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Rewari News: कांवड़ यात्रा के साथ कर रहे नशे के खिलाफ जागरूक
Tue, 22 Jul 2025 11:45 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Tue, 22 Jul 2025 11:45 PM IST
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फोटो : 4जानकारी देते राजेंद्र सिंह व चांदी देवी। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। युवाओं को प्राचीन परंपरा और संस्कृति से जोड़ने के उद्देश्य से 25 वर्षों से कांवड़ यात्रा कर रहे दंपती डहीना निवासी पूर्व हवलदार राजेंद्र सिंह और चांदी देवी ने अब लोगों को नशे के खिलाफ जागरूक करने का भी बेड़ा उठाया है। दंपती ने युवाओं को नशा छोड़ कर पढ़ाई पर ध्यान देने का संदेश दिया है।
राजेंद्र सिंह ने कहा कि युवाओं को अपनी प्राचीन परंपरा भूलनी नहीं चाहिए। ये परंपराएं हमारी संस्कृति को जीवित रखती हैं। उन्होंने बताया कि वह वर्ष 1996 में आर्मी में हवलदार पद से सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद वह धार्मिक कार्यक्रमों में जाने लगे। गांव में होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेने लगे। बीच-बीच में बालाजी के दर्शनों के लिए भी उनके मंदिर जाते हैं।
वर्ष 2000 में पहली बार हरिद्वार से कांवड़ लाने की इच्छा हुई तो उन्होंने यह बात पत्नी चांदी देवी से साझा किया। पत्नी ने भी कांवड़ उठाने का निर्णय लिया। इसके बाद हम दोनों ने कांवड़ यात्रा शुरू की।
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उन्होंने बताया कि वे 23 बार कांवड़ लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक कर चुके हैं। कांवड़ के इस सफर में उनकी पत्नी ने साथ दिया है। वे जहां पेटी में बांध कर कांवड़ लाते हैं जबकि उनकी पत्नी हर बार झूला कांवड़ लाकर बाघौत के प्राचीन शिव मंदिर में जल चढ़ाती हैं।
राजेंद्र और चांदी देवी ने युवाओं को संदेश दिया कि वे नशा को छोड़ कर पढ़ाई पर ध्यान देें। अपनी प्राचीन परंपरा को कभी नहीं भूलें तथा अपने नैतिक कर्तव्यों का पालन करें। उनका एक बेटा व तीन बेटियां हैं।
निष्ठा भाव से की जा रही कांवड़ियों की सेवा : कांवड़ सेवा शिविरों में श्रद्धालुओं की ओर से कांवड़ियों की सेवा निष्ठा भाव से की जा रही है। युवाओं के साथ-साथ बच्चों में कांवड़ियों की सेवा करने का शौक उमड़ रहा है। सेवा के लिए बच्चे स्नान आदि कर शिविर में पहुंच जाते हैं और कई-कई घंटे तक कांवड़ लेकर खड़े रहते हैं।
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रेवाड़ी। युवाओं को प्राचीन परंपरा और संस्कृति से जोड़ने के उद्देश्य से 25 वर्षों से कांवड़ यात्रा कर रहे दंपती डहीना निवासी पूर्व हवलदार राजेंद्र सिंह और चांदी देवी ने अब लोगों को नशे के खिलाफ जागरूक करने का भी बेड़ा उठाया है। दंपती ने युवाओं को नशा छोड़ कर पढ़ाई पर ध्यान देने का संदेश दिया है।
राजेंद्र सिंह ने कहा कि युवाओं को अपनी प्राचीन परंपरा भूलनी नहीं चाहिए। ये परंपराएं हमारी संस्कृति को जीवित रखती हैं। उन्होंने बताया कि वह वर्ष 1996 में आर्मी में हवलदार पद से सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद वह धार्मिक कार्यक्रमों में जाने लगे। गांव में होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेने लगे। बीच-बीच में बालाजी के दर्शनों के लिए भी उनके मंदिर जाते हैं।
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वर्ष 2000 में पहली बार हरिद्वार से कांवड़ लाने की इच्छा हुई तो उन्होंने यह बात पत्नी चांदी देवी से साझा किया। पत्नी ने भी कांवड़ उठाने का निर्णय लिया। इसके बाद हम दोनों ने कांवड़ यात्रा शुरू की।
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उन्होंने बताया कि वे 23 बार कांवड़ लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक कर चुके हैं। कांवड़ के इस सफर में उनकी पत्नी ने साथ दिया है। वे जहां पेटी में बांध कर कांवड़ लाते हैं जबकि उनकी पत्नी हर बार झूला कांवड़ लाकर बाघौत के प्राचीन शिव मंदिर में जल चढ़ाती हैं।
राजेंद्र और चांदी देवी ने युवाओं को संदेश दिया कि वे नशा को छोड़ कर पढ़ाई पर ध्यान देें। अपनी प्राचीन परंपरा को कभी नहीं भूलें तथा अपने नैतिक कर्तव्यों का पालन करें। उनका एक बेटा व तीन बेटियां हैं।
निष्ठा भाव से की जा रही कांवड़ियों की सेवा : कांवड़ सेवा शिविरों में श्रद्धालुओं की ओर से कांवड़ियों की सेवा निष्ठा भाव से की जा रही है। युवाओं के साथ-साथ बच्चों में कांवड़ियों की सेवा करने का शौक उमड़ रहा है। सेवा के लिए बच्चे स्नान आदि कर शिविर में पहुंच जाते हैं और कई-कई घंटे तक कांवड़ लेकर खड़े रहते हैं।