फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rewari News ›   Chemical colors can discolor the face

Rewari News: चेहरे को बदरंग कर सकते है रासायनिक रंग

Mon, 18 Mar 2024 01:33 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Mon, 18 Mar 2024 01:33 AM IST
विज्ञापन
Chemical colors can discolor the face
रेवाड़ी। शहर में एक दुकान के बाहर रखे कैमिकल युक्त रंग। संवाद
रेवाड़ी। रंगों का त्योहार होली में अब एक सप्ताह शेष रह गया है। 25 मार्च को होली मनाई जाएगी। त्योहार में स्वास्थ्य का भी ख्याल रखना जरूरी है। त्योहार में सावधानी नहीं बरतने पर रासायनिक रंग चेहरे को बदरंग कर सकते हैं। इन दिनों बाजारों में केमिकलयुक्त रंगों की कोई कमी नहीं है, जो स्वास्थ्य पर विपरीत असर डालते हैं। इस रंग से चेहरा व त्वचा जहां खराब होती है, वहीं आंख को भी यह नुकसान पहुंचाता है।
विज्ञापन

प्रशासन की ओर से अभी तक न तो कोई खुले में बेच रहे लोगों पर कार्रवाई की गई है और न ही बेचने को लेकर एडवाइजरी जारी की गई है। ऐसे में चिकित्सक ऐसे रंगों से बचने की सलाह दे रहे हैं। इस त्योहार में जमकर अबीर-गुलाल उड़ाकर लोग एक-दूसरे को गले लगाते हैं। इस दौरान खेले जाने वाले रंग शरीर को भी नुकसान पहुंचाते हैं। इस वर्ष 25 मार्च को होली मनाई जाएगी। इस त्योहार में लोग कपड़े पर रंग डालने के साथ ही चेहरे पर भी लगा देते हैं, जो त्वचा के लिए काफी नुकसानदायक है। ऐसे में जरूरी हो गया है कि इन रासायनिक रंगों को त्याग कर पूरी तरह इको फ्रेंडली होली मनाएं।
विज्ञापन

जानकार बताते हैं कि हरा रंग काॅपर सल्फेट से, परपल क्रोमियम आयोडाइड से, सिल्वर एलुमीनियम ब्रोमाइड से और काला रंग लेड आक्साइड को मिलाकर तैयार किया जाता है। चमकदार बनाने के लिए अक्सर रंग में कांच का बुरादा भी मिलाया जाता है। हरे रंग में मौजूद काॅपर सल्फेट अगर आंखों में चला जाए तो यह एलर्जी और अस्थायी अंधेपन का कारण बन सकता है। काले रंग में मौजूद लेड ऑक्साइड किडनी खराब होने का कारण बन सकता है। बाजार में बिकने वाले बैंगनी रंग में क्रोमियम आयोडाइड होता है जो अस्थमा और एलर्जी पैदा कर सकता है। लाल रंग में इस्तेमाल होने वाला मर्करी सल्फाइट त्वचा के लिए हानिकारक हो सकता है। इसलिए केमिकलयुक्त रंगों से बचना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

इंसेट


हर्बल रंगों का इस्तेमाल करने की सलाह

चर्म रोग विशेषज्ञों ने लोगों से होली खेलने से पहले रंगों के चुनाव में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। रासायनिक रंगों का प्रयोग करने से बचने की सलाह दी है। हर्बल, फूलों की पत्तियों से बनाए रंगों का प्रयोग करने से चर्म रोग से बच सकेंगे। रंगों का चुनाव करते वक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। दानेदार रंग त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं, इसलिए ऐसे रंगों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।



रासायनिक रंगों के इस्तेमाल से शरीर पर लाल दाने निकल सकते हैं। शरीर में खुजली या जलन हो सकती हैं। थोड़ी सी लापरवाही से एलर्जी और त्वचा पर दाग बनने लगेंगे। होली खेलने से पहले शरीर में सरसों का तेल या कोई लोशन लगाना चाहिए। हर्बल रंगों का ही इस्तेमला करना चाहिए। किसी भी प्रकार के पानी में घोलने वाले रंगों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। कई बार ग्रीस, मिट्टी आदि से होली खेलने पर आखों को नुकसान हो सकता है तो त्वचा काली पड़ने के साथ इसे हटाते वक्त जख्म बन सकते हैं। ऐसे में जितना हो सके चंदन लगाकर सौहार्द बनाया जा सकता है।- डाॅ. अनू जैन, चर्म रोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल रेवाड़ी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed