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शहर की सड़कों पर जाम, हर कोई परेशान
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जिले में सड़कों पर यातायात जाम के झाम से सब परेशान हैं। 24 घंटे जनता की सेवा में तैनात रहने वाली पुलिस भी इस समस्या से परेशान है। सरकारी व्यवस्था इस समस्या को कम करने की बजाए बढ़ा रही है। जिले के कस्बा कोसली में सड़कों पर यातायात जाम की स्थिति कभी कभार जरूर पैदा होती है मगर पुल के नीचे वाहनों के जाम से स्थानीय लोगों और वाहन चालकों को लगभग रोजाना दो चार होना पड़ता है। स्टेशन रोड पर भी वाहनों की कतार लगना आम बात है। उधर कस्बा धारूहेड़ा में यातायात जाम होना बड़ी समस्या है।
दिल्ली की ओर से गुरुग्राम के रास्ते जयपुर को जाने वाले भारी वाहनों को औद्योगिक क्षेत्र भिवाड़ी, औद्योगिक क्षेत्र धारूहेड़ा और औद्योगिक क्षेत्र बावल, नीमराना, शाहजहांपुर राजस्थान के लिए इसी मार्ग से होकर गुजरना पड़ता है। जिले में दिल्ली जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर गांव कापड़ीवास से जिले की सीमा शुरू हो जाती है और वहां से कस्बा धारूहेड़ा आते वक्त भारी और हल्के वाहन चालकों को देर शाम से ही यह समस्या झेलनी पड़ जाती है। इस मार्ग पर जगह - जगह पुलिस की पैट्रोलिंग पीसीआर, ईवीआर वाहन दिन और रात में दौड़ते रहते हैं। इसके बावजूद कस्बा धारूहेड़ा के बेसटैक मॉल से मालपुरा मोड़ के रास्ते भिवाड़ी जाने वाले और इस जगह से कस्बा धारूहेड़ा के रास्ते नंदरामपुर रोड की तरफ और राजस्थान की ओर जाने वाले वाहन चालकों को अक्सर यातायात जाम की समस्या को झेलना पड़ता है। इतना ही नहीं, कस्बा धारूहेड़ा के सोहना रोड से रास्ते शहीद भगत सिंह चौक और धारूहेड़ा थाने की ओर एनएच 48 सम्पर्क सड़क पर लगभग रोजाना यातायात जाम लगता है। भगत सिंह चौक से धारूहेड़ा बस अड्डे तक और इन दोनों जगहों पर यातायात जाम बड़ी समस्या है।
कस्बा धारूहेड़ा के फ्लाईओवर को बने हुए करीब तीन साल से अधिक समय बीत गया मगर इसके ऊपर आज तक रोड लाइटें नहीं लग पाई जबकि इस मार्ग पर खंभे खड़े साफ देखे जा सकते हैं। शाम ढलने के बाद बेसटैक मॉल से थाना धारूहेड़ा के पास तक एनएच 48 पर रोड लाइट की व्यवस्था तक नहीं है। इस फ्लाई ओवर के नीचे दोनों ओर अक्सर यातायात जाम रहता है। कस्बा धारूहेड़ा से आगे आईएमटी बावल की ओर जाते वक्त साहबी पुल तक यातायात जाम होना आम बात समझी जाती है। यह धारूहेड़ा बस अड्डे से करीब दो किलोमीटर की दूरी पर है।
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शहर के मुख्य मार्ग सरकुलर रोड का हाल
