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उपचुनाव रद्द, कंवर सिंह ही रहेंगे धारूहेड़ा नगर पालिका के प्रधान
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ैप्शन नंबर-22 रेवाड़ी। धारूहेड़ा स्थित नपा कार्यालय। फाइल फोटो
- फोटो : Rewari
रेवाड़ी। उच्च न्यायालय ने धारूहेड़ा नगर पालिका के प्रधान पद के लिए होने वाले उपचुनाव को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने निर्वाचन आयोग के उस आदेश को रद कर दिया है, जिसमें कंवर सिंह को प्रधान पद के लिए अयोग्य करार देते हुए पदमुक्त कर दिया गया था।
उच्च न्यायालय ने कंवर सिंह द्वारा लगाई गई याचिका को मंजूर कर लिया। इसके साथ ही अपने आदेश में यह स्पष्ट किया है कि 13 सितंबर को उसके द्वारा निर्वाचन आयोग के आदेश को रद्द करने का कारण भी स्पष्ट किया जाएगा। आयोग ने अपने आदेश में बताया है कि 13 सितंबर को विस्तार से भी यह जानकारी दे दी जाएगी कि आखिरकार आयोग का निर्णय निरस्त क्यों किया गया। आयोग का निर्णय निरस्त होने से अब कंवर सिंह नगर पालिका धारूहेड़ा के प्रधान बन गए हैं।
फर्जी मार्कशीट के चलते ठहराया था अयोग्य :
धारूहेड़ा नगर पालिका के चुनाव 27 दिसंबर 2020 को हुए थे। इनमें कंवर सिंह ने जीत दर्ज की थी। चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे संदीप बोहरा ने कंवर सिंह की दसवीं कक्षा की मार्कशीट को फर्जी बताते हुए निर्वाचन आयोग को शिकायत दी थी। बोहरा ने आरोप लगाया था कि कंवर सिंह की दसवीं कक्षा की मार्कशीट में उनकी जन्मतिथि 15 जून, 1964 दिखाई गई। वहीं सरकारी स्कूल के रिकॉर्ड में उनकी जन्मतिथि 8 अक्टूबर 1957 है। कंवर सिंह की मार्कशीट सेंट्रल बोर्ड आफ हायर एजुकेशन की है, जबकि बोहरा का आरोप था कि ऐसा कोई बोर्ड ही नहीं है। आयोग ने शिकायत मिलने के बाद उपायुक्त को मार्कशीट की जांच के आदेश जारी किए थे। उपायुक्त ने एसडीएम कुशल कटारिया को जांच अधिकारी नियुक्त किया था। जांच रिपोर्ट में एसडीएम ने बताया था कि जिस बोर्ड की मार्कशीट कंवर सिंह ने लगाई है वह हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड द्वारा संचालित किसी भी परीक्षा के समकक्ष मान्यता प्राप्त नहीं है। निर्वाचन आयोग ने भी एसडीएम की जांच रिपोर्ट पर मुहर लगाते हुए माना था कि कंवर सिंह की मार्कशीट गैर मान्यता प्राप्त बोर्ड से है।
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उच्च न्यायालय ने निरस्त किया निर्वाचन आयोग का निर्णय :
निर्वाचन आयोग के निर्णय के खिलाफ कंवर सिंह ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को निर्वाचन आयोग द्वारा 15 मार्च को कंवर सिंह को अयोग्य ठहराने का जो निर्णय दिया था, उसे निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने अपने आदेश में बताया है कि 13 सितंबर को विस्तार से भी यह जानकारी दे दी जाएगी कि आखिरकार आयोग का निर्णय निरस्त क्यों किया गया। आयोग का निर्णय निरस्त होने पर कंवर सिंह स्वत: ही नगर पालिका धारूहेड़ा के प्रधान बन गए हैं।
उपचुनाव को किया गया रद:
कंवर सिंह को हटाए जाने के बाद निर्वाचन आयोग की ओर से प्रधान पद के लिए दोबारा उपचुनाव कराने का शेड्यूल जारी किया गया था। 12 सितंबर को प्रधान पद के उपचुनाव होने थे, लेकिन निर्वाचन आयोग ने उच्च न्यायालय का निर्णय आने के बाद उपचुनाव को रद करने के आदेश जारी कर दिए हैं।
