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Rewari News: पेट्रोल पाइपलाइन चोरी मामले में आरोपी को फिर मिली जमानत
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जिला न्यायालय रेवाड़ी। संवाद
रेवाड़ी। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सौरभ कुमार की अदालत ने पेट्रोल पाइपलाइन चोरी और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम से जुड़े मामले में आरोपी हरीश उर्फ मिस्त्री को दोबारा जमानत दे दी है। आरोपी हरियाणा के सोनीपत जिले के गांव भदाना का रहने वाला है।
अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने बताया कि आरोपी पहले से इस मामले में जमानत पर था लेकिन 17 जनवरी को वह अदालत में पेश नहीं हो सका क्योंकि उस समय वह झज्जर जिले के बादली थाना में दर्ज एक अन्य मामले में न्यायिक हिरासत में था। आरोपी को उस मामले में 12 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था और 18 मार्च 2026 को जमानत मिली।
अदालत में अनुपस्थित रहने के पीछे कोई जानबूझकर की गई लापरवाही नहीं थी। आरोपी की ओर से अगली तारीख पर प्रोडक्शन वारंट जारी करने की अर्जी भी दाखिल की गई थी। वकील ने कहा कि आरोपी फिलहाल हिरासत में है और मुकदमे के पूरा होने में लंबा समय लग सकता है, इसलिए उसे फिर से जमानत दी जानी चाहिए।
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वहीं सरकारी पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी को पहले भी जमानत दी गई थी और दोबारा रिहा किए जाने पर वह फिर से राहत का गलत फायदा उठा सकता है। अभियोजन पक्ष ने यह भी स्वीकार किया कि आरोपी वास्तव में दूसरे मामले में जेल में बंद था जिसके कारण वह अदालत में पेश नहीं हो पाया।
21 मई को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि आरोपी की ओर से उचित प्रक्रिया अपनाई गई थी और संचार की कमी के कारण समय पर आवेदन नहीं हो पाया। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने नरम रुख अपनाते हुए आरोपी को जमानत देने का आदेश दिया।
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अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने बताया कि आरोपी पहले से इस मामले में जमानत पर था लेकिन 17 जनवरी को वह अदालत में पेश नहीं हो सका क्योंकि उस समय वह झज्जर जिले के बादली थाना में दर्ज एक अन्य मामले में न्यायिक हिरासत में था। आरोपी को उस मामले में 12 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था और 18 मार्च 2026 को जमानत मिली।
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अदालत में अनुपस्थित रहने के पीछे कोई जानबूझकर की गई लापरवाही नहीं थी। आरोपी की ओर से अगली तारीख पर प्रोडक्शन वारंट जारी करने की अर्जी भी दाखिल की गई थी। वकील ने कहा कि आरोपी फिलहाल हिरासत में है और मुकदमे के पूरा होने में लंबा समय लग सकता है, इसलिए उसे फिर से जमानत दी जानी चाहिए।
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वहीं सरकारी पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी को पहले भी जमानत दी गई थी और दोबारा रिहा किए जाने पर वह फिर से राहत का गलत फायदा उठा सकता है। अभियोजन पक्ष ने यह भी स्वीकार किया कि आरोपी वास्तव में दूसरे मामले में जेल में बंद था जिसके कारण वह अदालत में पेश नहीं हो पाया।
21 मई को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि आरोपी की ओर से उचित प्रक्रिया अपनाई गई थी और संचार की कमी के कारण समय पर आवेदन नहीं हो पाया। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने नरम रुख अपनाते हुए आरोपी को जमानत देने का आदेश दिया।