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राजस्थान सीमावर्ती इलाकों में चली रोडवेज बस
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bus
- फोटो : Rewari
बावल क्षेत्र के राजस्थान की सीमा से लगते करीब 20 गांवों को जोड़ने वाले प्राणपुरा व झाबुआ रोड पर रोडवेज बसों के अभाव में प्राइवेट वाहनों में लटकर पर यात्रा करने वाली बेटियों व ग्रामीणों के लिए बुधवार को खुशी का दिन रहा। स्कूल आने-जाने के लिए बेटियों ने रोडवेज की बस में सफर करते समय अमर उजाला समाचार पत्र के अभियान की सराहना करते हुए कहा कि थैंक्यू अमर उजाला।
उल्लेखनीय है कि बावल क्षेत्र के प्राणपुरा, पावटी, किशनुपरा, रानौली, टीकला, शाहपुर, नांगलतेजू,झाबुआ,बिदावास, नंगली परसापुर, दुल्हेड़ा कलां, दुल्हेड़ा खूर्द व पनवाड़ सहित करीब 20 गांवों में लंबे समय से रोडवेज की बसें नहीं चलाए जाने के कारण उच्च शिक्षा के लिए बावल व रेवाड़ी जाने वाली बेटियों व गामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे में उन्हें प्राइवेट वाहनों में लटक कर यात्रा करने को मजबूर होना पड़ता था। रोडवेज की बसों के संचालन के लिए कई बार अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंप चुके थे, लेकिन हर बार झूठा आश्वासन दिया जाता था। बेटियों की समस्या को सिरे चढ़ाने के लिए अमर उजाला द्वारा पिछले एक सप्ताह तक अभियान चलाया गया था। इस दौरान विद्यार्थियों, ग्रामीणों व विभिन्न संगठनों के लोगों द्वारा अधिकारियों को ज्ञापन दिलाने के साथ ही प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किए।
लगातार समाचार प्रकाशित किए जाने के बाद रोडवेज के अधिकारियों की कुंभकर्णी नींद टूटी। अधिकारियों ने दोनों मार्गों पर सर्वे कराकर रूट मैप तैयार कराने के बाद दोनों मार्गों छात्राओं व ग्रामीणों के लिए बस सुविधा शुरू की गई।
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लंबे समय से बावल कॉलेज आने के लिए रोडवेज की बसें नहीं चलाई जा रही थी, जिससे उन्हें प्राइवेट वाहनों में लटक कर आना पड़ता था। आज रोडवेज की बसों के संचालन से बहुत खुशी हो रही है। अमर उजाला के प्रयासों से यह संभव हो पाया है।
-पल्लवी, छात्रा
--
रोडवेज की बस चलने से बहुत खुशी का अनुभव हो रहा है। अब उन्हें जान जोखिम में डालकर प्राइवेट वाहनों में यात्रा नहीं में यात्रा नहीं करनी पड़ेगी।
-सुषमा
--
प्राइवेट वाहनों में यात्रा करने से न केवल अधिक किराया देना पड़ता था बल्कि समय पर कालेज भी नहीं पहुंच पाते थे। लेकनि अमर उजाला के प्रयासों से रोडवेज की बसों के संचालन से अब उन्हें परेशान नहीं होना पड़ेगा।
-सुनीता
--
मैं सबसे पहले अमर उजाला समाचार पत्र का धन्यवाद करना चाहूूंगी। उन्हें के प्रयासों से बसों का संचालन संभव हो पाया है। अब उन्हें प्राइवेट वाहनों में यात्रा नहीं करनी पड़ेगी।
-पूजा
--
गांव राजस्थान सीमा से सटा हुआ है। ऐसे में रोडवेज की बसों के अभाव में प्राइवेट बसों में यात्रा करने को मजबूर होना पड़ता था। कई बार परिजनों के साथ अधिकारियों से मिलकर रोडवेज की बसें चलवाने की मांग की, लेकिन कुछ नहीं हुआ। अमर उजाला के प्रयासों से बस चलने लगी हैं। बहुत खुश हूं।
-एकता
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लंबे समय बाद उनके मार्ग पर रोडवेज की बस चलने से काफी खुशी का अनुभव हो रहा है। अब उन्हें न तो अधिक किराया देना पड़ेगा और न ही प्राइवेट वाहनों में यात्रा करनी पड़ेगी।
-पूजा
--
प्राइवेट वाहनों के आवागमन का कोई निर्धारित समय नहीं होने के कारण कई बार स्कूल भी समय पर नहीं पहुंच पाती थी, लेकिन आज रोडवेज की बस चलने से काफी खुशी हो रही है।
-पुष्पा
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उनका गांव बावल से करीब 20 किलोमीटर दूर है। रोडवेज की बसों के अभाव में प्राइवेट वाहनों में यात्रा करनी पड़ती थी। सबसे ज्यादा समस्या बेटियों को होती थी। समय पर कालेज या स्कूल नहीं पहुंच पाती थी। ऐसे में अमर उजाला के अभियान से उम्मीद बंधी। आज रोडवेज की बसों के संचालन से बेहद खुशी है।
-जीतराम लोर, ग्रामीण झाबुआ
--
कई बार बेटियों की शिकायत रहती थी कि बसें समय पर नहीं चलती, जिससे कालेज पहुंचने में देर हो गई। उन्होंने भी कई बार ग्रामीणों के साथ-साथ रोडवेज की बस चलाने की मांग की है। लेकिन अमर उजाला के प्रयास से यह संभस्त्रत्त्व हो पाया बेहद खुशी की बात है।
-अशोक यादव, प्राचार्य राजकीय कन्या कालेज बावल
--
रोडवेज की बसों के अभाव में बेटियों को प्राइवेट वाहनों में गांव से कालेज आना पड़ता था। बेटियां स्वयं को असुरक्षित महसूस करती थी। आज से रोडवेज की बसों के संचालन से बेटियों के साथ-साथ कालेज प्रशासन को भी बहुत खुशी है।
-दलीप कुमार, सहायक प्रोफेसर राजकीय कन्या कालेज बावल
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बाक्स
फरवरी में बेटियों के लिए जिला की सड़कों पर दौड़ेंगी गुलाबी रंग की 10 मिनी बसें
अमर उजाला ब्यूूरो
रेवाड़ी।
बसों में बेटियों के साथ होने वाली छेड़छाड़ की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए रोडवेज की ओर से फरवरी माह में बेटियों के 10 मिनी बसों का संचालन किया जाएगा। स्थानीय रूटों पर चलने वाली इन बसों में केवल महिलाएं ही सफर कर सकेंगी। हालांकि रोडवेज की ओर से जिला के लिए करीब 150 बसों की डिमांड भेजी गई थी, लेकिन फिलहाल 10 बसों की ही स्वीकृति मिली है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बसों में छात्राओं व महिलाओं के साथ होने वाले दुव्यवहार की घटनाओं पर अंकुश लगाने व महिलाओं के सफर को सहज बनाने के लिए रेवाड़ी रोडवेज की ओर से परिवहन विभाग के अधिकारियों को शहर में करीब 150 मिनी बसों की डिमांड भेजी गई थी। विभाग ने इसे गंभरता से लेते हुए 10 बसों के संचालन की स्वीकृति दी गई है। संभवतया फरवरी माह में इन बसों को जिला की सड़कों पर उतार दिया जाएगा।
-लटकर कर करती हैं यात्रा
स्कूल व कॉलेज की छुट्टियों के समय कई बार महिलाओं विशेषकर छात्राओं को बसों की खिड़कियों में लटकर कर यात्रा करने को मजबूर होना पड़ता है। ऐसे में कई बार हादसे की भी संभावना रहती है। इकसे अलावा अनेक मामले ऐसे भी सामने आ चुके हैं जब भीड़भाड़ वाली बसों में महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की घटनाएं हो चुकी है।
-गुलाबी रंग की होंगी बसें
जिला के लोकल रूटों पर दौड़ने वाली इन बसों की अलग पहचान रहेगी। ये बसें गुलाबी रंग की होगी, जिनमें केवल महिलाएं ही यात्रा कर सकेंगी। हालांकि गुलाबी रंग का कोई विशेष महत्व नहीं है, लेकिन इसे नारी शक्ति का प्रतिक माना गया है।
-बावल से प्राणपुरा व बावल से झाबुआ मार्गों पर दो बसों का संचालन कर दिया गया है। इन बसों का संचालन नियमित रखा जाएगा। बेटियों के साथ-साथ ग्रामीणों को किसी प्रकार की असुविधा न हो इसके लिए विभाग प्रयासरत है। इसके अलावा महिलाओं की यात्रा सुरक्षित रहे, हर संभव प्रयास किया जाएगा।
-नवीन भारद्वाज, रोडवेज महाप्रबंधक रेवाड़ी।