राज्य चुनाव आयुक्त धनपत सिंह ने बताया कि पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेश के बाद हमने धारूहेड़ा में होने जा रहे प्रधान पद के उपचुनाव को रद्द करने के आदेश जारी कर दिए हैं। कंवर सिंह के प्रधान पद पर बने रहने या न रहने के बारे में अंतिम निर्णय उच्च न्यायालय का विस्तृत फैसला आने के बाद लिया जाएगा।
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उच्च न्यायालय ने कंवर सिंह द्वारा लगाई गई याचिका को मंजूर कर लिया। इसके साथ ही अपने आदेश में यह स्पष्ट किया है कि 13 सितंबर को उसके द्वारा निर्वाचन आयोग के आदेश को रद्द करने का कारण भी स्पष्ट किया जाएगा। आयोग ने अपने आदेश में बताया है कि 13 सितंबर को विस्तार से भी यह जानकारी दे दी जाएगी कि आखिरकार आयोग का निर्णय निरस्त क्यों किया गया। आयोग का निर्णय निरस्त होने से अब कंवर सिंह नगर पालिका धारूहेड़ा के प्रधान बन गए हैं।
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फर्जी मार्कशीट के चलते ठहराया था अयोग्य :
धारूहेड़ा नगर पालिका के चुनाव 27 दिसंबर 2020 को हुए थे। इनमें कंवर सिंह ने जीत दर्ज की थी। चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे संदीप बोहरा ने कंवर सिंह की दसवीं कक्षा की मार्कशीट को फर्जी बताते हुए निर्वाचन आयोग को शिकायत दी थी। बोहरा ने आरोप लगाया था कि कंवर सिंह की दसवीं कक्षा की मार्कशीट में उनकी जन्मतिथि 15 जून, 1964 दिखाई गई। वहीं सरकारी स्कूल के रिकॉर्ड में उनकी जन्मतिथि 8 अक्टूबर 1957 है। कंवर सिंह की मार्कशीट सेंट्रल बोर्ड आफ हायर एजुकेशन की है, जबकि बोहरा का आरोप था कि ऐसा कोई बोर्ड ही नहीं है। आयोग ने शिकायत मिलने के बाद उपायुक्त को मार्कशीट की जांच के आदेश जारी किए थे। उपायुक्त ने एसडीएम कुशल कटारिया को जांच अधिकारी नियुक्त किया था। जांच रिपोर्ट में एसडीएम ने बताया था कि जिस बोर्ड की मार्कशीट कंवर सिंह ने लगाई है वह हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड द्वारा संचालित किसी भी परीक्षा के समकक्ष मान्यता प्राप्त नहीं है। निर्वाचन आयोग ने भी एसडीएम की जांच रिपोर्ट पर मुहर लगाते हुए माना था कि कंवर सिंह की मार्कशीट गैर मान्यता प्राप्त बोर्ड से है।
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उच्च न्यायालय ने निरस्त किया निर्वाचन आयोग का निर्णय :
निर्वाचन आयोग के निर्णय के खिलाफ कंवर सिंह ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को निर्वाचन आयोग द्वारा 15 मार्च को कंवर सिंह को अयोग्य ठहराने का जो निर्णय दिया था, उसे निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने अपने आदेश में बताया है कि 13 सितंबर को विस्तार से भी यह जानकारी दे दी जाएगी कि आखिरकार आयोग का निर्णय निरस्त क्यों किया गया। आयोग का निर्णय निरस्त होने पर कंवर सिंह स्वत: ही नगर पालिका धारूहेड़ा के प्रधान बन गए हैं।
उपचुनाव को किया गया रद:
कंवर सिंह को हटाए जाने के बाद निर्वाचन आयोग की ओर से प्रधान पद के लिए दोबारा उपचुनाव कराने का शेड्यूल जारी किया गया था। 12 सितंबर को प्रधान पद के उपचुनाव होने थे, लेकिन निर्वाचन आयोग ने उच्च न्यायालय का निर्णय आने के बाद उपचुनाव को रद करने के आदेश जारी कर दिए हैं।
राज्य चुनाव आयुक्त धनपत सिंह ने बताया कि पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेश के बाद हमने धारूहेड़ा में होने जा रहे प्रधान पद के उपचुनाव को रद्द करने के आदेश जारी कर दिए हैं। कंवर सिंह के प्रधान पद पर बने रहने या न रहने के बारे में अंतिम निर्णय उच्च न्यायालय का विस्तृत फैसला आने के बाद लिया जाएगा।