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Rewari News: तीन दिन से गोवंश भूखा, गोरक्षा समिति के सदस्यों ने सचिवालय पर दिया धरना
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धारूहेड़ा स्थित गोशाला में चारा नहीं होने से खाली पड़ी खोर। संवाद
- फोटो : Rewari
रेवाड़ी,धारूहेड़ा। करीब दो वर्ष पूर्व प्रशासन की ओर से धारूहेड़ा कस्बा में बनाई गई श्री नंदू गोशाला में पिछले 3 दिन से पशुओं के लिए चारा खत्म है, जिससे 500 से ज्यादा गोवंश के सामने भूखा मरने की नौबत आ गई है। नगर पालिका धारूहेड़ा की ओर से ठेकेदार की पेमेंट नहीं करने की वजह से गोशाला में चारा देना बंद कर दिया है। गौशाला प्रबंधन का कार्य देखने वाली कार्यकारिणी के सदस्य वीरवार को डीडीपीओ को ज्ञापन सौंपनें के बाद धारूहेड़ा नगर पालिका प्रधान के खिलाफ नारेबाजी कर धरना शुरू कर दिया।
बतादें कि नगरपालिका की ओर से सितंबर माह की करीब 8 लाख रुपये की पेमेंट को रोक दिया है। इसके साथ ही अक्तूबर व नवंबर माह की प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिली है, जिसकी वजह से ठेकेदार ने तीन से चारा भेजना बंद कर दिया है।
2 साल पहले धारूहेड़ा कस्बे के गरीब नगर में निकाय विभाग की 7 एकड़ जमीन पर गौशाला बनाई गई थी। गोशाला का नाम नंदू गोशाला और उपचार सेंटर रखा गया। निकाय विभाग ने इस पर 30 लाख रुपए खर्च किए। गोशाला प्रबंधन के लिए बनी कमेटी ने गांव-गांव जाकर 50 लाख रुपए से ज्यादा एकत्रित करके इसे भव्य गौशाला का रूप दिया। गोशाला में इस समय 500 से ज्यादा नंदी व गाय रखी गई हैं। गोशाला में पशुओं के चारे के लिए सरकारी स्तर पर टेंडर छोड़ा गया था।
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पिछले कई सालों से रेवाड़ी के अलावा धारूहेड़ा, बावल में पशुओं की वजह से कई लोगों की जान चली गई थी। कई लोग बुरी तरह जख्मी हुए। उसके बाद पशुओं को पकड़ने की मांग ने जोर पकड़ा तो धारूहेड़ा में 7 एकड़ जमीन पर गोशाला बनाई गई, जिसमें पिछले 2 साल के अंदर 500 से बेसाहरा पशुओं को पकड़कर रखा गया। शुरुआत में इनके रख-रखाव को लेकर बड़े दावे किए गए, लेकिन अब इन्हें चारा ही नहीं मिल रहा है।
रोजाना लगता है 70-80 क्विटंल चारा
इस गोशाला में रखे गए 500 से ज्यादा पशुओं को रोजाना 70-80 क्विंटल चारा खिलाया जाता है। कभी कभार कुछ दानी भी गोशाला में चारा भेंट कर जाते हैं, लेकिन इतने सारे पशुओं को रोजाना चारा खिलाने में निकाय विभाग का सहयोग बहुत जरूरी है। गौशाला प्रधान ने कहा कि कुछ माह पहले जब इसी तरह की समस्या खड़ी हुई तब भी कुछ दानी लोगों ने मदद की थी। उन्हें पशुओं के चारे के लिए अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
गोशाला में पिछले दिन से गोवंश के लिए चारा नहीं है। धारूहेड़ा नगर पालिका चेयरमैन व अधिकारी मिलकर ठेकेदार की पेमेंट नहीं कर रहे। गोशाला बनाते वक्त कहा गया था कि अगर दानियों की तरफ से चारा नहीं मिला तो नगर पालिका और रेवाड़ी नगर परिषद इसका इंतजाम करेगी। सरकारी टेंडर छोड़ा गया, लेकिन अब चारे के नाम पर गोवंशों पर अत्याचार किया जा रहा है।
-रोहित यादव, प्रधान श्री नंदू गोशाला
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बतादें कि नगरपालिका की ओर से सितंबर माह की करीब 8 लाख रुपये की पेमेंट को रोक दिया है। इसके साथ ही अक्तूबर व नवंबर माह की प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिली है, जिसकी वजह से ठेकेदार ने तीन से चारा भेजना बंद कर दिया है।
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2 साल पहले धारूहेड़ा कस्बे के गरीब नगर में निकाय विभाग की 7 एकड़ जमीन पर गौशाला बनाई गई थी। गोशाला का नाम नंदू गोशाला और उपचार सेंटर रखा गया। निकाय विभाग ने इस पर 30 लाख रुपए खर्च किए। गोशाला प्रबंधन के लिए बनी कमेटी ने गांव-गांव जाकर 50 लाख रुपए से ज्यादा एकत्रित करके इसे भव्य गौशाला का रूप दिया। गोशाला में इस समय 500 से ज्यादा नंदी व गाय रखी गई हैं। गोशाला में पशुओं के चारे के लिए सरकारी स्तर पर टेंडर छोड़ा गया था।
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पिछले कई सालों से रेवाड़ी के अलावा धारूहेड़ा, बावल में पशुओं की वजह से कई लोगों की जान चली गई थी। कई लोग बुरी तरह जख्मी हुए। उसके बाद पशुओं को पकड़ने की मांग ने जोर पकड़ा तो धारूहेड़ा में 7 एकड़ जमीन पर गोशाला बनाई गई, जिसमें पिछले 2 साल के अंदर 500 से बेसाहरा पशुओं को पकड़कर रखा गया। शुरुआत में इनके रख-रखाव को लेकर बड़े दावे किए गए, लेकिन अब इन्हें चारा ही नहीं मिल रहा है।
रोजाना लगता है 70-80 क्विटंल चारा
इस गोशाला में रखे गए 500 से ज्यादा पशुओं को रोजाना 70-80 क्विंटल चारा खिलाया जाता है। कभी कभार कुछ दानी भी गोशाला में चारा भेंट कर जाते हैं, लेकिन इतने सारे पशुओं को रोजाना चारा खिलाने में निकाय विभाग का सहयोग बहुत जरूरी है। गौशाला प्रधान ने कहा कि कुछ माह पहले जब इसी तरह की समस्या खड़ी हुई तब भी कुछ दानी लोगों ने मदद की थी। उन्हें पशुओं के चारे के लिए अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
गोशाला में पिछले दिन से गोवंश के लिए चारा नहीं है। धारूहेड़ा नगर पालिका चेयरमैन व अधिकारी मिलकर ठेकेदार की पेमेंट नहीं कर रहे। गोशाला बनाते वक्त कहा गया था कि अगर दानियों की तरफ से चारा नहीं मिला तो नगर पालिका और रेवाड़ी नगर परिषद इसका इंतजाम करेगी। सरकारी टेंडर छोड़ा गया, लेकिन अब चारे के नाम पर गोवंशों पर अत्याचार किया जा रहा है।
-रोहित यादव, प्रधान श्री नंदू गोशाला