-फोटो-47 से 61
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उल्लेखनीय है कि बावल क्षेत्र के प्राणपुरा, पावटी, किशनुपरा, रानौली, टीकला, शाहपुर, नांगलतेजू,झाबुआ,बिदावास, नंगली परसापुर, दुल्हेड़ा कलां, दुल्हेड़ा खूर्द व पनवाड़ सहित करीब 20 गांवों में लंबे समय से रोडवेज की बसें नहीं चलाए जाने के कारण उच्च शिक्षा के लिए बावल व रेवाड़ी जाने वाली बेटियों व गामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे में उन्हें प्राइवेट वाहनों में लटक कर यात्रा करने को मजबूर होना पड़ता था। रोडवेज की बसों के संचालन के लिए कई बार अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंप चुके थे, लेकिन हर बार झूठा आश्वासन दिया जाता था। बेटियों की समस्या को सिरे चढ़ाने के लिए अमर उजाला द्वारा पिछले एक सप्ताह तक अभियान चलाया गया था। इस दौरान विद्यार्थियों, ग्रामीणों व विभिन्न संगठनों के लोगों द्वारा अधिकारियों को ज्ञापन दिलाने के साथ ही प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किए।
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लगातार समाचार प्रकाशित किए जाने के बाद रोडवेज के अधिकारियों की कुंभकर्णी नींद टूटी। अधिकारियों ने दोनों मार्गों पर सर्वे कराकर रूट मैप तैयार कराने के बाद दोनों मार्गों छात्राओं व ग्रामीणों के लिए बस सुविधा शुरू की गई।
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लंबे समय से बावल कॉलेज आने के लिए रोडवेज की बसें नहीं चलाई जा रही थी, जिससे उन्हें प्राइवेट वाहनों में लटक कर आना पड़ता था। आज रोडवेज की बसों के संचालन से बहुत खुशी हो रही है। अमर उजाला के प्रयासों से यह संभव हो पाया है।
-पल्लवी, छात्रा
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रोडवेज की बस चलने से बहुत खुशी का अनुभव हो रहा है। अब उन्हें जान जोखिम में डालकर प्राइवेट वाहनों में यात्रा नहीं में यात्रा नहीं करनी पड़ेगी।
-सुषमा
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प्राइवेट वाहनों में यात्रा करने से न केवल अधिक किराया देना पड़ता था बल्कि समय पर कालेज भी नहीं पहुंच पाते थे। लेकनि अमर उजाला के प्रयासों से रोडवेज की बसों के संचालन से अब उन्हें परेशान नहीं होना पड़ेगा।
-सुनीता
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मैं सबसे पहले अमर उजाला समाचार पत्र का धन्यवाद करना चाहूूंगी। उन्हें के प्रयासों से बसों का संचालन संभव हो पाया है। अब उन्हें प्राइवेट वाहनों में यात्रा नहीं करनी पड़ेगी।
-पूजा
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गांव राजस्थान सीमा से सटा हुआ है। ऐसे में रोडवेज की बसों के अभाव में प्राइवेट बसों में यात्रा करने को मजबूर होना पड़ता था। कई बार परिजनों के साथ अधिकारियों से मिलकर रोडवेज की बसें चलवाने की मांग की, लेकिन कुछ नहीं हुआ। अमर उजाला के प्रयासों से बस चलने लगी हैं। बहुत खुश हूं।
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लंबे समय बाद उनके मार्ग पर रोडवेज की बस चलने से काफी खुशी का अनुभव हो रहा है। अब उन्हें न तो अधिक किराया देना पड़ेगा और न ही प्राइवेट वाहनों में यात्रा करनी पड़ेगी।
-पूजा
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प्राइवेट वाहनों के आवागमन का कोई निर्धारित समय नहीं होने के कारण कई बार स्कूल भी समय पर नहीं पहुंच पाती थी, लेकिन आज रोडवेज की बस चलने से काफी खुशी हो रही है।
