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नई शिक्षा नीति से परिवर्तन के दावे, एक भी कॉलेज सी ग्रेड से ऊपर नहीं
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रेवाड़ी। शिक्षा विभाग की ओर से नई शिक्षा नीति लागू कर आमूल-चूल बदलाव के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि जिले में ए ग्रेड होना तो दूूर सी ग्रेड से ऊपर एक भी कॉलेज नहीं है। लैब से लेकर साइंस फैकल्टी भी महज एकाध में हैं। ऐसे में किस तरह से संसाधनों के अभाव में युवा प्रतिस्पर्धा के दौर में दिल्ली व अन्य मेट्रो सिटी के विद्यार्थियों के सामने टिक पाएंगे, यह बड़ा सवाल है।
जिले में उच्च शिक्षा के नाम पर 11 सरकारी, 4 सरकारी सहायता प्राप्त व तीन सेल्फ फाइनेंस कॉलेज हैं। लेकिन 11 सरकारी कॉलेजों में से रेवाड़ी ब्वॉयज, बावल गर्ल्स व जाटूसाना सहित तीन कॉलेजों के पास अपनी छत तक नहीं है। बीते तीन साल से विद्यार्थी स्कूलों के भवनों में पढ़ाई के नाम पर खानापूर्ति कर रहे हैं। वहीं हालात ऐसे हैं कि एक भी कॉलेज में साइंस की फैकल्टी पूरी नहीं है। शहर के सेक्टर-18 स्थित राजकीय महाविद्यालय में 3500 से अधिक छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। लेकिन यहां पर सालों से फिजिक्स व जुलोजी पढ़ाने के लिए महज एक-एक शिक्षक हैं।
40 छात्रों पर एक प्रोफेसर जरूरी
1976 में स्थापित कंवाली कॉलेज अपनी उच्च क्वालिटी की शिक्षा के लिए जाना जाता है। यहां बीएससी नॉन मेडिकल के तीन बैच चल रहे हैं। हैं। यहां पर फिजिक्स में 02, मैथ में 03 एवं केमेस्ट्री में 04 प्रोफेसर तैनात हैं। जबकि प्रत्येक विषय पर कम से कम चार प्रोफेसर होना जरूरी है। शिक्षाविदों के अनुसार क्वालिटी एजुकेशन के लिए एक प्रोफेसर एक महीने में 30 पीरियड ले सकता है। कंवाली कॉलेज में फिजिक्स के लिए चार प्रोफेसर की पोस्ट प्रस्तावित है, लेकिन भर्ती लंबे समय नहीं हुए हैं। नियमानुसार 40 विद्यार्थियों पर एक प्रोफेसर होना जरूरी है।
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सेक्टर-18 में शिक्षक एक, जरूरत 12 की
रेवाड़ी महिला कॉलेज में मेडिकल-नॉन मेडिकल की कक्षाएं चल रही हैं। 480 बच्चों पर फिजिक्स के 01, केमेस्ट्री के 03, जुलोजी के 01 एवं मैथ के तीन शिक्षक तैनात हैं। जबकि यहां पर लोड के हिसाब से कम एक सब्जेक्ट के लिए 12 प्रोफेसर की नियुक्ति जरूरी है। महिला राजकीय कॉलेज पाली में बीएससी नॉन-मेडिकल के तीन बैच पर फिजिक्स-1, मैथ-3 एवं केमेस्ट्री-4 शिक्षकों की नियुक्ति ही हो पाई है।
खरखड़ा कॉलेज में फिजिक्स का एक भी अध्यापक नहीं
नाहड में केमेस्ट्री-1, मैथ-1 एवं फिजिक्स पर 1, बावल में बीएससी नॉन-मेडिकल की 240 सीट पर पढ़ने वाले विद्यार्थियों पर वर्षों से मैथ एवं केमेस्ट्री का एक भी शिक्षक नियुक्त नहीं है। जबकि फिजिक्स पढ़ाने के लिए एक ही प्रोफेसर से काम चलाया जा रहा है। राजकीय महिला कॉलेज गुरावडा फिजिक्स-0, केमेस्ट्री-0 एवं मैथ-01 शिक्षक है। राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित खरखड़ा कॉलेज में बीसएसी नॉन-मेडिकल की कक्षाएं चल रही हैं। यहां पर सालों से केमेस्ट्री-01, मैथ-02 एवं फिजिक्स का एर भी अध्यापक नहीं है।
जिले का एक भी कॉलेेज एक श्रेणी का नहीं
नेशनल एसेसमेंट एंड एक्रीएडेशन काउंसिल( एनएएसी) की ओर से जारी विश्वविद्यालय व कॉलेजों की रैंक की बात करें तो जिले का एक भी कॉलेज ए श्रेणी में नहीं है। अधिकतर कॉलेजों का जहां सर्टिफिकेशन ही आज तक नहीं हुआ, वहीं जिनको रैंक मिली वे सी श्रेणी में हैं। सी- श्रेणी वाले कॉलेजों में नाहड़, कंवाली व राजकीय कॉलेज बावल शामिल हैं। बाकी अन्य कॉलेजों की कोई रैंक ही नहीं है।
