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एक और वैरी गुड नहीं ला सका यस्सु
Updated Thu, 28 Sep 2017 11:59 PM IST
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एक और वैरी गुड नहीं ला सका यस्सु ...
प्रवीण शर्मा
रेवाड़ी।
एक बार वैरीगुड लाने का वादा करके गया उसका बेटा यस्सु वापस नहीं आया। मां को भी पता नहीं था कि जो वादा बेटा करके जा रहा है वह पूरा ही नहीं हो सकेगा। असल में नई बस्सी निवासी सुनील का पांच वर्षीय बेटा यस्सु उर्फ यश पढ़ाई में बेहद की होशियार था। सर्कुलर रोड स्थित नई आबादी में रहने सुनील अपने परिवार के साथ रहता। उसका पांच साल का बेटा यस्सु केजी का छात्र था। वीरवार सुबह हुई घटना के बाद मानो पूरे परिवार को ही झकझोर दिया। हादसे के बाद यस्सु की मां रेणु का रो-रोकर बुरा हाल था। अपने बेटे को वापस लाने की गुहार करती रेणु वहां बैठी अन्य महिलाओं के पैर छूकर यस्सु को लाने की गुहार लगाती रही। पीड़ित परिवार को सांत्वना देने आई अन्य महिलाएं रेणु को ढांढस बंधाती। अपने बेटे के गम में थोड़ी-थोड़ी देर में बेहोश होने वाली रेणु का विलाप सुनकर वहां मौजूद अन्य लोगों की आंखें भर आई थीं। उधर, यस्सु के पिता सुनील को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था। मानो बेटे के गम ने उसके बोलने की शक्ति ही छीन ली हो। जो भी घर पहुंचता सुनील की भीगी आंखें बेटे का गम बता देतीं। इसी के साथ आंखों से और तेज आंसू बह निकलते। यस्सु के पास एक छोटी साइकिल थी। इसे वह अपनी गली और घर में परिवार के अन्य छोटे बच्चों के साथ चलाता था। बस अब तो परिवार में आने वाला हर कोई उसी साइकिल की तरफ टकटकी लगाकर देख रहा था। वहीं महिलाओं के साथ विलाप कर रही यस्सु की भाभी ज्योति का कहना था कि अभी तो बाय, बाय बोलकर गया था। क्या पता था कि फिर नहीं लौटेगा।
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प्रवीण शर्मा
रेवाड़ी।
एक बार वैरीगुड लाने का वादा करके गया उसका बेटा यस्सु वापस नहीं आया। मां को भी पता नहीं था कि जो वादा बेटा करके जा रहा है वह पूरा ही नहीं हो सकेगा। असल में नई बस्सी निवासी सुनील का पांच वर्षीय बेटा यस्सु उर्फ यश पढ़ाई में बेहद की होशियार था। सर्कुलर रोड स्थित नई आबादी में रहने सुनील अपने परिवार के साथ रहता। उसका पांच साल का बेटा यस्सु केजी का छात्र था। वीरवार सुबह हुई घटना के बाद मानो पूरे परिवार को ही झकझोर दिया। हादसे के बाद यस्सु की मां रेणु का रो-रोकर बुरा हाल था। अपने बेटे को वापस लाने की गुहार करती रेणु वहां बैठी अन्य महिलाओं के पैर छूकर यस्सु को लाने की गुहार लगाती रही। पीड़ित परिवार को सांत्वना देने आई अन्य महिलाएं रेणु को ढांढस बंधाती। अपने बेटे के गम में थोड़ी-थोड़ी देर में बेहोश होने वाली रेणु का विलाप सुनकर वहां मौजूद अन्य लोगों की आंखें भर आई थीं। उधर, यस्सु के पिता सुनील को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था। मानो बेटे के गम ने उसके बोलने की शक्ति ही छीन ली हो। जो भी घर पहुंचता सुनील की भीगी आंखें बेटे का गम बता देतीं। इसी के साथ आंखों से और तेज आंसू बह निकलते। यस्सु के पास एक छोटी साइकिल थी। इसे वह अपनी गली और घर में परिवार के अन्य छोटे बच्चों के साथ चलाता था। बस अब तो परिवार में आने वाला हर कोई उसी साइकिल की तरफ टकटकी लगाकर देख रहा था। वहीं महिलाओं के साथ विलाप कर रही यस्सु की भाभी ज्योति का कहना था कि अभी तो बाय, बाय बोलकर गया था। क्या पता था कि फिर नहीं लौटेगा।