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उनका गांव बावल से करीब 20 किलोमीटर दूर है। रोडवेज की बसों के अभाव में प्राइवेट वाहनों में यात्रा करनी पड़ती थी। सबसे ज्यादा समस्या बेटियों को होती थी। समय पर कालेज या स्कूल नहीं पहुंच पाती थी। ऐसे में अमर उजाला के अभियान से उम्मीद बंधी। आज रोडवेज की बसों के संचालन से बेहद खुशी है।
-जीतराम लोर, ग्रामीण झाबुआ
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कई बार बेटियों की शिकायत रहती थी कि बसें समय पर नहीं चलती, जिससे कालेज पहुंचने में देर हो गई। उन्होंने भी कई बार ग्रामीणों के साथ-साथ रोडवेज की बस चलाने की मांग की है। लेकिन अमर उजाला के प्रयास से यह संभस्त्रत्त्व हो पाया बेहद खुशी की बात है।
-अशोक यादव, प्राचार्य राजकीय कन्या कालेज बावल
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रोडवेज की बसों के अभाव में बेटियों को प्राइवेट वाहनों में गांव से कालेज आना पड़ता था। बेटियां स्वयं को असुरक्षित महसूस करती थी। आज से रोडवेज की बसों के संचालन से बेटियों के साथ-साथ कालेज प्रशासन को भी बहुत खुशी है।
-दलीप कुमार, सहायक प्रोफेसर राजकीय कन्या कालेज बावल
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फरवरी में बेटियों के लिए जिला की सड़कों पर दौड़ेंगी गुलाबी रंग की 10 मिनी बसें
अमर उजाला ब्यूूरो
रेवाड़ी।
बसों में बेटियों के साथ होने वाली छेड़छाड़ की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए रोडवेज की ओर से फरवरी माह में बेटियों के 10 मिनी बसों का संचालन किया जाएगा। स्थानीय रूटों पर चलने वाली इन बसों में केवल महिलाएं ही सफर कर सकेंगी। हालांकि रोडवेज की ओर से जिला के लिए करीब 150 बसों की डिमांड भेजी गई थी, लेकिन फिलहाल 10 बसों की ही स्वीकृति मिली है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बसों में छात्राओं व महिलाओं के साथ होने वाले दुव्यवहार की घटनाओं पर अंकुश लगाने व महिलाओं के सफर को सहज बनाने के लिए रेवाड़ी रोडवेज की ओर से परिवहन विभाग के अधिकारियों को शहर में करीब 150 मिनी बसों की डिमांड भेजी गई थी। विभाग ने इसे गंभरता से लेते हुए 10 बसों के संचालन की स्वीकृति दी गई है। संभवतया फरवरी माह में इन बसों को जिला की सड़कों पर उतार दिया जाएगा।
-लटकर कर करती हैं यात्रा
स्कूल व कॉलेज की छुट्टियों के समय कई बार महिलाओं विशेषकर छात्राओं को बसों की खिड़कियों में लटकर कर यात्रा करने को मजबूर होना पड़ता है। ऐसे में कई बार हादसे की भी संभावना रहती है। इकसे अलावा अनेक मामले ऐसे भी सामने आ चुके हैं जब भीड़भाड़ वाली बसों में महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की घटनाएं हो चुकी है।
-गुलाबी रंग की होंगी बसें
जिला के लोकल रूटों पर दौड़ने वाली इन बसों की अलग पहचान रहेगी। ये बसें गुलाबी रंग की होगी, जिनमें केवल महिलाएं ही यात्रा कर सकेंगी। हालांकि गुलाबी रंग का कोई विशेष महत्व नहीं है, लेकिन इसे नारी शक्ति का प्रतिक माना गया है।
-बावल से प्राणपुरा व बावल से झाबुआ मार्गों पर दो बसों का संचालन कर दिया गया है। इन बसों का संचालन नियमित रखा जाएगा। बेटियों के साथ-साथ ग्रामीणों को किसी प्रकार की असुविधा न हो इसके लिए विभाग प्रयासरत है। इसके अलावा महिलाओं की यात्रा सुरक्षित रहे, हर संभव प्रयास किया जाएगा।
-नवीन भारद्वाज, रोडवेज महाप्रबंधक रेवाड़ी।
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