रिटायर्ड, कॉलेज प्रिंसिपल प्रो. आरएस यादव ने कहा कि जिम्मेदारों की ओर से वादे करना अलग बात है और जमीन पर व्यवस्थाओं को मजबूत करना अलग। बावल में महिला कॉलेज, रेवाड़ी व जाटूसाना के कॉलेजों के बच्चे स्कूलों में पढ़ रहे हैं। ऐसे में विद्यार्थियों के लिए भवन तक उपलब्ध नहीं होना गंभीर विषय है। यह बात सही है कि नई शिक्षा नीति से कुछ नहीं होगा। पहले कॉलेजों में शिक्षकों को पूूरा करना होगा, तभी जाकर कुछ बदलाव देखा जा सकता है।
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जिले में उच्च शिक्षा के नाम पर 11 सरकारी, 4 सरकारी सहायता प्राप्त व तीन सेल्फ फाइनेंस कॉलेज हैं। लेकिन 11 सरकारी कॉलेजों में से रेवाड़ी ब्वॉयज, बावल गर्ल्स व जाटूसाना सहित तीन कॉलेजों के पास अपनी छत तक नहीं है। बीते तीन साल से विद्यार्थी स्कूलों के भवनों में पढ़ाई के नाम पर खानापूर्ति कर रहे हैं। वहीं हालात ऐसे हैं कि एक भी कॉलेज में साइंस की फैकल्टी पूरी नहीं है। शहर के सेक्टर-18 स्थित राजकीय महाविद्यालय में 3500 से अधिक छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। लेकिन यहां पर सालों से फिजिक्स व जुलोजी पढ़ाने के लिए महज एक-एक शिक्षक हैं।
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40 छात्रों पर एक प्रोफेसर जरूरी
1976 में स्थापित कंवाली कॉलेज अपनी उच्च क्वालिटी की शिक्षा के लिए जाना जाता है। यहां बीएससी नॉन मेडिकल के तीन बैच चल रहे हैं। हैं। यहां पर फिजिक्स में 02, मैथ में 03 एवं केमेस्ट्री में 04 प्रोफेसर तैनात हैं। जबकि प्रत्येक विषय पर कम से कम चार प्रोफेसर होना जरूरी है। शिक्षाविदों के अनुसार क्वालिटी एजुकेशन के लिए एक प्रोफेसर एक महीने में 30 पीरियड ले सकता है। कंवाली कॉलेज में फिजिक्स के लिए चार प्रोफेसर की पोस्ट प्रस्तावित है, लेकिन भर्ती लंबे समय नहीं हुए हैं। नियमानुसार 40 विद्यार्थियों पर एक प्रोफेसर होना जरूरी है।
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सेक्टर-18 में शिक्षक एक, जरूरत 12 की
रेवाड़ी महिला कॉलेज में मेडिकल-नॉन मेडिकल की कक्षाएं चल रही हैं। 480 बच्चों पर फिजिक्स के 01, केमेस्ट्री के 03, जुलोजी के 01 एवं मैथ के तीन शिक्षक तैनात हैं। जबकि यहां पर लोड के हिसाब से कम एक सब्जेक्ट के लिए 12 प्रोफेसर की नियुक्ति जरूरी है। महिला राजकीय कॉलेज पाली में बीएससी नॉन-मेडिकल के तीन बैच पर फिजिक्स-1, मैथ-3 एवं केमेस्ट्री-4 शिक्षकों की नियुक्ति ही हो पाई है।
खरखड़ा कॉलेज में फिजिक्स का एक भी अध्यापक नहीं
नाहड में केमेस्ट्री-1, मैथ-1 एवं फिजिक्स पर 1, बावल में बीएससी नॉन-मेडिकल की 240 सीट पर पढ़ने वाले विद्यार्थियों पर वर्षों से मैथ एवं केमेस्ट्री का एक भी शिक्षक नियुक्त नहीं है। जबकि फिजिक्स पढ़ाने के लिए एक ही प्रोफेसर से काम चलाया जा रहा है। राजकीय महिला कॉलेज गुरावडा फिजिक्स-0, केमेस्ट्री-0 एवं मैथ-01 शिक्षक है। राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित खरखड़ा कॉलेज में बीसएसी नॉन-मेडिकल की कक्षाएं चल रही हैं। यहां पर सालों से केमेस्ट्री-01, मैथ-02 एवं फिजिक्स का एर भी अध्यापक नहीं है।
जिले का एक भी कॉलेेज एक श्रेणी का नहीं
नेशनल एसेसमेंट एंड एक्रीएडेशन काउंसिल( एनएएसी) की ओर से जारी विश्वविद्यालय व कॉलेजों की रैंक की बात करें तो जिले का एक भी कॉलेज ए श्रेणी में नहीं है। अधिकतर कॉलेजों का जहां सर्टिफिकेशन ही आज तक नहीं हुआ, वहीं जिनको रैंक मिली वे सी श्रेणी में हैं। सी- श्रेणी वाले कॉलेजों में नाहड़, कंवाली व राजकीय कॉलेज बावल शामिल हैं। बाकी अन्य कॉलेजों की कोई रैंक ही नहीं है।
रिटायर्ड, कॉलेज प्रिंसिपल प्रो. आरएस यादव ने कहा कि जिम्मेदारों की ओर से वादे करना अलग बात है और जमीन पर व्यवस्थाओं को मजबूत करना अलग। बावल में महिला कॉलेज, रेवाड़ी व जाटूसाना के कॉलेजों के बच्चे स्कूलों में पढ़ रहे हैं। ऐसे में विद्यार्थियों के लिए भवन तक उपलब्ध नहीं होना गंभीर विषय है। यह बात सही है कि नई शिक्षा नीति से कुछ नहीं होगा। पहले कॉलेजों में शिक्षकों को पूूरा करना होगा, तभी जाकर कुछ बदलाव देखा जा सकता है।