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पांच हजार वाली गाइड लाइन से बैंकों में असमंजस
ब्यूरो /अमर उजाला
Updated Wed, 21 Dec 2016 12:06 AM IST
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आरबीआई की 5 हजार से अधिक की राशि एक ही बार जमा कराने की गाइड लाइन जारी होने के बाद मंगलवार को जिलेभर की बैंक शाखाओं में अफरा-तफरी का माहौल रहा। पैसा जमा कराने पहुंचे बहुत से उपभोक्ताओं को इस सूचना की जानकारी भी नहीं थी। बैंकर्मियों ने उपभोक्ताओं को एक मुश्त बचे हुए पुराने नोट जमा कराने को लेकर जागरूक किया। लेकिन 5 हजार से अधिक पैसा जमा करवाने आए उपभोक्ताओं को सेल्फ डिकलेरेशन फॉर्म भरते समय कई समस्याएं आई। वहीं उपभोक्ता इस फॉर्म की अनिवार्यता को लेकर बैंक कर्मचारियों से बहसबाजी करते भी दिखे।
फॉर्म पर पैसों का स्रोत बताने का भी कॉलम
बैंककर्मी अब उपभोक्ताओं से केवल यही नहीं पूछ रहे कि आपने यह पैसा इतने दिन से क्यों नहीं जमा करवाया, बल्कि यह भी पूछा जा रहा है कि यह पैसा किस स्रोत से आया है। ऐसे में उपभोक्ताओं को यह जानकारी देते हुए बड़ी परेशानी हो रही है। हालांकि बैंकों में मंगलवार को पहुंचे लगभग उपभोक्ताओं ने छोटी रकम ही जमा कराई है। पैसे जमा कराने वालों में अधिकतर संख्या ग्रामीण क्षेत्रों से किसानों की थी। किसानों ने पशुपालन, भैंस बिक्री आदि कारणों को स्रोत वाले कॉलम में लिखा और ब्रांच मैनेजर को संतुष्ट कर अपनी रकम जमा कराई। अब ये लोग 5 हजार से अधिक की राशि जमा नहीं करा सकेंगे।
फॉर्म में क्यों और कहां के जवाब की पुष्टि करने में दिक्कत
राशि अधिक जमा कराने वालों के फॉर्म पर लिखे पहले क्यों नहीं जमा कराए पैसे ,कहां से आए पैसों नामक दो कॉलम में उपभोक्ता के जवाब की पुष्टि करना मुश्किल है। पीएनबी शाखा के ब्रांच मैनेजर चंद्रप्रकाश यादव ने बताया कि गाइडलाइन के हिसाब से सेल्फ डिकलेरेशन फॉर्म तो जमा करा रहे हैं, लेकिन इसमें लिखे जवाब सही है या गलत इसकी कोई प्रमाणिकता नहीं है। वे केवल बताए गए कारण को आधार मानकर उपभोक्ताओं के पैसे जमा कर रहे हैं। ऐसा जरूरी नहीं है कोई उपभोक्ता फॉर्म में आय का स्रोत सही ही लिख रहा हो। या ऐसा भी हो सकता है कि किसी उपभोक्ता ने बिल्कुल सही विवरण दिया हो और ब्रांच मैनेजर को वह सही न लगे और पैसा जमा करने से इनकार कर दिया जाए। तो इसमें संबंधित उपभोक्ता का नुकसान भी है। यह स्थिति थोड़ी असमंजस में डालने वाली है।
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10 से 50 हजार तक जमा
अनाजमंडी की पीएनबी शाखा में मंगलवार को गाइडलाइन के बाद कोई मोटी पुरानी रकम जमा नहीं हुई। 70 से अधिक उपभोक्ताओं ने 10 से 50 हजार के बीच पुरानी करेंसी जमा कराई व सेल्फ डिक्लेरेशन भरकर बैंक को दिया। इसके अलावा बैंक में नई करेंसी की स्थिति भी सही रही। बैंक में चेस्ट से 9 लाख और बाहर से नई 10 लाख की करेंसी जमा हुई। जिससे लगभग सभी उपभोक्ताओं को पैसा मिल गया।
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फॉर्म पर पैसों का स्रोत बताने का भी कॉलम
बैंककर्मी अब उपभोक्ताओं से केवल यही नहीं पूछ रहे कि आपने यह पैसा इतने दिन से क्यों नहीं जमा करवाया, बल्कि यह भी पूछा जा रहा है कि यह पैसा किस स्रोत से आया है। ऐसे में उपभोक्ताओं को यह जानकारी देते हुए बड़ी परेशानी हो रही है। हालांकि बैंकों में मंगलवार को पहुंचे लगभग उपभोक्ताओं ने छोटी रकम ही जमा कराई है। पैसे जमा कराने वालों में अधिकतर संख्या ग्रामीण क्षेत्रों से किसानों की थी। किसानों ने पशुपालन, भैंस बिक्री आदि कारणों को स्रोत वाले कॉलम में लिखा और ब्रांच मैनेजर को संतुष्ट कर अपनी रकम जमा कराई। अब ये लोग 5 हजार से अधिक की राशि जमा नहीं करा सकेंगे।
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फॉर्म में क्यों और कहां के जवाब की पुष्टि करने में दिक्कत
राशि अधिक जमा कराने वालों के फॉर्म पर लिखे पहले क्यों नहीं जमा कराए पैसे ,कहां से आए पैसों नामक दो कॉलम में उपभोक्ता के जवाब की पुष्टि करना मुश्किल है। पीएनबी शाखा के ब्रांच मैनेजर चंद्रप्रकाश यादव ने बताया कि गाइडलाइन के हिसाब से सेल्फ डिकलेरेशन फॉर्म तो जमा करा रहे हैं, लेकिन इसमें लिखे जवाब सही है या गलत इसकी कोई प्रमाणिकता नहीं है। वे केवल बताए गए कारण को आधार मानकर उपभोक्ताओं के पैसे जमा कर रहे हैं। ऐसा जरूरी नहीं है कोई उपभोक्ता फॉर्म में आय का स्रोत सही ही लिख रहा हो। या ऐसा भी हो सकता है कि किसी उपभोक्ता ने बिल्कुल सही विवरण दिया हो और ब्रांच मैनेजर को वह सही न लगे और पैसा जमा करने से इनकार कर दिया जाए। तो इसमें संबंधित उपभोक्ता का नुकसान भी है। यह स्थिति थोड़ी असमंजस में डालने वाली है।
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10 से 50 हजार तक जमा
अनाजमंडी की पीएनबी शाखा में मंगलवार को गाइडलाइन के बाद कोई मोटी पुरानी रकम जमा नहीं हुई। 70 से अधिक उपभोक्ताओं ने 10 से 50 हजार के बीच पुरानी करेंसी जमा कराई व सेल्फ डिक्लेरेशन भरकर बैंक को दिया। इसके अलावा बैंक में नई करेंसी की स्थिति भी सही रही। बैंक में चेस्ट से 9 लाख और बाहर से नई 10 लाख की करेंसी जमा हुई। जिससे लगभग सभी उपभोक्ताओं को पैसा मिल गया।