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री-टेंडरिंग में फंसकर रह गया सांड़, कुत्तों और बंदरों का पकड़ने का अभियान
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सरकुलर रोड के किनारे बैठे गोवंश।
- फोटो : Rewari
रेवाड़ी। शहरवासी बीते एक साल से सड़कों पर बेसहारा पशुओं, कुत्तों और सेक्टरों में बंदरों से परेशान हैं। उन्हें यह परेशानी नगर परिषद के अधिकारियों की विफलता के चलते झेलनी पड़ रही है। पशुओं को पकड़ने का अभियान शुरू करना तो दूर जिम्मेदार टेंडर तक नहीं कर पाए हैं। बार-बार री-टेंडर करने की बात कही जा रही है। इसके चलते शहर की सड़कों पर लोगों का निकलना तक मुश्किल हो गया है।
नगर परिषद अधिकारियों की ओर से तीन माह पहले गोवंशों को पकड़ने के लिए टेंडर देने की बात कही गई थी। लेकिन एक बार फिर से उसमें तकनीकी समस्या बताकर दोबारा टेंडर देकर पशुओं को पकड़ने का दावा किया जा रहा है। जबकि अगस्त 2020 में बेसहारा पशुओं के चलते तीन लोगों की मौत हो चुकी है। शहरवासियों ने इसके लिए प्रदर्शन तक किया, लेकिन परिणाम कुछ नहीं निकला। अब शहर के बस स्टैंड, नाईवाली चौक, बावल चौक, आंबेडकर चौक, धारूहेड़ा चुंगी व बीएमजी मॉल के सामने बेसहारा पशुओं के झुंड सड़कों पर खड़े देखे जा सकते हैं। इनकी चपेट में आकर लोग आए दिन घायल भी हो रहे हैं।
गलियों में आवारा कुत्तों का शिकार हो रहे शहरवासी
नागरिक अस्पताल के फार्मासिस्ट उदय सिंह ने बताया कि यहां प्रत्येक दिन औसतन 20-25 कुत्ते काटने के पीड़ित आते हैं। अन्य सीएचसी व पीएचसी के नंबर जोड़ दिए जाएं तो यह आंकड़ा और बढ़ जाएगा। पालतू कुत्ते से काटने पर तीन व आवारा कुत्ते के काटने पर वैक्सीन की पांच डोज लगाई जाती है। नागरिक अस्पताल में पर्याप्त डोज हैं। वहीं दूसरी ओर कुत्तों की नसबंदी करना तो दूर नगर परिषद के पास कुत्तों का आंकड़ा तक नहीं है। शहर की गलियों में शाम के समय कुत्तों के झुंड बन जाते हैं और लोगों का निकलना तक मुश्किल हो जाता है।
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एक साल पहले पशु पकड़ने पर 20 लाख खर्च
एक साल पहले नगर परिषद की ओर से जयपुर की एक कंपनी को बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए ठेका दिया गया था। एक पशु को पकड़ने के लिए 800 रुपये निर्धारित किए गए थे। लेकिन पशु पकड़ने के बाद कहां छोड़े गए इसका कोई आंकड़ा नहीं है। ऐसे में शहर में पशुओं की संख्या कम होने की बजाय लगातार बढ़ती जा रही है। बताया जाता है कि पशुओं को पकड़ने वाली एजेंसी गोशालाओं की बजाय उन्हें शहर से बाहर छोड़ देती है। पशु दोबारा शहर में आ जाते हैं। नप की ओर से बीते साल पशुओं को पकड़ने के नाम पर 20 लाख रुपये ठेकेदार को दिए गए, लेकिन परिणाम शून्य ही रहा।
नगर परिषद रेवाड़ी के ईओ अभय सिंह यादव ने बताया कि शहर की सड़कों से बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए दोबारा टेंडर लगाया गया है। इसके अलावा बंदर व कुत्तों की नसबंदी करने का टेंडर भी लगाया गया है। सितंबर के पहले सप्ताह में सभी टेंडर खुल जाएंगे। इसके बाद ऐसे पशुओं का पकड़ने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
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नगर परिषद अधिकारियों की ओर से तीन माह पहले गोवंशों को पकड़ने के लिए टेंडर देने की बात कही गई थी। लेकिन एक बार फिर से उसमें तकनीकी समस्या बताकर दोबारा टेंडर देकर पशुओं को पकड़ने का दावा किया जा रहा है। जबकि अगस्त 2020 में बेसहारा पशुओं के चलते तीन लोगों की मौत हो चुकी है। शहरवासियों ने इसके लिए प्रदर्शन तक किया, लेकिन परिणाम कुछ नहीं निकला। अब शहर के बस स्टैंड, नाईवाली चौक, बावल चौक, आंबेडकर चौक, धारूहेड़ा चुंगी व बीएमजी मॉल के सामने बेसहारा पशुओं के झुंड सड़कों पर खड़े देखे जा सकते हैं। इनकी चपेट में आकर लोग आए दिन घायल भी हो रहे हैं।
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गलियों में आवारा कुत्तों का शिकार हो रहे शहरवासी
नागरिक अस्पताल के फार्मासिस्ट उदय सिंह ने बताया कि यहां प्रत्येक दिन औसतन 20-25 कुत्ते काटने के पीड़ित आते हैं। अन्य सीएचसी व पीएचसी के नंबर जोड़ दिए जाएं तो यह आंकड़ा और बढ़ जाएगा। पालतू कुत्ते से काटने पर तीन व आवारा कुत्ते के काटने पर वैक्सीन की पांच डोज लगाई जाती है। नागरिक अस्पताल में पर्याप्त डोज हैं। वहीं दूसरी ओर कुत्तों की नसबंदी करना तो दूर नगर परिषद के पास कुत्तों का आंकड़ा तक नहीं है। शहर की गलियों में शाम के समय कुत्तों के झुंड बन जाते हैं और लोगों का निकलना तक मुश्किल हो जाता है।
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एक साल पहले पशु पकड़ने पर 20 लाख खर्च
एक साल पहले नगर परिषद की ओर से जयपुर की एक कंपनी को बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए ठेका दिया गया था। एक पशु को पकड़ने के लिए 800 रुपये निर्धारित किए गए थे। लेकिन पशु पकड़ने के बाद कहां छोड़े गए इसका कोई आंकड़ा नहीं है। ऐसे में शहर में पशुओं की संख्या कम होने की बजाय लगातार बढ़ती जा रही है। बताया जाता है कि पशुओं को पकड़ने वाली एजेंसी गोशालाओं की बजाय उन्हें शहर से बाहर छोड़ देती है। पशु दोबारा शहर में आ जाते हैं। नप की ओर से बीते साल पशुओं को पकड़ने के नाम पर 20 लाख रुपये ठेकेदार को दिए गए, लेकिन परिणाम शून्य ही रहा।
नगर परिषद रेवाड़ी के ईओ अभय सिंह यादव ने बताया कि शहर की सड़कों से बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए दोबारा टेंडर लगाया गया है। इसके अलावा बंदर व कुत्तों की नसबंदी करने का टेंडर भी लगाया गया है। सितंबर के पहले सप्ताह में सभी टेंडर खुल जाएंगे। इसके बाद ऐसे पशुओं का पकड़ने का काम शुरू कर दिया जाएगा।