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अभियान: निजी स्कूलों में किताबों के साथ नहीं दिए जाते डायरी और आई कार्ड

Mon, 07 Apr 2025 11:55 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 07 Apr 2025 11:55 PM IST
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Campaign: Diary and ID card are not given along with books in private schools
अमित। संवाद
रेवाड़ी। नया शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही कापी, किताब, स्टेशनरी, यूनिफार्म की दुकानों की रौनक लौट आई है। सत्र शुरू होते ही बच्चों के बैग का बोझ अभिभावकों के कंधे पर आ गया है। जिले के अधिकतर निजी विद्यालयों में मौजूदा सत्र में शुल्क में 9 से 10 प्रतिशत तक की वृद्धि की है। इसके अलावा यूनिफार्म व किताबों के दाम भी बड़े हैं। इसके साथ ही विद्यार्थियों को आईकार्ड व डायरी का अतिरिक्त शुल्क लिया जा रहा है। विद्यालयों में विद्यार्थियों को पूरे वर्ष का शुल्क देने के बाद भी उनको आई कार्ड व डायरी मुफ्त में नहीं दिए जाते हैं, उनका अतिरिक्त शुल्क लिया जा रहा है। 50 रुपये का आईकार्ड 150-200 रुपये में और डायरी 200 रुपये में बिक रही है। इसके साथ ही साल दर साल निजी विद्यालयों के खर्चों जैसे दाखिले, मासिक शुल्क, ट्रांसपोर्ट शुल्क, यूनिफार्म व स्कूल की एक्टिविटी के नाम पर बेहताशा खर्चों के चलते अभिभावक आर्थिक रूप से परेशान होते जा रहे है तो वहीं बड़ी संख्या में संचालकों ने विद्यालयों के अंदर ही दुकानें बनाई हुई है। जहां से मजबूरी में अभिभावकों को पढ़ाई के लिए जरूरी व अनावश्यक भी सामान खरीदना पड़ता है।
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आईडी कार्ड व डायरी का वसूला जा रहा है शुल्क :
अभिभावकों का कहना है कि निजी विद्यालयों में विद्यार्थियों को दाखिला लेने पर आई कार्ड डायरी जैसे वस्तुओं को बिना किसी शुल्क के देना चाहिए, लेकिन निजी विद्यालय दाखिला लेने के बाद किताबें, ड्रेस, बिल्डिंग फीस तो लेते ही हैं इसके साथ आईडी कार्ड व डायरी के नाम पर भी अभिभावकों से शुल्क वसूलते हैं। शिक्षा विभाग को चाहिए कि इस पर सख्त से सख्त कदम उठाए, ताकि अभिभावकों के ऊपर अधिक बोझ न बन सकें।
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मजबूरी में अभिभावक कर रहे हैं भुगतान :
दाखिले शुरू होने के साथ ही निजी विद्यालयों में बच्चों की पुस्तकें देने के साथ ही उनसे आईकार्ड और डायरी के अतिरिक्त शुल्क लिए जाते हैं। मजबूरी में अभिभावकों को उसका भी भुगतान करना पड़ रहा है।
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अमित
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फीस के नाम पर वसूला जा रहा अतिरिक्त शुल्क :
पिछले साल की अपेक्षा इस बार महंगाई की रफ्तार डेढ़ गुणा बढ़ी है, जबकि छोटे बच्चों की पुस्तकों व दूसरे खर्चों में तीन गुणा तक बढ़ोतरी हो चुकी है। इसके साथ ही निजी विद्यालयों में साल दर साल फीस के नाम पर अतिरिक्त शुल्क वसूला जा रहा है। मजबूरी में अभिभावकों को यह शुल्क देना पड़ रहा है।
सतीश

अमित। संवाद

अमित। संवाद

अमित। संवाद

अमित। संवाद

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