{"_id":"62e0358c0b3dfc658a6d7520","slug":"bulls-attack-is-not-stopping-bike-rider-injured-three-cars-also-broken-rewari-news-rtk653456178","type":"story","status":"publish","title_hn":"नहीं थम रहा सांड़ों का हमला, बाइक सवार घायल, तीन कारे भी तोड़ी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नहीं थम रहा सांड़ों का हमला, बाइक सवार घायल, तीन कारे भी तोड़ी
विज्ञापन
शहर व जिले में बेसहारा पशुओं व सांड़ों का लोगों पर हमला थमने का नाम नहीं ले रहा है। वहीं नगर परिषद का कैटल फ्री का दावा भी थोथा साबित हो रहा है। कारण, सांड़ों ने गांव जलियावास में एक मोटर साइकिल सवार पर हमला कर जख्मी कर दिया। वहीं, शहर के सेक्टर तीन में दो सांड़ों ने लड़ते-लड़ते तीन गाड़ियों को क्षतिग्रस्त कर दिया। सांड़ों की लड़ाई इतनी भयानक थी कि आसपास के दुकानदारों को दुकान बंद करके भागना पड़ा। जिन तीन गाड़ियों में सांड़ों ने तोड़फोड़ की है उनको काफी नुकसान पहुंचा है।
बावल रोड पर गांव जलियावास के निकट एक बाइक सवार जा रहा था। इसी दौरान वहां पर चार-पांच सांड़ आपस में लड़ रहे थे। दो सांड़ लड़ते हुए आए और मोटरसाइकिल सवार को टक्कर मार दी। चालक मोटरसाइकिल से नीचे गिर गया। दोनों सांड़ काफी देर तक उसके आसपास ही लड़ते रहे। गनीमत रही कि किसी सांड़ का पैर उस पर नहीं पड़ा। आसपास के लोगों ने सांड़ों को वहां से भगाया।
दूसरी ओर शहर निवासी अनिल चौधरी और प्रवीण ने सेक्टर तीन में प्रॉपर्टी डीलिंग का ऑफिस किया हुआ है। उनकी तीन कार ऑफिस के बाहर खड़ी थी। मंगलवार सुबह लड़ते-लड़ते दो सांड़ वहां पर आए और कारों को टक्कर मारनी शुरू कर दी। अनिल और प्रवीण चौधरी ने बाहर निकलकर देखा तो सांड़ों ने लड़ते-लड़ते उनकी एक कार का शीशा, दूसरी कार का बंपर तोड़ डाला। इससे कारों को काफी नुकसान हुआ है।
विज्ञापन
पांच साल पहले की शहर को कैटल फ्री किया जा चुका है घोषित
रेवाड़ी नगर परिषद क्षेत्र को करीब पांच साल पूर्व ही स्ट्रे कैटल फ्री शहर घोषित किया जा चुका है। मसलन शहर में बेसहारा पशु से मुक्त हो चुका है। असलियत तो यह है कि अभी भी यहां सड़कों पर सैकड़ों पशु घूमते रहते हैं।
सात लोगों की जा चुकी है जान
सांड़ जिले में एक दो नहीं बल्कि सात लोगों की जिंदगी बीते कुछ सालों के दौरान छीन चुके हैं। दो साल पूर्व तो एक सप्ताह में ही तीन लोगों का जीवन छीन लिया था। इसके बाद शहर में बड़ा आंदोलन भी हुआ था। आंदोलन के पश्चात बेसहारा पशुओं को पकड़कर गोशाला में डाला गया था। नगर निकाय की तरफ से एक गोशाला भी खोली गई थी। कुछ दिन तो सड़कों पर घूम रहे बेसहारा पशुओं को पकड़ा गया लेकिन अब फिर से हालात बिगड़ चुके हैं।
अधिकारी गोशालाओं में जगह न होने का देते हैं तर्क
प्रदेश सरकार की बैठक में तय हुआ था कि बेसहारा पशुओं को पकड़ने की जिम्मेदारी नगर परिषद की रहेगी और इनको गोशालाओं में रखवाने का इंतजार पशुपालन विभाग की ओर से कराया जाएगा। नगर परिषद के अधिकारी अब लगातार यह तर्क दे रहे हैं कि वह तो पशुओं को पकड़वाने के लिए तैयार हैं लेकिन गोशालाओं में उनको जगह ही नहीं मिल रही। पशुपालन विभाग के अधिकारियों की तरफ से भी कोई उचित जवाब नहीं दिया जा रहा।
