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Rewari News: शहर के चार ऐतिहासिक दरवाजों पर हिंदी में नाम लिखने की उठी मांग
Sun, 13 Sep 2026 11:12 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 13 Sep 2026 11:12 PM IST
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सर्कुलर रोड स्थित कानोड गेट। संवाद
रेवाड़ी। दुनिया भर में बोली जाने वाली प्रमुख भाषाओं में से एक हिंदी जो भारत की विविधता में एकता की प्रतीक है। हिंदी हमारी पहचान, संस्कृति और विचारों का महत्वपूर्ण वाहक है। हिंदी दिवस हमें अपनी भाषा के प्रति गर्व महसूस करने का अवसर प्रदान करता है, लेकिन शहर में स्थित चार ऐेतिहासिक दरवाजों भाड़ावास गेट (जयपुरी दरवाजा), गोकल गेट, दिल्ली गेट और कानोड गेट पर अंग्रेजी में नाम लिखे हैं। इन गेटों पर हिंदी में भी नाम लिखने की मांग उठने लगी है?
शहर में स्थित चारों गेट केवल आवागमन के रास्ते नहीं थे, बल्कि कभी शहर की सुरक्षा, पहचान और बाहरी क्षेत्रों से संपर्क के महत्वपूर्ण केंद्र हुआ करते थे। ऐतिहासिक रिकॉर्ड में रेवाड़ी के इन चार दरवाजों का उल्लेख ब्रिटिशकालीन ऐतिहासिक गेटों के रूप में मिलता है। अब लोग इन गेटों पर इनके नाम हिंदी में भी लिखवाने की मांग कर रहे हैं।
शहर निवासी विकास कुमार ने बताया कि रेवाड़ी के ये चारों ऐतिहासिक गेट शहर की पहचान हैं। इनके निर्माण से जुड़ा इतिहास और महत्व हिंदी में भी प्रमुखता से लिखा जाना चाहिए, ताकि युवा पीढ़ी इन्हें सिर्फ रास्ते के नाम से नहीं, बल्कि अपनी विरासत के रूप में जाने।
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राजेश कुमार ने बताया कि बाहर से आने वाला व्यक्ति भी इन गेटों को देखकर शहर का इतिहास समझ सकता है। इन पर हिंदी में भी नाम लिखा जाए और शिलापट्ट इतिहास लिखा जाए तो बेहतर होगा।
विनोद यादव ने कहा कि हिंदी दिवस सिर्फ हिंदी बोलने या लिखने तक सीमित नहीं होना चाहिए। हमारी ऐतिहासिक धरोहरों पर भी हिंदी को सम्मान मिलना चाहिए। अगर इन गेटों पर इनके इतिहास की जानकारी हिंदी में लिखी जाए तो युवा इनके महत्व को आसानी से समझ सकेंगे।
आज आधुनिक सड़कें और बाजार इन दरवाजों के आसपास फैल चुके हैं, लेकिन इनका महत्व कम नहीं हुआ है। वर्ष 2025 में केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने भी रेवाड़ी के चारों ऐतिहासिक गेटों के संरक्षण और सुंदरीकरण के लिए योजना तैयार करने के निर्देश दिए थे।
भाड़ावास गेट है शहर की पहचान
1803 में दिल्ली पर अधिकार करने के बाद अंग्रेजों ने 1804-1806 ई. में रेवाड़ी शहर के पश्चिम में भाड़ावास गांव के पास एक छावनी बनाई थी। इसी मार्ग और आवागमन के कारण यह ऐतिहासिक भाड़ावास गेट रेवाड़ी शहर के मुख्य प्रवेश द्वारों में शामिल हुआ। यह पुराना गेट रेवाड़ी के कायस्थवाड़ा मोहल्ला और मुख्य बाजार के पास स्थित है, जो शहर को भाड़ावास और अन्य क्षेत्रों से जोड़ता है।
गोकल गेट पुराने शहर के कारोबार का प्रवेश द्वार
गोकल गेट भी रेवाड़ी के ऐतिहासिक चार दरवाजों में शामिल है। इसका निर्माण वर्ष किस शासक या अधिकारी ने कराया, इसका स्पष्ट प्रामाणिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। हालांकि गेट के आसपास का क्षेत्र लंबे समय से शहर के पुराने व्यावसायिक केंद्र के रूप में विकसित रहा है। हरियाणा पुरातत्व विभाग के दस्तावेज में गोकुल गेट की ओर जाने वाले मार्ग पर स्थित 1675 में निर्मित रानी की ड्योढ़ी का उल्लेख मिलता है। इससे इस क्षेत्र की ऐतिहासिकता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
दिल्ली गेट शेरशाह सूरी के दौर से जुड़ा रास्ता
चारों दरवाजों में दिल्ली गेट का इतिहास अपेक्षाकृत स्पष्ट रूप से सामने आता है। शेरशाह सूरी ने 1540 से 1545 के बीच रेवाड़ी-पटौदी-गुरुग्राम और दिल्ली को जोड़ने वाले मार्ग के लिए दिल्ली गेट का निर्माण कराया था। उस दौर में यह रास्ता दिल्ली की ओर आने-जाने के लिए महत्वपूर्ण था। यानी यह गेट केवल शहर का प्रवेश द्वार नहीं था, बल्कि रेवाड़ी को दिल्ली से जोड़ने वाले पुराने मार्ग का हिस्सा भी था।
