अस्पताल में ओपीडी के बाहर बैठे मरीज। संवाद
रेवाड़ी। बिना चश्मे के घर से बाहर न निकलें और आंखों को बार-बार साफ पानी से धोएं। दीपावली के त्योहार के बाद शहर की हवा में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) खतरनाक श्रेणी में पहुंच गया है। इससे लोगों को आंखों में जलन, पानी आना, एलर्जी और सांस लेने में कठिनाई जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सुबह और शाम के समय धुंध और स्मॉग की मोटी परत शहर को ढक लेती है जिससे दृश्यता कम हो गई है और हवा में घुला धुआं लोगों के लिए गंभीर समस्या बन गया है।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. कंचन यादव ने बताया कि हवा में मौजूद सूक्ष्म कण (पीएम 2.5 और पीएम 10) आंखों की नमी को कम कर देते हैं जिससे जलन, लालिमा और एलर्जी की शिकायतें बढ़ जाती हैं। उन्होंने लोगों से सलाह दी कि बिना चश्मे के बाहर न निकलें, आंखों को बार-बार साफ पानी से धोएं और किसी भी संक्रमण या जलन के मामले में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
फेफड़ों और सांस से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए भी यह हवा बेहद खतरनाक साबित हो रही है। चिकित्सकों ने दमा, एलर्जी, हृदय और फेफड़ों के रोगियों को विशेष सतर्क रहने की चेतावनी दी है। प्रदूषित हवा में मौजूद धूल और रासायनिक कण फेफड़ों में जमकर सांस फूलने, संक्रमण और संक्रमण संबंधी गंभीर बीमारियां पैदा कर सकते हैं।
विज्ञापन
विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि घर से बाहर निकलते समय मास्क का उपयोग करें, वाहन का अत्यधिक प्रयोग न करें और घर में एयर प्यूरीफायर या हरे पौधों का प्रयोग करें। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए प्रदूषण और ठंड का संयोजन विशेष रूप से खतरनाक है।
-- -- -- -- -- -
वर्जन
सुबह की सैर या बाहर व्यायाम फिलहाल न करें और अपनी सुरक्षा के लिए सर्दी और प्रदूषण से बचाव के सभी उपाय अपनाएं। लोगों को पर्याप्त पानी पीने, पौष्टिक आहार लेने और आवश्यकतानुसार डॉक्टर से परामर्श लेने की सलाह दी गई है ताकि इस प्रदूषित हवा के दुष्प्रभाव से बचा जा सके। -डॉ. गौरव यादव, फिजिशियन, नागरिक अस्पताल रेवाड़ी
विज्ञापन
सुबह और शाम के समय धुंध और स्मॉग की मोटी परत शहर को ढक लेती है जिससे दृश्यता कम हो गई है और हवा में घुला धुआं लोगों के लिए गंभीर समस्या बन गया है।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. कंचन यादव ने बताया कि हवा में मौजूद सूक्ष्म कण (पीएम 2.5 और पीएम 10) आंखों की नमी को कम कर देते हैं जिससे जलन, लालिमा और एलर्जी की शिकायतें बढ़ जाती हैं। उन्होंने लोगों से सलाह दी कि बिना चश्मे के बाहर न निकलें, आंखों को बार-बार साफ पानी से धोएं और किसी भी संक्रमण या जलन के मामले में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
विज्ञापन
फेफड़ों और सांस से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए भी यह हवा बेहद खतरनाक साबित हो रही है। चिकित्सकों ने दमा, एलर्जी, हृदय और फेफड़ों के रोगियों को विशेष सतर्क रहने की चेतावनी दी है। प्रदूषित हवा में मौजूद धूल और रासायनिक कण फेफड़ों में जमकर सांस फूलने, संक्रमण और संक्रमण संबंधी गंभीर बीमारियां पैदा कर सकते हैं।
विज्ञापन
विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि घर से बाहर निकलते समय मास्क का उपयोग करें, वाहन का अत्यधिक प्रयोग न करें और घर में एयर प्यूरीफायर या हरे पौधों का प्रयोग करें। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए प्रदूषण और ठंड का संयोजन विशेष रूप से खतरनाक है।
वर्जन
सुबह की सैर या बाहर व्यायाम फिलहाल न करें और अपनी सुरक्षा के लिए सर्दी और प्रदूषण से बचाव के सभी उपाय अपनाएं। लोगों को पर्याप्त पानी पीने, पौष्टिक आहार लेने और आवश्यकतानुसार डॉक्टर से परामर्श लेने की सलाह दी गई है ताकि इस प्रदूषित हवा के दुष्प्रभाव से बचा जा सके। -डॉ. गौरव यादव, फिजिशियन, नागरिक अस्पताल रेवाड़ी