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Rewari News: महर्षि विश्वामित्र के आग्रह पर राम-लक्ष्मण को भेजने को राजी हुए दशरथ
Sun, 11 Oct 2026 12:26 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 11 Oct 2026 12:26 AM IST
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मेन बाजार में आयोजित रामलीला का दृश्य। स्रोत : संस्था
धारूहेड़ा। मेन बाजार स्थित लाल मनीराम बाग में श्री राम रामलीला क्लब की ओर से श्रीराम जन्म, महर्षि विश्वामित्र के आग्रह पर श्रीराम व लक्ष्मण को भेजने के लिए राजा दशरथ के भेजने के प्रसंग का मंचन किया गया। श्रीराम का जन्म होते ही दर्शकों ने जयकारे लगाए।
रामलीला में दिखाया गया कि महाराजा दशरथ वृद्धावस्था तक संतान सुख से वंचित रहने के कारण चिंतित हैं। वे गुरु वशिष्ठ के पास पहुंचकर पुत्र प्राप्ति का उपाय पूछते हैं। गुरु वशिष्ठ के परामर्श पर महाराजा दशरथ शृंगी ऋषि से पुत्रेष्टि यज्ञ करवाते हैं।
यज्ञ से प्रसन्न होकर अग्निदेव उन्हें खीर प्रदान करते हैं, जिसे राजा अपनी तीनों रानियों में वितरित कर देते हैं। इसके फलस्वरूप माता कौशल्या के गर्भ से भगवान श्रीराम, माता कैकेयी के गर्भ से भरत तथा माता सुमित्रा के गर्भ से लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म होता है।
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श्रीराम जन्मोत्सव के मंचन के दौरान रामलीला स्थल पर उत्साह और उल्लास का माहौल बन गया। इसके बाद महर्षि विश्वामित्र के यज्ञ में मारीच और सुबाहु द्वारा बाधा डालने का प्रसंग प्रस्तुत किया गया।
राक्षसों के आतंक से परेशान महर्षि विश्वामित्र यज्ञ की रक्षा के लिए राजा दशरथ के दरबार में पहुंचते हैं और उनसे श्रीराम व लक्ष्मण को साथ भेजने का आग्रह करते हैं।
पुत्रों के प्रति स्नेह के कारण महाराजा दशरथ पहले संकोच करते हैं, लेकिन गुरु वशिष्ठ के समझाने पर वे दोनों राजकुमारों को महर्षि विश्वामित्र के साथ भेजने के लिए सहमत हो जाते हैं।
इस प्रकार श्रीराम और लक्ष्मण महर्षि विश्वामित्र के साथ यज्ञ की रक्षा के लिए प्रस्थान करते हैं। इन प्रसंगों के माध्यम से धर्म की रक्षा, गुरु की आज्ञा के पालन और कर्तव्यनिष्ठा का संदेश दिया गया। दर्शकों ने कलाकारों के अभिनय की सराहना की।
इन कलाकारों ने निभाया जीवंत किरदार
रामलीला में महाराजा दशरथ की भूमिका रमेश सिकरवाल, गुरु वशिष्ठ की रत्न चंद सैनी, सुमंत्र की दलीप सिकरवाल, महर्षि विश्वामित्र की प्रकाश प्रजापत, मारीच की डॉ. सुभाष अग्रवाल, सुबाहु की शेर सिंह प्रजापत, कैकेयी की अरुण सैन, कौशल्या की लक्ष्मण प्रजापत ने निभाई। इसके अलावा लखपत शर्मा, राहुल जोशी, तरुण शौर्या, मुकेश चांगा, लीलाधर सैन, नवल सैनी, राजकुमार शर्मा और डॉ. अश्विनी शर्मा ने भी विभिन्न भूमिकाओं का निर्वहन किया। श्री राम रामलीला क्लब की ओर से प्रस्तुत इस मंचन ने दर्शकों को रामायण की गौरवशाली परंपरा से जोड़ते हुए भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।
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रामलीला में दिखाया गया कि महाराजा दशरथ वृद्धावस्था तक संतान सुख से वंचित रहने के कारण चिंतित हैं। वे गुरु वशिष्ठ के पास पहुंचकर पुत्र प्राप्ति का उपाय पूछते हैं। गुरु वशिष्ठ के परामर्श पर महाराजा दशरथ शृंगी ऋषि से पुत्रेष्टि यज्ञ करवाते हैं।
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यज्ञ से प्रसन्न होकर अग्निदेव उन्हें खीर प्रदान करते हैं, जिसे राजा अपनी तीनों रानियों में वितरित कर देते हैं। इसके फलस्वरूप माता कौशल्या के गर्भ से भगवान श्रीराम, माता कैकेयी के गर्भ से भरत तथा माता सुमित्रा के गर्भ से लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म होता है।
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श्रीराम जन्मोत्सव के मंचन के दौरान रामलीला स्थल पर उत्साह और उल्लास का माहौल बन गया। इसके बाद महर्षि विश्वामित्र के यज्ञ में मारीच और सुबाहु द्वारा बाधा डालने का प्रसंग प्रस्तुत किया गया।
राक्षसों के आतंक से परेशान महर्षि विश्वामित्र यज्ञ की रक्षा के लिए राजा दशरथ के दरबार में पहुंचते हैं और उनसे श्रीराम व लक्ष्मण को साथ भेजने का आग्रह करते हैं।
पुत्रों के प्रति स्नेह के कारण महाराजा दशरथ पहले संकोच करते हैं, लेकिन गुरु वशिष्ठ के समझाने पर वे दोनों राजकुमारों को महर्षि विश्वामित्र के साथ भेजने के लिए सहमत हो जाते हैं।
इस प्रकार श्रीराम और लक्ष्मण महर्षि विश्वामित्र के साथ यज्ञ की रक्षा के लिए प्रस्थान करते हैं। इन प्रसंगों के माध्यम से धर्म की रक्षा, गुरु की आज्ञा के पालन और कर्तव्यनिष्ठा का संदेश दिया गया। दर्शकों ने कलाकारों के अभिनय की सराहना की।
इन कलाकारों ने निभाया जीवंत किरदार
रामलीला में महाराजा दशरथ की भूमिका रमेश सिकरवाल, गुरु वशिष्ठ की रत्न चंद सैनी, सुमंत्र की दलीप सिकरवाल, महर्षि विश्वामित्र की प्रकाश प्रजापत, मारीच की डॉ. सुभाष अग्रवाल, सुबाहु की शेर सिंह प्रजापत, कैकेयी की अरुण सैन, कौशल्या की लक्ष्मण प्रजापत ने निभाई। इसके अलावा लखपत शर्मा, राहुल जोशी, तरुण शौर्या, मुकेश चांगा, लीलाधर सैन, नवल सैनी, राजकुमार शर्मा और डॉ. अश्विनी शर्मा ने भी विभिन्न भूमिकाओं का निर्वहन किया। श्री राम रामलीला क्लब की ओर से प्रस्तुत इस मंचन ने दर्शकों को रामायण की गौरवशाली परंपरा से जोड़ते हुए भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।

मेन बाजार में आयोजित रामलीला का दृश्य। स्रोत : संस्था