गोशालाओं के हम लगातार संपर्क में है लेकिन ज्यादातर गोशालाओं में जगह नहीं है इसलिए कुछ नई गोशालाएं खोली जा रही हैं। डहीना में एक नई गोशाला का रजिस्ट्रेशन हुआ है और जाटूसाना गोशाला में भी हम जगह लेने की कोशिश कर रहे हैं। नगर परिषद की पूरी मदद की जा रही है।
- डॉ. राजबीर सिंह, एसडीओ पशुपालन एवं डेयरिंग विभाग।
विज्ञापन
बावल रोड पर गांव जलियावास के निकट एक बाइक सवार जा रहा था। इसी दौरान वहां पर चार-पांच सांड़ आपस में लड़ रहे थे। दो सांड़ लड़ते हुए आए और मोटरसाइकिल सवार को टक्कर मार दी। चालक मोटरसाइकिल से नीचे गिर गया। दोनों सांड़ काफी देर तक उसके आसपास ही लड़ते रहे। गनीमत रही कि किसी सांड़ का पैर उस पर नहीं पड़ा। आसपास के लोगों ने सांड़ों को वहां से भगाया।
विज्ञापन
दूसरी ओर शहर निवासी अनिल चौधरी और प्रवीण ने सेक्टर तीन में प्रॉपर्टी डीलिंग का ऑफिस किया हुआ है। उनकी तीन कार ऑफिस के बाहर खड़ी थी। मंगलवार सुबह लड़ते-लड़ते दो सांड़ वहां पर आए और कारों को टक्कर मारनी शुरू कर दी। अनिल और प्रवीण चौधरी ने बाहर निकलकर देखा तो सांड़ों ने लड़ते-लड़ते उनकी एक कार का शीशा, दूसरी कार का बंपर तोड़ डाला। इससे कारों को काफी नुकसान हुआ है।
विज्ञापन
पांच साल पहले की शहर को कैटल फ्री किया जा चुका है घोषित
रेवाड़ी नगर परिषद क्षेत्र को करीब पांच साल पूर्व ही स्ट्रे कैटल फ्री शहर घोषित किया जा चुका है। मसलन शहर में बेसहारा पशु से मुक्त हो चुका है। असलियत तो यह है कि अभी भी यहां सड़कों पर सैकड़ों पशु घूमते रहते हैं।
सात लोगों की जा चुकी है जान
सांड़ जिले में एक दो नहीं बल्कि सात लोगों की जिंदगी बीते कुछ सालों के दौरान छीन चुके हैं। दो साल पूर्व तो एक सप्ताह में ही तीन लोगों का जीवन छीन लिया था। इसके बाद शहर में बड़ा आंदोलन भी हुआ था। आंदोलन के पश्चात बेसहारा पशुओं को पकड़कर गोशाला में डाला गया था। नगर निकाय की तरफ से एक गोशाला भी खोली गई थी। कुछ दिन तो सड़कों पर घूम रहे बेसहारा पशुओं को पकड़ा गया लेकिन अब फिर से हालात बिगड़ चुके हैं।
अधिकारी गोशालाओं में जगह न होने का देते हैं तर्क
प्रदेश सरकार की बैठक में तय हुआ था कि बेसहारा पशुओं को पकड़ने की जिम्मेदारी नगर परिषद की रहेगी और इनको गोशालाओं में रखवाने का इंतजार पशुपालन विभाग की ओर से कराया जाएगा। नगर परिषद के अधिकारी अब लगातार यह तर्क दे रहे हैं कि वह तो पशुओं को पकड़वाने के लिए तैयार हैं लेकिन गोशालाओं में उनको जगह ही नहीं मिल रही। पशुपालन विभाग के अधिकारियों की तरफ से भी कोई उचित जवाब नहीं दिया जा रहा।
गोशालाओं के हम लगातार संपर्क में है लेकिन ज्यादातर गोशालाओं में जगह नहीं है इसलिए कुछ नई गोशालाएं खोली जा रही हैं। डहीना में एक नई गोशाला का रजिस्ट्रेशन हुआ है और जाटूसाना गोशाला में भी हम जगह लेने की कोशिश कर रहे हैं। नगर परिषद की पूरी मदद की जा रही है।
- डॉ. राजबीर सिंह, एसडीओ पशुपालन एवं डेयरिंग विभाग।