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Rewari News: वोटिंग के बाद हार-जीत के आकलन में जुटे प्रत्याशी
Mon, 11 May 2026 01:02 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Mon, 11 May 2026 01:02 AM IST
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भाड़ावास गेट के पास मतदान केंद्र के बाहर मतदाताओं से वोट मांगते प्रत्याशी। संवाद
रेवाड़ी। रेवाड़ी नगर परिषद और धारूहेड़ा नगर पालिका चुनाव के लिए मतदान संपन्न होने के बाद अब प्रत्याशी और उनके समर्थक जीत-हार का गणित लगाने में जुट गए हैं। शहर से लेकर गांवों तक चुनावी चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
कहीं बूथवार मतदान प्रतिशत को आधार बनाया जा रहा है तो कहीं जातीय और स्थानीय समीकरणों के आधार पर हार-जीत का आकलन किया जा रहा है।
रेवाड़ी नगर परिषद में अध्यक्ष पद के लिए मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा और कांग्रेस के बीच माना जा रहा है। दोनों ही दल अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं।
भाजपा नेताओं का कहना है कि सरकार की योजनाओं और संगठन की मजबूती का लाभ पार्टी प्रत्याशी को मिलेगा जबकि कांग्रेस का दावा है कि जनता ने बदलाव के पक्ष में मतदान किया है।
दूसरी ओर धारूहेड़ा नगर पालिका चुनाव इस बार त्रिकोणीय मुकाबले के रूप में सामने आया है। यहां भाजपा और कांग्रेस के अलावा निर्दलीय प्रत्याशी भी मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहे हैं।
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यही कारण है कि धारूहेड़ा का चुनाव सबसे अधिक चर्चा में बना हुआ है। निर्दलीय प्रत्याशी के मैदान में होने से दोनों प्रमुख दलों के समीकरण प्रभावित होते नजर आ रहे हैं। मतदान के बाद यहां भी प्रत्याशी अपने समर्थकों के साथ बूथवार समीक्षा करने में जुटे रहे।
मतदान में स्थानीय मुद्दों का असर दिखा
इस बार मतदान में स्थानीय मुद्दों का असर साफ दिखाई दिया। शहर में सफाई व्यवस्था, पेयजल, सीवर, सड़कें और विकास कार्य चुनावी चर्चा के केंद्र में रहे। कई स्थानों पर मतदाताओं ने पार्टी से अधिक स्थानीय उम्मीदवार की सक्रियता को महत्व दिया। यही कारण है कि प्रत्याशी अब वार्डवार मतदान प्रतिशत और समर्थकों की सक्रियता के आधार पर अपनी स्थिति मजबूत बताने का प्रयास कर रहे हैं।
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चुनाव कार्यालयों में समर्थकों का जमावड़ा
मतदान समाप्त होने के बाद देर शाम तक उम्मीदवारों के चुनाव कार्यालयों में समर्थकों का जमावड़ा लगा रहा। कार्यकर्ता अलग-अलग बूथों से मिले मतदान रुझानों के आधार पर जीत के दावे करते नजर आए। वहीं कुछ प्रत्याशी शांत रणनीति के तहत परिणाम आने तक इंतजार करने की बात कह रहे हैं। अब सभी की नजर मतगणना और परिणामों पर टिकी हुई है। रेवाड़ी में जहां भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर मानी जा रही है, वहीं धारूहेड़ा में त्रिकोणीय मुकाबला परिणाम को और अधिक रोचक बना सकता है। आने वाले नतीजे यह तय करेंगे कि शहरी निकायों की सत्ता पर किसका कब्जा होगा।
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कहीं बूथवार मतदान प्रतिशत को आधार बनाया जा रहा है तो कहीं जातीय और स्थानीय समीकरणों के आधार पर हार-जीत का आकलन किया जा रहा है।
रेवाड़ी नगर परिषद में अध्यक्ष पद के लिए मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा और कांग्रेस के बीच माना जा रहा है। दोनों ही दल अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं।
भाजपा नेताओं का कहना है कि सरकार की योजनाओं और संगठन की मजबूती का लाभ पार्टी प्रत्याशी को मिलेगा जबकि कांग्रेस का दावा है कि जनता ने बदलाव के पक्ष में मतदान किया है।
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दूसरी ओर धारूहेड़ा नगर पालिका चुनाव इस बार त्रिकोणीय मुकाबले के रूप में सामने आया है। यहां भाजपा और कांग्रेस के अलावा निर्दलीय प्रत्याशी भी मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहे हैं।
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यही कारण है कि धारूहेड़ा का चुनाव सबसे अधिक चर्चा में बना हुआ है। निर्दलीय प्रत्याशी के मैदान में होने से दोनों प्रमुख दलों के समीकरण प्रभावित होते नजर आ रहे हैं। मतदान के बाद यहां भी प्रत्याशी अपने समर्थकों के साथ बूथवार समीक्षा करने में जुटे रहे।
मतदान में स्थानीय मुद्दों का असर दिखा
इस बार मतदान में स्थानीय मुद्दों का असर साफ दिखाई दिया। शहर में सफाई व्यवस्था, पेयजल, सीवर, सड़कें और विकास कार्य चुनावी चर्चा के केंद्र में रहे। कई स्थानों पर मतदाताओं ने पार्टी से अधिक स्थानीय उम्मीदवार की सक्रियता को महत्व दिया। यही कारण है कि प्रत्याशी अब वार्डवार मतदान प्रतिशत और समर्थकों की सक्रियता के आधार पर अपनी स्थिति मजबूत बताने का प्रयास कर रहे हैं।
चुनाव कार्यालयों में समर्थकों का जमावड़ा
मतदान समाप्त होने के बाद देर शाम तक उम्मीदवारों के चुनाव कार्यालयों में समर्थकों का जमावड़ा लगा रहा। कार्यकर्ता अलग-अलग बूथों से मिले मतदान रुझानों के आधार पर जीत के दावे करते नजर आए। वहीं कुछ प्रत्याशी शांत रणनीति के तहत परिणाम आने तक इंतजार करने की बात कह रहे हैं। अब सभी की नजर मतगणना और परिणामों पर टिकी हुई है। रेवाड़ी में जहां भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर मानी जा रही है, वहीं धारूहेड़ा में त्रिकोणीय मुकाबला परिणाम को और अधिक रोचक बना सकता है। आने वाले नतीजे यह तय करेंगे कि शहरी निकायों की सत्ता पर किसका कब्जा होगा।