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Rewari News: रेवाड़ी जिले की मिट्टी में जिंक की मात्रा सबसे कम, जानिए क्या पड़ता है फसलों पर असर
Wed, 29 Mar 2023 11:18 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Wed, 29 Mar 2023 11:18 PM IST
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मृदा जांच लैब में मिट्टी के सैंपल लेकर जांच की जा रही।
संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। जिला कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के कार्यालय स्थित कृषि लैब में हर खेत स्वस्थ खेत अभियान के तहत मंगलवार तक आए 78 हजार 224 में से 14 हजार 350 मिट्टी के नमूनों की जांच की चुकी है। जांच के दौरान मिट्टी में ज्यादातर पोषक तत्व जिंक की सबसे ज्यादा कमी मिली है। इससे फसल में पौधे की पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और नष्ट हो जाती हैं। इसकी वजह से फसल की पैदावार में काफी गिरावट होती है। बता दें कि कृषि लैब के अलावा जिले के 13 स्कूल और कॉलेजों के विद्यार्थी भी सॉयल लैबों में 1300 नमूनों की जांच कर रहे हैं, जिनकी रिपोर्ट आनी बाकी है।
अधिकारियों ने बताया कि इन नमूनों में से मिट्टी के पोषक तत्व पोटाश, सल्फर, फास्फोरस, जिंक, मैगनीज व आयरन की एक साथ जांच की जा रही है। इसमें मिट्टी में सबसे ज्यादा जिंक की कमी मिल रही है। अभी तक जिले में 5544 किसानों को हेल्थ कार्ड भी दिया जा चुका है।
कृषि विशेषज्ञ डॉ. जोगिन्द्र यादव ने बताया कि मिट्टी में जिंक की ज्यादा कमी होने पर पौधे की पत्तियां भूरी या बैंगनी हो जाती हैं। जस्ता (जिंक) पौधों में क्लोरोफिल के निर्माण में सहायक होता है, जिससे पत्तियां अच्छी रहती हैं। इसके अलावा यह तत्व पौधों में नाइट्रोजन के पाचन में भी सहायक होता है।
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कृषि लैब में 78 हजार 224 में से 14 हजार 350 मिट्टी के नमूनों की जांच की चुकी है। इसके अलावा 13 स्कूल व कॉलेजों की सॉयल लैबों को 1300 मिट्टी के नमूने जांच के लिए दिए गए हैं, जिन सभी में विद्यार्थियों द्वारा मिट्टी की जांच की जा रही है।
- डॉ. दिनेश यादव, भूमि परीक्षण अधिकारी रेवाड़ी।
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रेवाड़ी। जिला कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के कार्यालय स्थित कृषि लैब में हर खेत स्वस्थ खेत अभियान के तहत मंगलवार तक आए 78 हजार 224 में से 14 हजार 350 मिट्टी के नमूनों की जांच की चुकी है। जांच के दौरान मिट्टी में ज्यादातर पोषक तत्व जिंक की सबसे ज्यादा कमी मिली है। इससे फसल में पौधे की पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और नष्ट हो जाती हैं। इसकी वजह से फसल की पैदावार में काफी गिरावट होती है। बता दें कि कृषि लैब के अलावा जिले के 13 स्कूल और कॉलेजों के विद्यार्थी भी सॉयल लैबों में 1300 नमूनों की जांच कर रहे हैं, जिनकी रिपोर्ट आनी बाकी है।
अधिकारियों ने बताया कि इन नमूनों में से मिट्टी के पोषक तत्व पोटाश, सल्फर, फास्फोरस, जिंक, मैगनीज व आयरन की एक साथ जांच की जा रही है। इसमें मिट्टी में सबसे ज्यादा जिंक की कमी मिल रही है। अभी तक जिले में 5544 किसानों को हेल्थ कार्ड भी दिया जा चुका है।
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कृषि विशेषज्ञ डॉ. जोगिन्द्र यादव ने बताया कि मिट्टी में जिंक की ज्यादा कमी होने पर पौधे की पत्तियां भूरी या बैंगनी हो जाती हैं। जस्ता (जिंक) पौधों में क्लोरोफिल के निर्माण में सहायक होता है, जिससे पत्तियां अच्छी रहती हैं। इसके अलावा यह तत्व पौधों में नाइट्रोजन के पाचन में भी सहायक होता है।
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कृषि लैब में 78 हजार 224 में से 14 हजार 350 मिट्टी के नमूनों की जांच की चुकी है। इसके अलावा 13 स्कूल व कॉलेजों की सॉयल लैबों को 1300 मिट्टी के नमूने जांच के लिए दिए गए हैं, जिन सभी में विद्यार्थियों द्वारा मिट्टी की जांच की जा रही है।
- डॉ. दिनेश यादव, भूमि परीक्षण अधिकारी रेवाड़ी।