{"_id":"60f9a8658ebc3e6da50f40d3","slug":"a-batch-of-farmers-from-kota-and-bundi-reached-the-strike-site-rewari-news-rtk6186051183","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोटा और बूंदी के किसानों का जत्था धरनास्थल पर पहुंचा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोटा और बूंदी के किसानों का जत्था धरनास्थल पर पहुंचा
विज्ञापन
खेड़ा बॉर्डर स्थित धरनास्थल पर प्रदर्शन करते किसान।
- फोटो : Rewari
रेवाड़ी। कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली-जयपुर हाईवे स्थित खेड़ा बॉर्डर पर किसानों का आंदोलन 220वें दिन भी जारी रहा। बारिश के कारण जमा हुए पानी से आंदोलनकारी किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं वीरवार को धरनास्थल पर कोटा व बूंदी के किसानों का जत्था पहुंचा। धरनास्थल पर किसानों की समूह चर्चाओं का दौर भी जारी है।
बता दें कि कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली कूच करते समय हरियाणा पुलिस ने राजस्थान के किसानों को दिल्ली-जयपुर स्थित खेड़ा बॉर्डर पर रोक दिया था। उसके बाद से राजस्थान सहित अन्य प्रदेशों के किसानों ने यहीं पर अपना पड़ाव डाल दिया था।
वीरवार को किसानों को संबोधित करते हुए रामकिशन महलावत ने कहा कि किसान नेताओं के प्रतिनिधिमंडल दिल्ली में विरोध प्रदर्शन कर रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि कानूनों को रद्द कराने के लिए देश का किसान पिछले कई माह से सड़कों पर डेरा डाले हुए हैं, लेकिन केंद्र सरकार किसानों से बात करने का तैयार नहीं है। केंद्र सरकार की हठधर्मिता के कारण ही सैकड़ों किसान अपनी जान से हाथ धो बैठे है। लेकिन केंद्र सरकार द्वारा चंद औद्योगिक घरानों को लाभ पहुंचाने के मकसद से तीनों कृषि कानूनों को रद्द नहीं कर रही है। केंद्र सरकार को तीनों कृषि कानूनों को रद्द करना ही पड़ेगा। उन्होंने कहा कि आंदोलन एक बार फिर से तेजी पकड़ने लगा है। देश के कोने-कोने से किसान दिल्ली की सीमाओं पर पहुंचने लगे हैं। किसानों का संकल्प है कि तीनों कृषि कानून रद्द होने तक आंदोलन को जारी रखेंगे। इस अवसर पर राजाराम मील, अमरा राम, रणजीत राजू, सुमेर जैलदार, पूर्व सरपंच सुमेर बनीपुर, ईश्वर महलावत व अतर सिंह नेहरा सहित अन्य किसान मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
बता दें कि कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली कूच करते समय हरियाणा पुलिस ने राजस्थान के किसानों को दिल्ली-जयपुर स्थित खेड़ा बॉर्डर पर रोक दिया था। उसके बाद से राजस्थान सहित अन्य प्रदेशों के किसानों ने यहीं पर अपना पड़ाव डाल दिया था।
विज्ञापन
वीरवार को किसानों को संबोधित करते हुए रामकिशन महलावत ने कहा कि किसान नेताओं के प्रतिनिधिमंडल दिल्ली में विरोध प्रदर्शन कर रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि कानूनों को रद्द कराने के लिए देश का किसान पिछले कई माह से सड़कों पर डेरा डाले हुए हैं, लेकिन केंद्र सरकार किसानों से बात करने का तैयार नहीं है। केंद्र सरकार की हठधर्मिता के कारण ही सैकड़ों किसान अपनी जान से हाथ धो बैठे है। लेकिन केंद्र सरकार द्वारा चंद औद्योगिक घरानों को लाभ पहुंचाने के मकसद से तीनों कृषि कानूनों को रद्द नहीं कर रही है। केंद्र सरकार को तीनों कृषि कानूनों को रद्द करना ही पड़ेगा। उन्होंने कहा कि आंदोलन एक बार फिर से तेजी पकड़ने लगा है। देश के कोने-कोने से किसान दिल्ली की सीमाओं पर पहुंचने लगे हैं। किसानों का संकल्प है कि तीनों कृषि कानून रद्द होने तक आंदोलन को जारी रखेंगे। इस अवसर पर राजाराम मील, अमरा राम, रणजीत राजू, सुमेर जैलदार, पूर्व सरपंच सुमेर बनीपुर, ईश्वर महलावत व अतर सिंह नेहरा सहित अन्य किसान मौजूद रहे।
विज्ञापन