कानोड गेट जगन्नाथ मंदिर जाने का रास्ता
कानोड गेट को रेवाड़ी के चार ऐतिहासिक गेटों में शामिल किया गया है। जगन गेट का नाम रेवाड़ी के प्राचीन जगन्नाथ मंदिर से भी जोड़ा जाता है। यह मंदिर की ओर आने-जाने का प्रमुख मार्ग था। इसका संबंध शहर की पुरानी धार्मिक और व्यापारिक बस्ती से रहा है।
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शहर में स्थित चारों गेट केवल आवागमन के रास्ते नहीं थे, बल्कि कभी शहर की सुरक्षा, पहचान और बाहरी क्षेत्रों से संपर्क के महत्वपूर्ण केंद्र हुआ करते थे। ऐतिहासिक रिकॉर्ड में रेवाड़ी के इन चार दरवाजों का उल्लेख ब्रिटिशकालीन ऐतिहासिक गेटों के रूप में मिलता है। अब लोग इन गेटों पर इनके नाम हिंदी में भी लिखवाने की मांग कर रहे हैं।
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शहर निवासी विकास कुमार ने बताया कि रेवाड़ी के ये चारों ऐतिहासिक गेट शहर की पहचान हैं। इनके निर्माण से जुड़ा इतिहास और महत्व हिंदी में भी प्रमुखता से लिखा जाना चाहिए, ताकि युवा पीढ़ी इन्हें सिर्फ रास्ते के नाम से नहीं, बल्कि अपनी विरासत के रूप में जाने।
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राजेश कुमार ने बताया कि बाहर से आने वाला व्यक्ति भी इन गेटों को देखकर शहर का इतिहास समझ सकता है। इन पर हिंदी में भी नाम लिखा जाए और शिलापट्ट इतिहास लिखा जाए तो बेहतर होगा।
विनोद यादव ने कहा कि हिंदी दिवस सिर्फ हिंदी बोलने या लिखने तक सीमित नहीं होना चाहिए। हमारी ऐतिहासिक धरोहरों पर भी हिंदी को सम्मान मिलना चाहिए। अगर इन गेटों पर इनके इतिहास की जानकारी हिंदी में लिखी जाए तो युवा इनके महत्व को आसानी से समझ सकेंगे।
आज आधुनिक सड़कें और बाजार इन दरवाजों के आसपास फैल चुके हैं, लेकिन इनका महत्व कम नहीं हुआ है। वर्ष 2025 में केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने भी रेवाड़ी के चारों ऐतिहासिक गेटों के संरक्षण और सुंदरीकरण के लिए योजना तैयार करने के निर्देश दिए थे।
भाड़ावास गेट है शहर की पहचान
1803 में दिल्ली पर अधिकार करने के बाद अंग्रेजों ने 1804-1806 ई. में रेवाड़ी शहर के पश्चिम में भाड़ावास गांव के पास एक छावनी बनाई थी। इसी मार्ग और आवागमन के कारण यह ऐतिहासिक भाड़ावास गेट रेवाड़ी शहर के मुख्य प्रवेश द्वारों में शामिल हुआ। यह पुराना गेट रेवाड़ी के कायस्थवाड़ा मोहल्ला और मुख्य बाजार के पास स्थित है, जो शहर को भाड़ावास और अन्य क्षेत्रों से जोड़ता है।
गोकल गेट पुराने शहर के कारोबार का प्रवेश द्वार
गोकल गेट भी रेवाड़ी के ऐतिहासिक चार दरवाजों में शामिल है। इसका निर्माण वर्ष किस शासक या अधिकारी ने कराया, इसका स्पष्ट प्रामाणिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। हालांकि गेट के आसपास का क्षेत्र लंबे समय से शहर के पुराने व्यावसायिक केंद्र के रूप में विकसित रहा है। हरियाणा पुरातत्व विभाग के दस्तावेज में गोकुल गेट की ओर जाने वाले मार्ग पर स्थित 1675 में निर्मित रानी की ड्योढ़ी का उल्लेख मिलता है। इससे इस क्षेत्र की ऐतिहासिकता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
दिल्ली गेट शेरशाह सूरी के दौर से जुड़ा रास्ता
चारों दरवाजों में दिल्ली गेट का इतिहास अपेक्षाकृत स्पष्ट रूप से सामने आता है। शेरशाह सूरी ने 1540 से 1545 के बीच रेवाड़ी-पटौदी-गुरुग्राम और दिल्ली को जोड़ने वाले मार्ग के लिए दिल्ली गेट का निर्माण कराया था। उस दौर में यह रास्ता दिल्ली की ओर आने-जाने के लिए महत्वपूर्ण था। यानी यह गेट केवल शहर का प्रवेश द्वार नहीं था, बल्कि रेवाड़ी को दिल्ली से जोड़ने वाले पुराने मार्ग का हिस्सा भी था।
कानोड गेट जगन्नाथ मंदिर जाने का रास्ता
कानोड गेट को रेवाड़ी के चार ऐतिहासिक गेटों में शामिल किया गया है। जगन गेट का नाम रेवाड़ी के प्राचीन जगन्नाथ मंदिर से भी जोड़ा जाता है। यह मंदिर की ओर आने-जाने का प्रमुख मार्ग था। इसका संबंध शहर की पुरानी धार्मिक और व्यापारिक बस्ती से रहा है।
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सर्कुलर रोड स्थित कानोड गेट। संवाद