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Rewari News: श्रवण कुमार के वध से दशरथ को मिला पुत्र वियोग का शाप
Mon, 12 Oct 2026 11:34 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Mon, 12 Oct 2026 11:34 PM IST
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बाण लगने के बाद घायल हुए श्रवण व राजा दशरथ के बीच चल रहा संवाद। स्त्रोत: कमेटी
रेवाड़ी। रेलवे कॉलोनी स्थित श्रीराम मंदिर रेलवे ड्रामेटिक क्लब की ओर से चल रही रामलीला के दूसरे दिन श्रवण कुमार प्रसंग का मंचन किया गया। श्रवण कुमार पिता का प्यास बुझाने के लिए पानी लेने सरयू के तट पर पहुंचते हैं। इसी दौरान दशरथ जानवर समझ कर बाण चला देते है। बाण लगने से श्रवण की मौत हो जाती है। श्रवण कुमार राजा दशरथ को पुत्र वियोग का शाप देते हैं।
रामलीला के मुख्य अतिथि उत्तर पश्चिम रेलवे के सहायक मंडल सिग्नल एवं टेलीकॉम इंजीनियर एमके सिंह रहे। रामलीला में दिखाया गया कि श्रवण कुमार अपने नेत्रहीन माता-पिता को तीर्थ यात्रा पर लेकर जा रहे है।
रास्ते में माता-पिता को प्यास लगने पर वह सरयू नदी से पानी लेने पहुंचे। इसी दौरान राजा दशरथ ने उन्हें जंगली जानवर समझकर बाण चला दिया। बाण लगने से श्रवण कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए। अंतिम समय में वह राजा दशरथ से कहते हैं कि वे पानी लेजाकर उनके माता-पिता को पिला दे और घटना की जानकारी दे दें।
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जब दशत श्रवण कुमार के माता-पिता के पास पहुंचते हैं तो वे राजा दशरथ को शाप देते हैं कि जिस तरह वे पुत्र वियोग में प्राण त्याग रहे हैं, उसी तरह राजा दशरथ को भी पुत्र वियोग सहना पड़ेगा।
इसके बाद राजा दशरथ संतान के लिए गुरु वशिष्ठ के कहने पर श्रृंगी ऋषि से पुत्रेष्टि यज्ञ करवाया। यज्ञ के फलस्वरूप राजा दशरथ के घर भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का जन्म हुआ। गुरु विश्वामित्र राम-लक्ष्मण को अपने साथ ले जाते हैं। बाद में श्रीराम और लक्ष्मण ताड़का वध करते हैं।
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रामलीला के मुख्य अतिथि उत्तर पश्चिम रेलवे के सहायक मंडल सिग्नल एवं टेलीकॉम इंजीनियर एमके सिंह रहे। रामलीला में दिखाया गया कि श्रवण कुमार अपने नेत्रहीन माता-पिता को तीर्थ यात्रा पर लेकर जा रहे है।
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रास्ते में माता-पिता को प्यास लगने पर वह सरयू नदी से पानी लेने पहुंचे। इसी दौरान राजा दशरथ ने उन्हें जंगली जानवर समझकर बाण चला दिया। बाण लगने से श्रवण कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए। अंतिम समय में वह राजा दशरथ से कहते हैं कि वे पानी लेजाकर उनके माता-पिता को पिला दे और घटना की जानकारी दे दें।
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जब दशत श्रवण कुमार के माता-पिता के पास पहुंचते हैं तो वे राजा दशरथ को शाप देते हैं कि जिस तरह वे पुत्र वियोग में प्राण त्याग रहे हैं, उसी तरह राजा दशरथ को भी पुत्र वियोग सहना पड़ेगा।
इसके बाद राजा दशरथ संतान के लिए गुरु वशिष्ठ के कहने पर श्रृंगी ऋषि से पुत्रेष्टि यज्ञ करवाया। यज्ञ के फलस्वरूप राजा दशरथ के घर भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का जन्म हुआ। गुरु विश्वामित्र राम-लक्ष्मण को अपने साथ ले जाते हैं। बाद में श्रीराम और लक्ष्मण ताड़का वध करते हैं।