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68 करोड़ रुपये की राशि मिली, फिर भी पेयजल और सीवर ओवरफ्लो की समस्या बरकरार
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बाईपास पर नया गांव से शिव नगर पार्ट-2 सहित अन्य कॉलोनियों के लिए अम्रुत योजना के तहत पाइप लाइन डाल?
- फोटो : Rewari
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रेवाड़ी। शहर में पेयजल व सीवर व्यवस्था में सुधार के लिए अम्रुत योजना के तहत 68 करोड़ मिलने के बावजूद शहरवासी आज भी दोनों समस्याओं से त्रस्त हैं। पेयजल सप्लाई तीन दिन बाद मिलती है। सीवर ओवरफ्लो समस्या का अंत नहीं है। इसका बड़ा कारण योजनाबद्ध कार्य करने का अभाव है।
बता दें कि शहर की 48 साल पुरानी सीवर लाइन को बदलने के साथ ही लाइनों को चौड़ा किया जाना था। इसके लिए वर्ष 2018 में 34.78 करोड़ मिले, लेकिन बदलाव कुछ नहीं हुआ। इसी तरह पेयजल भंडारण से लेकर सप्लाई दुरुस्त करने के लिए भी 33.28 करोड़ की राशि मिली, लेकिन इस राशि की भी बंदर बांट कर दी गई है। नप अधिकारी घूमने के लिए इस राशि से तीन-तीन गाड़ियां चला रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर काम में शून्य हैै। ऐसे में सवाल है कि इस लापरवाही के लिए जवाबदेही किसकी है, जबकि अगस्त माह में प्रोजेक्ट ही पूरा हो जाएगा।
50 फीसदी से ज्यादा काम अधूरे
नगर परिषद की अनदेखी के कारण 31 मार्च को 66.59 करोड़ रुपये में से 45.46 करोड़ सरकार के पास जमा कराने पड़ सकते थे। लेकिन सरकार ने समय सीमा बढ़ाकर अब अगस्त तक कर दी है। वर्ष 2019 में शुरू हुए 20 कार्यों में से बूस्टिंग स्टेशन जैसे 8 महत्वपूर्ण कार्य शुरू तक नहीं हो सके। वहीं इतने ही कार्य महज दस 10 प्रतिशत हो सके हैं। नप की ओर से 30 जुलाई और 26 सितंबर 2019 को ठेकेदार को धीमी गति से काम करने पर चेतावनी दी गई थी। 6 जनवरी 2021 को भी नप की ओर से ठेकेदार को पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन नप की सक्रियता महज पत्रों तक दिखी।
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2016 में प्रपोजल हुआ था तैयार
जानकारी के लिए मार्च 2018 में इन विकास कार्यों को 18 माह में पूरा करने का टेंडर दिया गया था। लेकिन कोरोना की वजह से इसकी समय सीमा बढ़ाकर 31 मार्च 2021 कर दी गई थी। अम्रुत योजना 31 मार्च 2021 को पूरी हो रही है। वर्ष 2016 में प्रपोजल बनने के बाद 2018 में डीपीआर तैयार की गई थी। रेवाड़ी में 2019 में सीवर व पेयजल के लिए 68.59 करोड़ रुपये का टेंडर दे दिया गया था।
शहर में पेयजल और सीवर सबसे बड़ी समस्या
शहर में पेयजल व्यवस्था पूरी तरह से यमुना के पानी पर निर्भर है। जवाहर लाल कैनाल के माध्यम से शहर तक पानी पहुंचता है। इसके बाद इसको शोधित कर घर-घर तक पहुंचाया जाता है। भंडारण क्षमता की कमी से लेकर कॉलोनी में अंतिम घर तक पानी पहुंचाने के लिए लगाई गई मोटर पुरानी हो चुकी हैं। पुराने शहर में जर्जर पेयजल पाइपलाइन में सीवर का पानी मिल जाता है। शहर के लोगों को हर महीने पानी की समस्या का सामना करना पड़ता है। शहर के 31 वार्ड में से प्रत्येक वार्ड में सीवर ओवरफ्लो की शिकायतें रहती हैं।
एजेंसी के चुनाव में ही गड़बड़ी
शहरों में पेयजल व सीवर व्यवस्था का जिम्मा जन स्वास्थ्य विभाग के पास रहता है। लेकिन अम्रुत योजना के तहत ये दोनों कार्य कराने का जिम्मा नगर परिषद को दे दिया गया। नगर परिषद पहले से विवादों में रहा है। इतना बड़ा काम मिला तो ठीक से योजना तक तैयार नहीं हो पाई। इसका खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है। यदि यही कार्य जन स्वास्थ्य विभाग से कराया जाता तो वह जरूरत के हिसाब कार्यों को पूरा कर सकता था।
