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कांग्रेस को मनरेगा के नियमों में बदलाव पर आपत्ति : चिरंजीव
Fri, 30 Jan 2026 11:53 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Fri, 30 Jan 2026 11:53 PM IST
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गांव में दौरे के दौरान जानकारी देते पूर्व विधायक चिरंजीव राव। स्रोत : प्रवक्ता
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रेवाड़ी। अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव एवं पूर्व विधायक चिरंजीव राव ने गांव काकोडिया और बीकानेर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि कांग्रेस को मनरेगा का नाम बदलने पर नहीं बल्कि नियमों में बदलाव करने पर आपत्ति है।
उन्होंने कहा कि भाजपा मनरेगा का नाम बदलने की आड़ में इस योजना को धीरे-धीरे खत्म करने की साजिश रच रही है। पहले जहां मनरेगा के तहत 90 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार वहन करती थी, अब उसे बदलकर 60:40 के अनुपात में कर दिया गया है, जिसमें 40 प्रतिशत भार राज्य सरकारों पर डाल दिया गया है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा सहित कई राज्य पहले से ही आर्थिक संकट में हैं। राज्य सरकार न तो किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य दे पा रही है, न ही ओलावृष्टि व वर्षा से फसल खराब होने पर उचित मुआवजा। ऐसे में मनरेगा के लिए राज्य सरकार 40 प्रतिशत धनराशि कहां से लाएगी, यह बड़ा सवाल है। यह बदलाव मनरेगा को कमजोर करने की एक सोची-समझी साजिश है।
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चिरंजीव राव ने कहा कि लॉकडाउन के कठिन समय में मनरेगा ही वह योजना थी जिसने गरीब परिवारों को रोजगार और दिहाड़ी देकर उनके घर का चूल्हा जलाए रखा। यह योजना कांग्रेस पार्टी की देन है, जिसे यूपीए सरकार के समय गरीब, मजदूर और किसान को ध्यान में रखकर लागू किया गया था।
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उन्होंने कहा कि भाजपा मनरेगा का नाम बदलने की आड़ में इस योजना को धीरे-धीरे खत्म करने की साजिश रच रही है। पहले जहां मनरेगा के तहत 90 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार वहन करती थी, अब उसे बदलकर 60:40 के अनुपात में कर दिया गया है, जिसमें 40 प्रतिशत भार राज्य सरकारों पर डाल दिया गया है।
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उन्होंने कहा कि हरियाणा सहित कई राज्य पहले से ही आर्थिक संकट में हैं। राज्य सरकार न तो किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य दे पा रही है, न ही ओलावृष्टि व वर्षा से फसल खराब होने पर उचित मुआवजा। ऐसे में मनरेगा के लिए राज्य सरकार 40 प्रतिशत धनराशि कहां से लाएगी, यह बड़ा सवाल है। यह बदलाव मनरेगा को कमजोर करने की एक सोची-समझी साजिश है।
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चिरंजीव राव ने कहा कि लॉकडाउन के कठिन समय में मनरेगा ही वह योजना थी जिसने गरीब परिवारों को रोजगार और दिहाड़ी देकर उनके घर का चूल्हा जलाए रखा। यह योजना कांग्रेस पार्टी की देन है, जिसे यूपीए सरकार के समय गरीब, मजदूर और किसान को ध्यान में रखकर लागू किया गया था।