अब बात जिला मुख्यालय की करें तो यहां सबसे अधिक यातायात जाम सरकुलर रोड पर होता है। यहां जिला प्रशासन ने यातायात को सुचारु रखने के लिए कई प्रयोग करके देख लिए हैं मगर अभी तक कोई भी फार्मूला यहां कामयाब नहीं हो पाया। इस मार्ग पर धारूहेड़ा चुंगी, बस अड्डा, झज्जर चौक, रेलवे स्टेशन चौक, दिल्ली बाईपास, पटौदी रेलवे फाटक के पास यातायात जाम की समस्या अक्सर बनती रहती है। यातायात पुलिस की ओर से शहर में सीसीटीवी कैमरे और ट्रैफिक लाइटें चालू कराने की कई बार कोशिश की गई मगर यह काम नगर परिषद और पुलिस महकमे के बीच फंसा होने की वजह से सिरे नहीं चढ़ पाया। शहर की इस मुख्य सड़क पर सीवर के ढक्कन टूटे, बेतरतीब लगे हुए थे, इनको अब पुलिस की ओर से नगर परिषद अधिकारियों को शिकायत पत्र दिए जाने के बाद कुछ जगह ठीक कराया गया है मगर अभी पूरे सरकुलर रोड पर यह काम नहीं हो पाया है।
समस्या की जड़ कहां
इस समस्या की जड़ जिले के हर शहर में अलग - अलग कोने में दबी हुई है। रेवाड़ी शहर की सड़कों पर वाहनों का दबाव अधिक है, इस वजह से यहां यातायात जाम होता है। ट्रैफिक लाइटें और सीसीटीवी खराब हैं, इसलिए वाहन चालकों पर अंकुश नहीं लग पा रहा। यातायात पुलिस जवानों की संख्या कम है, जो शहर की यातायात व्यवस्था को संभालने के लिए नाकाफी है।
अब तक क्या प्रयास हुए
जिला प्रशासन की ओर से डीसी और एसपी पदस्तर के अधिकारियों ने मातहत अधिकारियों के साथ बैठकर दो बार यातायात जाम की समस्या का हल निकालने की रणनीति बनाई मगर अधिक कामयाबी नहीं मिली। शहर में एक बार वन-वे यातायात व्यवस्था लागू की। यह व्यवस्था पांच महीने से अधिक लागू रही। दूसरी बार शहर के सरकुलर रोड पर वाहनों को घड़ीनुमा चलाने की नई व्यवस्था लागू की गई मगर वाहनों की तेज रफ्तारी और सरकुलर रोड के अंदर वाले इलाके में रहने वाले दुकानदारों और खरीदारी करने आए लोगों को इससे परेशानी हुई। बाद में प्रशासन और पुलिस को यह व्यवस्था भी वापस लेनी पड़ी। दूसरी व्यवस्था शहर में 40 दिनों तक लागू रही। इसके बाद से कोई नया यातायात व्यवस्था प्रयोग प्रशासन या पुलिस ने नहीं किया।
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दिल्ली की ओर से गुरुग्राम के रास्ते जयपुर को जाने वाले भारी वाहनों को औद्योगिक क्षेत्र भिवाड़ी, औद्योगिक क्षेत्र धारूहेड़ा और औद्योगिक क्षेत्र बावल, नीमराना, शाहजहांपुर राजस्थान के लिए इसी मार्ग से होकर गुजरना पड़ता है। जिले में दिल्ली जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर गांव कापड़ीवास से जिले की सीमा शुरू हो जाती है और वहां से कस्बा धारूहेड़ा आते वक्त भारी और हल्के वाहन चालकों को देर शाम से ही यह समस्या झेलनी पड़ जाती है। इस मार्ग पर जगह - जगह पुलिस की पैट्रोलिंग पीसीआर, ईवीआर वाहन दिन और रात में दौड़ते रहते हैं। इसके बावजूद कस्बा धारूहेड़ा के बेसटैक मॉल से मालपुरा मोड़ के रास्ते भिवाड़ी जाने वाले और इस जगह से कस्बा धारूहेड़ा के रास्ते नंदरामपुर रोड की तरफ और राजस्थान की ओर जाने वाले वाहन चालकों को अक्सर यातायात जाम की समस्या को झेलना पड़ता है। इतना ही नहीं, कस्बा धारूहेड़ा के सोहना रोड से रास्ते शहीद भगत सिंह चौक और धारूहेड़ा थाने की ओर एनएच 48 सम्पर्क सड़क पर लगभग रोजाना यातायात जाम लगता है। भगत सिंह चौक से धारूहेड़ा बस अड्डे तक और इन दोनों जगहों पर यातायात जाम बड़ी समस्या है।