नगर परिषद, रेवाड़ी के एक्सईएन हेमंत यादव ने कहा कि अम्रुत योजना की समय सीमा बढ़ाकर अगस्त तक कर दी गई है। लेकिन अगले तीन माह भी पूरे कार्य नहीं हो पाएंगे। यदि पहले से चल रहे कार्य ही पूरे हो जाएं तो गनीमत है। ठेकेदार की गलती के चलते कार्यों में देरी हुई है।
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बता दें कि शहर की 48 साल पुरानी सीवर लाइन को बदलने के साथ ही लाइनों को चौड़ा किया जाना था। इसके लिए वर्ष 2018 में 34.78 करोड़ मिले, लेकिन बदलाव कुछ नहीं हुआ। इसी तरह पेयजल भंडारण से लेकर सप्लाई दुरुस्त करने के लिए भी 33.28 करोड़ की राशि मिली, लेकिन इस राशि की भी बंदर बांट कर दी गई है। नप अधिकारी घूमने के लिए इस राशि से तीन-तीन गाड़ियां चला रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर काम में शून्य हैै। ऐसे में सवाल है कि इस लापरवाही के लिए जवाबदेही किसकी है, जबकि अगस्त माह में प्रोजेक्ट ही पूरा हो जाएगा।
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50 फीसदी से ज्यादा काम अधूरे
नगर परिषद की अनदेखी के कारण 31 मार्च को 66.59 करोड़ रुपये में से 45.46 करोड़ सरकार के पास जमा कराने पड़ सकते थे। लेकिन सरकार ने समय सीमा बढ़ाकर अब अगस्त तक कर दी है। वर्ष 2019 में शुरू हुए 20 कार्यों में से बूस्टिंग स्टेशन जैसे 8 महत्वपूर्ण कार्य शुरू तक नहीं हो सके। वहीं इतने ही कार्य महज दस 10 प्रतिशत हो सके हैं। नप की ओर से 30 जुलाई और 26 सितंबर 2019 को ठेकेदार को धीमी गति से काम करने पर चेतावनी दी गई थी। 6 जनवरी 2021 को भी नप की ओर से ठेकेदार को पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन नप की सक्रियता महज पत्रों तक दिखी।
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2016 में प्रपोजल हुआ था तैयार
जानकारी के लिए मार्च 2018 में इन विकास कार्यों को 18 माह में पूरा करने का टेंडर दिया गया था। लेकिन कोरोना की वजह से इसकी समय सीमा बढ़ाकर 31 मार्च 2021 कर दी गई थी। अम्रुत योजना 31 मार्च 2021 को पूरी हो रही है। वर्ष 2016 में प्रपोजल बनने के बाद 2018 में डीपीआर तैयार की गई थी। रेवाड़ी में 2019 में सीवर व पेयजल के लिए 68.59 करोड़ रुपये का टेंडर दे दिया गया था।
शहर में पेयजल और सीवर सबसे बड़ी समस्या
शहर में पेयजल व्यवस्था पूरी तरह से यमुना के पानी पर निर्भर है। जवाहर लाल कैनाल के माध्यम से शहर तक पानी पहुंचता है। इसके बाद इसको शोधित कर घर-घर तक पहुंचाया जाता है। भंडारण क्षमता की कमी से लेकर कॉलोनी में अंतिम घर तक पानी पहुंचाने के लिए लगाई गई मोटर पुरानी हो चुकी हैं। पुराने शहर में जर्जर पेयजल पाइपलाइन में सीवर का पानी मिल जाता है। शहर के लोगों को हर महीने पानी की समस्या का सामना करना पड़ता है। शहर के 31 वार्ड में से प्रत्येक वार्ड में सीवर ओवरफ्लो की शिकायतें रहती हैं।
एजेंसी के चुनाव में ही गड़बड़ी
शहरों में पेयजल व सीवर व्यवस्था का जिम्मा जन स्वास्थ्य विभाग के पास रहता है। लेकिन अम्रुत योजना के तहत ये दोनों कार्य कराने का जिम्मा नगर परिषद को दे दिया गया। नगर परिषद पहले से विवादों में रहा है। इतना बड़ा काम मिला तो ठीक से योजना तक तैयार नहीं हो पाई। इसका खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है। यदि यही कार्य जन स्वास्थ्य विभाग से कराया जाता तो वह जरूरत के हिसाब कार्यों को पूरा कर सकता था।
नगर परिषद, रेवाड़ी के एक्सईएन हेमंत यादव ने कहा कि अम्रुत योजना की समय सीमा बढ़ाकर अगस्त तक कर दी गई है। लेकिन अगले तीन माह भी पूरे कार्य नहीं हो पाएंगे। यदि पहले से चल रहे कार्य ही पूरे हो जाएं तो गनीमत है। ठेकेदार की गलती के चलते कार्यों में देरी हुई है।