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गुरु की भक्ति से मिलते हैं सुपरिणाम : मुनि प्रणम्य सागर
Mon, 24 Mar 2025 12:34 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Mon, 24 Mar 2025 12:34 AM IST
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फोटो : 28मॉडल टाउन स्थित दिगम्बर जैन मंदिर में प्रवचन देते मुनि प्रणम्य सागर। स्रोत : मंदिर
संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। नगर के मॉडल टाउन स्थित दिगम्बर जैन मंदिर में आयोजित प्रवचन जैनाचार्य विद्यासागर के शिष्य मुनि प्रणम्य सागर ने कहा है कि भगवान और गुरु की भक्ति से सुपरिणाम मिलते हैं।
उन्होंने कहा कि भगवान व गुरु की भक्ति अपने अंतरमन में बनाए रखोगे तो इसके सुपरिणाम मिलेंगे। भगवान व गुरु कितने ही दूर हों, लेकिन आपकी भक्ति उन्हें निकट ले आती है। सच्चे भाव से की गई भक्ति पुण्य लाभ देती है। उनके स्मरण मात्र से ही जीवन का कल्याण होता है। आप सभी रोजाना भगवान का अभिषेक व पूजा अर्चना करते हैं। इस पूजा अर्चना का सुफल तभी मिलेगा, जब आप भगवान के सिद्धांतों को जीवन में आत्मसात करेंगे। उन्होंने कहा कि उसी तरह गुरु आपसे कितने ही दूर चले जाएं, लेकिन आप अपनी सच्ची भक्ति न छोड़े।
आप जब सच्चे दिल से उन्हें स्मरण करेंगे तो आपके कल्याण का मार्ग प्रशस्त होगा। प्रवचन के उपरांत मंदिर में प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ का भक्तामर विधान हुआ। इस मौके पर समाज के प्रधान महेन्द्र कुमार जैन सर्राफ, उपप्रधान अरविन्द जैन, मंदिर प्रबंधन समिति के प्रधान दिनेश जैन लोहिया, सचिव दिनेश कुमार जैन, प्रदीप जैन, पदम जैन, अजय जैन, मुकेश जैन सर्राफ, मोहित जैन सीए, मुनि संघ के प्रधान सतीश जैन आदि उपस्थित थे।
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रेवाड़ी। नगर के मॉडल टाउन स्थित दिगम्बर जैन मंदिर में आयोजित प्रवचन जैनाचार्य विद्यासागर के शिष्य मुनि प्रणम्य सागर ने कहा है कि भगवान और गुरु की भक्ति से सुपरिणाम मिलते हैं।
उन्होंने कहा कि भगवान व गुरु की भक्ति अपने अंतरमन में बनाए रखोगे तो इसके सुपरिणाम मिलेंगे। भगवान व गुरु कितने ही दूर हों, लेकिन आपकी भक्ति उन्हें निकट ले आती है। सच्चे भाव से की गई भक्ति पुण्य लाभ देती है। उनके स्मरण मात्र से ही जीवन का कल्याण होता है। आप सभी रोजाना भगवान का अभिषेक व पूजा अर्चना करते हैं। इस पूजा अर्चना का सुफल तभी मिलेगा, जब आप भगवान के सिद्धांतों को जीवन में आत्मसात करेंगे। उन्होंने कहा कि उसी तरह गुरु आपसे कितने ही दूर चले जाएं, लेकिन आप अपनी सच्ची भक्ति न छोड़े।
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आप जब सच्चे दिल से उन्हें स्मरण करेंगे तो आपके कल्याण का मार्ग प्रशस्त होगा। प्रवचन के उपरांत मंदिर में प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ का भक्तामर विधान हुआ। इस मौके पर समाज के प्रधान महेन्द्र कुमार जैन सर्राफ, उपप्रधान अरविन्द जैन, मंदिर प्रबंधन समिति के प्रधान दिनेश जैन लोहिया, सचिव दिनेश कुमार जैन, प्रदीप जैन, पदम जैन, अजय जैन, मुकेश जैन सर्राफ, मोहित जैन सीए, मुनि संघ के प्रधान सतीश जैन आदि उपस्थित थे।
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