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कस्बा धारूहेड़ा के फ्लाईओवर को बने हुए करीब तीन साल से अधिक समय बीत गया मगर इसके ऊपर आज तक रोड लाइटें नहीं लग पाई जबकि इस मार्ग पर खंभे खड़े साफ देखे जा सकते हैं। शाम ढलने के बाद बेसटैक मॉल से थाना धारूहेड़ा के पास तक एनएच 48 पर रोड लाइट की व्यवस्था तक नहीं है। इस फ्लाई ओवर के नीचे दोनों ओर अक्सर यातायात जाम रहता है। कस्बा धारूहेड़ा से आगे आईएमटी बावल की ओर जाते वक्त साहबी पुल तक यातायात जाम होना आम बात समझी जाती है। यह धारूहेड़ा बस अड्डे से करीब दो किलोमीटर की दूरी पर है।
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शहर के मुख्य मार्ग सरकुलर रोड का हाल
अब बात जिला मुख्यालय की करें तो यहां सबसे अधिक यातायात जाम सरकुलर रोड पर होता है। यहां जिला प्रशासन ने यातायात को सुचारु रखने के लिए कई प्रयोग करके देख लिए हैं मगर अभी तक कोई भी फार्मूला यहां कामयाब नहीं हो पाया। इस मार्ग पर धारूहेड़ा चुंगी, बस अड्डा, झज्जर चौक, रेलवे स्टेशन चौक, दिल्ली बाईपास, पटौदी रेलवे फाटक के पास यातायात जाम की समस्या अक्सर बनती रहती है। यातायात पुलिस की ओर से शहर में सीसीटीवी कैमरे और ट्रैफिक लाइटें चालू कराने की कई बार कोशिश की गई मगर यह काम नगर परिषद और पुलिस महकमे के बीच फंसा होने की वजह से सिरे नहीं चढ़ पाया। शहर की इस मुख्य सड़क पर सीवर के ढक्कन टूटे, बेतरतीब लगे हुए थे, इनको अब पुलिस की ओर से नगर परिषद अधिकारियों को शिकायत पत्र दिए जाने के बाद कुछ जगह ठीक कराया गया है मगर अभी पूरे सरकुलर रोड पर यह काम नहीं हो पाया है।
समस्या की जड़ कहां
इस समस्या की जड़ जिले के हर शहर में अलग - अलग कोने में दबी हुई है। रेवाड़ी शहर की सड़कों पर वाहनों का दबाव अधिक है, इस वजह से यहां यातायात जाम होता है। ट्रैफिक लाइटें और सीसीटीवी खराब हैं, इसलिए वाहन चालकों पर अंकुश नहीं लग पा रहा। यातायात पुलिस जवानों की संख्या कम है, जो शहर की यातायात व्यवस्था को संभालने के लिए नाकाफी है।
अब तक क्या प्रयास हुए
जिला प्रशासन की ओर से डीसी और एसपी पदस्तर के अधिकारियों ने मातहत अधिकारियों के साथ बैठकर दो बार यातायात जाम की समस्या का हल निकालने की रणनीति बनाई मगर अधिक कामयाबी नहीं मिली। शहर में एक बार वन-वे यातायात व्यवस्था लागू की। यह व्यवस्था पांच महीने से अधिक लागू रही। दूसरी बार शहर के सरकुलर रोड पर वाहनों को घड़ीनुमा चलाने की नई व्यवस्था लागू की गई मगर वाहनों की तेज रफ्तारी और सरकुलर रोड के अंदर वाले इलाके में रहने वाले दुकानदारों और खरीदारी करने आए लोगों को इससे परेशानी हुई। बाद में प्रशासन और पुलिस को यह व्यवस्था भी वापस लेनी पड़ी। दूसरी व्यवस्था शहर में 40 दिनों तक लागू रही। इसके बाद से कोई नया यातायात व्यवस्था प्रयोग प्रशासन या पुलिस ने नहीं किया।