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चार अगस्त को जेल भरो आंदोलन के लिए टीमों को सौंपी जिम्मेदारियां
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मनेठी वह जमीन जहां पर बनना है एम्स।
- फोटो : Rewari
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गांव मनेठी में एम्स निर्माण को लेकर एम्स संघर्ष समिति ने चार अगस्त को जेल भरो आंदोलन का ऐलान किया है। आंदोलन सफल बनाने के लिए गठित की गईं टीमों को उनकी जिम्मेदारी सौंप दी गई है। आंदोलन में रेवाड़ी के अलावा महेंद्रगढ़, चरखी दादरी और राजस्थान के अलवर जिले के सौ से अधिक गांवों से काफी तादात में ग्रामीण शामिल होंगे। इसी के साथ संघर्ष समिति के सदस्यों ने 24 जुलाई को मुख्यमंत्री से मिलने की संभावना बताई है।
गांव मनेठी में प्रस्तावित एम्स के निर्माण को वन सलाहकार समिति की नामंजूरी के बाद जिले में राजनीति का दौर शुरू हो गया। एम्स को स्वीकृति मिलने के समय राजनेताओं में श्रेय लेने की होड़ लग गई थी। ठीक उसी तरह एम्स के निर्माण को नामंजूर कर दिए जाने के बाद भी राजनेताओं ने इसका ठीकरा एक-दूसरे को सिर फोड़ने लगे हैं। जबकि एम्स के निर्माण को नामंजूरी मिलने के बाद से क्षेत्र के लोगों में रोष है। लोगों ने इसे प्रतिष्ठा का सवाल बनाते हुए आंदोलन की चेतावनी दे दी है।
केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह के एक कार्यक्रम में एम्स के निर्माण को मनेठी ही प्राथमिकता, लेकिन जिले में ही बनेगा एम्स के बयान के बाद से संघर्ष समिति के सदस्यों की उम्मीद टूट गई। समिति सदस्यों ने राव नरबीर सिंह से दो बार मुलाकात कर मनेठी में ही एम्स निर्माण पर जोर दिया। इसके साथ ही चर्चा है कि आगामी 24 जुलाई को समिति के सदस्य मुख्यमंत्री मनोहर लाल से भी एम्स को लेकर अपना पक्ष रखेंगे।
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चार अगस्त को प्रस्तावित जेल भरो आंदोलन के लिए एम्स संघर्ष समिति ने टीमों का गठन कर जिम्मेदारियां सौंप दी है। ये टीमें रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, चरखी दादरी व राजस्थान के अलवर जिले के ग्रामीणों से संपर्क कर आंदोलन में हिस्सा लेने के लिए आह्वान करेगी। समिति सदस्यों ने बताया कि आंदोलन के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। आंदोलन में करीब 20 हजार लोगों के हिस्सा लेने की संभावना है।
राजपुरा के ग्रामीणों ने भेजे पांच पोस्टकार्ड
गांव राजपुरा के ग्रामीणों ने मनेठी एम्स के निर्माण के लिए प्रधानमंत्री के नाम पोस्टकार्ड भेजों अभियान के लिए करीब पांच पोस्टकार्ड लिखकर डाक से भेजे। पर्यावरण प्रेमी अमर सिंह ने बताया कि मनेठी में एम्स का निर्माण क्षेत्र की मांग है। जिले के लोग लंबे समय एम्स की मांग कर रहे थे। लेकिन स्वीकृति के बावजूद भी इसके निर्माण में अड़चन आना गलत है।
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गांव मनेठी में प्रस्तावित एम्स के निर्माण को वन सलाहकार समिति की नामंजूरी के बाद जिले में राजनीति का दौर शुरू हो गया। एम्स को स्वीकृति मिलने के समय राजनेताओं में श्रेय लेने की होड़ लग गई थी। ठीक उसी तरह एम्स के निर्माण को नामंजूर कर दिए जाने के बाद भी राजनेताओं ने इसका ठीकरा एक-दूसरे को सिर फोड़ने लगे हैं। जबकि एम्स के निर्माण को नामंजूरी मिलने के बाद से क्षेत्र के लोगों में रोष है। लोगों ने इसे प्रतिष्ठा का सवाल बनाते हुए आंदोलन की चेतावनी दे दी है।
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केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह के एक कार्यक्रम में एम्स के निर्माण को मनेठी ही प्राथमिकता, लेकिन जिले में ही बनेगा एम्स के बयान के बाद से संघर्ष समिति के सदस्यों की उम्मीद टूट गई। समिति सदस्यों ने राव नरबीर सिंह से दो बार मुलाकात कर मनेठी में ही एम्स निर्माण पर जोर दिया। इसके साथ ही चर्चा है कि आगामी 24 जुलाई को समिति के सदस्य मुख्यमंत्री मनोहर लाल से भी एम्स को लेकर अपना पक्ष रखेंगे।
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चार अगस्त को प्रस्तावित जेल भरो आंदोलन के लिए एम्स संघर्ष समिति ने टीमों का गठन कर जिम्मेदारियां सौंप दी है। ये टीमें रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, चरखी दादरी व राजस्थान के अलवर जिले के ग्रामीणों से संपर्क कर आंदोलन में हिस्सा लेने के लिए आह्वान करेगी। समिति सदस्यों ने बताया कि आंदोलन के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। आंदोलन में करीब 20 हजार लोगों के हिस्सा लेने की संभावना है।
राजपुरा के ग्रामीणों ने भेजे पांच पोस्टकार्ड
गांव राजपुरा के ग्रामीणों ने मनेठी एम्स के निर्माण के लिए प्रधानमंत्री के नाम पोस्टकार्ड भेजों अभियान के लिए करीब पांच पोस्टकार्ड लिखकर डाक से भेजे। पर्यावरण प्रेमी अमर सिंह ने बताया कि मनेठी में एम्स का निर्माण क्षेत्र की मांग है। जिले के लोग लंबे समय एम्स की मांग कर रहे थे। लेकिन स्वीकृति के बावजूद भी इसके निर्माण में अड़चन आना गलत है।