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Rewari News: स्कूल ड्रेस के नाम पर कमीशन का खेल, तय दुकानों से खरीदारी को अभिभावक मजबूर

Mon, 30 Mar 2026 01:28 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Mon, 30 Mar 2026 01:28 AM IST
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Commission game in the name of school uniform, parents forced to buy from designated shops
राजकुमार, अभिभावक
रेवाड़ी। नए शैक्षणिक सत्र के साथ निजी स्कूलों में अभिभावकों पर बढ़ता आर्थिक दबाव एक गंभीर मुद्दा बनता जा रहा है। एडमिशन फीस और महंगी स्टेशनरी के बाद अब स्कूल ड्रेस भी कमाई का बड़ा जरिया बन चुकी है।
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अभिभावकों का कहना है कि निजी स्कूल संचालक अधिक कमीशन के लालच में अभिभावकों को तय दुकानों से ही यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं जिससे उन्हें महंगे दाम चुकाने पड़ रहे हैं। स्कूलों की तरफ से एक या दो दुकानों को ही अधिकृत किया जाता है जहां से ड्रेस खरीदना अनिवार्य कर दिया जाता है।
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इन दुकानों पर ड्रेस की कीमत बाजार के मुकाबले काफी ज्यादा होती है लेकिन अभिभावकों के पास कोई विकल्प नहीं रहता। कई अभिभावकों ने बताया कि अगर वे बाहर से ड्रेस खरीदते हैं तो स्कूल प्रबंधन उसे मान्य नहीं करता। ऐसे में उन्हें मजबूरी में निर्धारित दुकान से ही महंगी ड्रेस खरीदनी पड़ती है।
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अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल संचालक उन्हीं दुकानों को प्राथमिकता देते हैं जहां से उन्हें अधिक कमीशन मिलता है। नियमों के अनुसार स्कूल किसी भी अभिभावक को एक दुकान से सामान खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकते लेकिन जमीनी स्तर पर इसका पालन नहीं हो रहा है।
अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि इस तरह की मनमानी पर रोक लगाई जाए और स्कूलों को निर्देश दिए जाएं कि वे ड्रेस के लिए किसी एक दुकान को अनिवार्य न करें ताकि अभिभावकों को राहत मिल सके।

बच्चों के भविष्य को देखते हुए अभिभावक मजबूरी में स्कूलों के नियम मानने को विवश हैं। निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें और निर्धारित दुकानों से वर्दी खरीदने के कारण आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा है। खुले बाजार में सस्ते विकल्प होने के बावजूद अभिभावकों को तय दुकानों से ही खरीदारी करनी पड़ती है।
- राजकुमार, अभिभावक
निजी स्कूल में रेट हर साल बढ़ते हैं इससे काफी दबाव अभिभावक महसूस करते हैं। इस पर अंकुश लगना चाहिए ताकि अभिभावकों को राहत मिल सके।
- मनोज कुमार, अभिभावक

स्कूलों में एडमिशन और स्टेशनरी के बाद अब ड्रेस भी कमाई का जरिया बन चुकी है। अभिभावकों पर तय दुकानों से ही यूनिफॉर्म खरीदने का दबाव बनाया जाता है जिससे मजबूरी में महंगे दामों पर ड्रेस लेनी पड़ती है। यह पूरी तरह गलत है और इस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
- मंजू वशिष्ट, अभिभावक

हर साल नए सत्र में स्कूल ड्रेस के नाम पर अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जाता है। खास दुकानों से ही खरीदारी की शर्त के कारण विकल्प नहीं मिलता और कीमतें भी अधिक होती हैं। प्रशासन को इस व्यवस्था पर रोक लगानी चाहिए ताकि अभिभावकों को राहत मिल सके।
- सुरेश कुमार, अभिभावक

निजी स्कूलों को इस तरह से रेट नहीं बढ़ाने चाहिए। ये नियमों के खिलाफ है। इस पर शिक्षा विभाग को कार्रवाई करनी चाहिए। ये हर वर्ष का खेल है जिसे रोका नहीं जा रहा है। अभिभावकों को एक ही दुकान से खरीद के लिए कहना गलत है।

- कैलाश चंद, एडवोकेट

निजी स्कूलों की तरफ से किसी विशेष दुकान से ड्रेस या अन्य सामग्री खरीदने के लिए अभिभावकों को बाध्य करना नियमों के खिलाफ है। यदि इस तरह की शिकायतें सामने आती हैं तो उनकी जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अभिभावकों को खुले बाजार से भी यूनिफॉर्म खरीदने की छूट दें ताकि उन पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े।

- बिजेंद्र हुड्डा, जिला शिक्षा अधिकारी रेवाड़ी

राजकुमार, अभिभावक

राजकुमार, अभिभावक

राजकुमार, अभिभावक

राजकुमार, अभिभावक

राजकुमार, अभिभावक

राजकुमार, अभिभावक

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