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Rewari News: फैक्टरी एक्ट के उल्लंघन को लेकर कंपनी दोषी करार, कोर्ट ने लगाया 10 हजार का जुर्माना
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जिला न्यायालय रेवाड़ी
- फोटो : बहराइच-लखनऊ मार्ग पर सरयू नदी पर निर्मित पीपा पुल।
रेवाड़ी।
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी डॉ. रेणु सोलखे की अदालत ने फैक्टरी एक्ट 1948 के उल्लंघन के मामले में एमएस मेटलमैन फैबटेक एलएलपी कंपनी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यह मामला सहायक निदेशक औद्योगिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य (रेवाड़ी) की ओर से दर्ज किया गया था।
13 जनवरी को औद्योगिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य के सहायक निदेशक
ने कंपनी का निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण के दौरान फैक्टरी एक्ट 1948 की धारा 7ए के तहत सुरक्षा मानकों में कमी और अन्य उल्लंघन पाए गए। इसके बाद विभाग ने अदालत में शिकायत दर्ज कराई जिस पर संज्ञान लेते हुए 2 अप्रैल को कंपनी को समन जारी किया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से अधिकृत प्रतिनिधि संदीप कुमार अदालत में पेश हुए। उन्हें शिकायत और संबंधित दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराई गईं। सुनवाई के दौरान संदीप कुमार ने कंपनी की ओर से आरोप स्वीकार कर लिए और ट्रायल की मांग नहीं की।
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अदालत ने यह सुनिश्चित किया कि आरोपी ने दोष स्वीकार स्वेच्छा से किया है। अदालत ने कंपनी को दोषी करार देते हुए सुनवाई की।
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अदालत ने उल्लंघन को लेकर सख्त रुख अपनाया
13 अप्रैल को सजा के निर्धारण में अदालत ने मामले की परिस्थितियों, कंपनी के पूर्व रिकॉर्ड और इस तथ्य को ध्यान में रखा कि कंपनी ने सभी कमियों को सुधार लिया है और भविष्य में नियमों का पालन करने का आश्वासन दिया है। हालांकि, मामले को गंभीर दुर्घटना से जुड़ा मानते हुए अदालत ने सख्त रुख अपनाया।
दो उल्लंघनों के लिए 10 हजार का जुर्माना
अदालत ने कंपनी को दो उल्लंघनों के लिए 5 हजार-5 हजार रुपये का कुल 10 हजार का जुर्माना भरने का आदेश दिया। साथ ही जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में 30 दिन का साधारण कारावास भुगतने का प्रावधान भी रखा गया। कंपनी की ओर से जुर्माने की राशि अदालत में जमा कर दी गई।
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क्या है फैक्टरी एक्ट 1948 की धारा 7ए
अधिवक्ता कैलाश चंद ने बताया कि फैक्टरी एक्ट 1948 की धारा 7ए के तहत फैक्टरी मालिक की यह जिम्मेदारी तय की गई है कि वह कर्मचारियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण का पूरा ध्यान रखे। इसके अनुसार कार्यस्थल सुरक्षित होना चाहिए और मशीनों का सही रखरखाव किया जाना जरूरी है। कर्मचारियों को काम करने के सुरक्षित तरीके की जानकारी और प्रशिक्षण देना भी आवश्यक है। साथ ही हेलमेट, दस्ताने, मास्क जैसे सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराना अनिवार्य है। आग या अन्य आपात स्थिति से निपटने के लिए उचित इंतजाम भी होने चाहिए। यदि इन नियमों का पालन नहीं किया जाता है तो कानून के तहत जुर्माना या सजा का प्रावधान है।
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मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी डॉ. रेणु सोलखे की अदालत ने फैक्टरी एक्ट 1948 के उल्लंघन के मामले में एमएस मेटलमैन फैबटेक एलएलपी कंपनी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यह मामला सहायक निदेशक औद्योगिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य (रेवाड़ी) की ओर से दर्ज किया गया था।
13 जनवरी को औद्योगिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य के सहायक निदेशक
ने कंपनी का निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण के दौरान फैक्टरी एक्ट 1948 की धारा 7ए के तहत सुरक्षा मानकों में कमी और अन्य उल्लंघन पाए गए। इसके बाद विभाग ने अदालत में शिकायत दर्ज कराई जिस पर संज्ञान लेते हुए 2 अप्रैल को कंपनी को समन जारी किया गया।
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मामले की सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से अधिकृत प्रतिनिधि संदीप कुमार अदालत में पेश हुए। उन्हें शिकायत और संबंधित दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराई गईं। सुनवाई के दौरान संदीप कुमार ने कंपनी की ओर से आरोप स्वीकार कर लिए और ट्रायल की मांग नहीं की।
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अदालत ने यह सुनिश्चित किया कि आरोपी ने दोष स्वीकार स्वेच्छा से किया है। अदालत ने कंपनी को दोषी करार देते हुए सुनवाई की।
अदालत ने उल्लंघन को लेकर सख्त रुख अपनाया
13 अप्रैल को सजा के निर्धारण में अदालत ने मामले की परिस्थितियों, कंपनी के पूर्व रिकॉर्ड और इस तथ्य को ध्यान में रखा कि कंपनी ने सभी कमियों को सुधार लिया है और भविष्य में नियमों का पालन करने का आश्वासन दिया है। हालांकि, मामले को गंभीर दुर्घटना से जुड़ा मानते हुए अदालत ने सख्त रुख अपनाया।
दो उल्लंघनों के लिए 10 हजार का जुर्माना
अदालत ने कंपनी को दो उल्लंघनों के लिए 5 हजार-5 हजार रुपये का कुल 10 हजार का जुर्माना भरने का आदेश दिया। साथ ही जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में 30 दिन का साधारण कारावास भुगतने का प्रावधान भी रखा गया। कंपनी की ओर से जुर्माने की राशि अदालत में जमा कर दी गई।
क्या है फैक्टरी एक्ट 1948 की धारा 7ए
अधिवक्ता कैलाश चंद ने बताया कि फैक्टरी एक्ट 1948 की धारा 7ए के तहत फैक्टरी मालिक की यह जिम्मेदारी तय की गई है कि वह कर्मचारियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण का पूरा ध्यान रखे। इसके अनुसार कार्यस्थल सुरक्षित होना चाहिए और मशीनों का सही रखरखाव किया जाना जरूरी है। कर्मचारियों को काम करने के सुरक्षित तरीके की जानकारी और प्रशिक्षण देना भी आवश्यक है। साथ ही हेलमेट, दस्ताने, मास्क जैसे सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराना अनिवार्य है। आग या अन्य आपात स्थिति से निपटने के लिए उचित इंतजाम भी होने चाहिए। यदि इन नियमों का पालन नहीं किया जाता है तो कानून के तहत जुर्माना या सजा का प्रावधान है।