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गांव चिराहड़ा से लिया गया पानी का नमूना फेल
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रेवाड़ी। बावल औद्योगिक क्षेत्र स्थित औद्योगिक इकाईयों से निकले दूषित पानी से भूमिगत जलस्तर प्रदूषित होने पर एनजीटी ने अवैध बोरवेल तुरंत बंद करने के आदेश दिए हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने सेंट्रल ग्राउंड वाटर अथॉरिटी व स्टेट प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड को आदेश दिए कि गांव चिराहड़ा के आसपास के गांवों के लोगों को स्वच्छ पेयजल मुहैया कराएं। चिराहड़ा और आसपास के गांवों में प्रदूषित हुए भूमिगत जल के कारणों की रिपोर्ट तैयार करें। औद्योगिक इकाई दोषी मिले तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। एनजीटी ने यह आदेश गांव चिराहड़ा और आसपास से लिए गए पानी के चार नमूनों में से एक फेल होने पर किए हैं।
औद्योगिक क्षेत्र के गांव चिराहड़ा व आसपास के गांवों में भूमिगत जल प्रदूषित हो रहा है। पीने योग्य पानी की भी समस्या बढ़ गई है। ग्रामीणों को महंगे भाव में पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है। पेयजल समस्या और भूमिगत जलस्तर प्रदूषित होने की शिकायत कई बार ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से की थी। जिस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। ग्रामीणों का कहना था कि औद्योगिक इकाईयों की वजह से उन्हें दूषित पानी पीना पड़ रहा है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। ग्रामीणों का यह भी आरोप था कि कुछ इकाईयां जमीन में दूषित पानी छोड़ रही हैं जिनके कारण भूमिगत जल प्रदूषित हो रहा है।
रघुनाथ ने खटखटाया एनजीटी का दरवाजा
इस संबंध में गांव चिराहड़ा निवासी रघुनाथ सिंह ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाया। रघुनाथ ने अपनी शिकायत में दूषित पेयजल व भूजल खराब होने के आरोप लगाए थे। एनजीटी ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए स्वच्छ जांच के आदेश दिए।
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केंद्रीय भूजल की टीम को मिला दूषित भूजल
केंद्रीय भूजल बोर्ड की एक टीम ने कुछ समय पहले इस एरिया का मुआयना किया। लोगों की समस्या सुनने के बाद मौके से पानी के नमूने लिए थे। चिराहड़ा व आसपास के गांवों की भूमि से लिए भूजल के चार नमूने जांच के लिए लैब भेजे गए थे। जिनमें से एक फेल हो गया। जांच में यहां का भूमिगत जलस्तर प्रदूषित पाया गया।
यह दिए आदेश
एनजीटी ने सीजीडब्ल्यूए, एचएसपीसीबी को आदेश दिए गए हैं कि सबसे पहले तो चिराहड़ा और आसपास के गांव को स्वच्छ पेयजल मुहैया कराया जाए। इसके साथ ही उन औद्योगिक इकाइयों की जांच की जांच की जाए, जिन पर भूमिगत जल को दूषित करने के आरोप हैं, अगर आरोप सही साबित होते है उन पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
एनजीटी के आदेश मिल चुके हैं। भूजल विभाग की ओर से बोरवेल पर कार्रवाई की जाएगी। स्वच्छ पेयजल के बारे में भी निर्देश आए हैं। हमारे विभाग से जुड़े सभी आदेशों को पूरा कराया जाएगा। अगर कोई कंपनी दोषी मिली तो उन पर कार्रवाई होगी।
भूपेंद्र सिंह, रीजनल ऑफिसर, पाल्यूशन कंट्रोल बोर्ड, रेवाड़ी
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औद्योगिक क्षेत्र के गांव चिराहड़ा व आसपास के गांवों में भूमिगत जल प्रदूषित हो रहा है। पीने योग्य पानी की भी समस्या बढ़ गई है। ग्रामीणों को महंगे भाव में पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है। पेयजल समस्या और भूमिगत जलस्तर प्रदूषित होने की शिकायत कई बार ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से की थी। जिस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। ग्रामीणों का कहना था कि औद्योगिक इकाईयों की वजह से उन्हें दूषित पानी पीना पड़ रहा है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। ग्रामीणों का यह भी आरोप था कि कुछ इकाईयां जमीन में दूषित पानी छोड़ रही हैं जिनके कारण भूमिगत जल प्रदूषित हो रहा है।
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रघुनाथ ने खटखटाया एनजीटी का दरवाजा
इस संबंध में गांव चिराहड़ा निवासी रघुनाथ सिंह ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाया। रघुनाथ ने अपनी शिकायत में दूषित पेयजल व भूजल खराब होने के आरोप लगाए थे। एनजीटी ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए स्वच्छ जांच के आदेश दिए।
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केंद्रीय भूजल की टीम को मिला दूषित भूजल
केंद्रीय भूजल बोर्ड की एक टीम ने कुछ समय पहले इस एरिया का मुआयना किया। लोगों की समस्या सुनने के बाद मौके से पानी के नमूने लिए थे। चिराहड़ा व आसपास के गांवों की भूमि से लिए भूजल के चार नमूने जांच के लिए लैब भेजे गए थे। जिनमें से एक फेल हो गया। जांच में यहां का भूमिगत जलस्तर प्रदूषित पाया गया।
यह दिए आदेश
एनजीटी ने सीजीडब्ल्यूए, एचएसपीसीबी को आदेश दिए गए हैं कि सबसे पहले तो चिराहड़ा और आसपास के गांव को स्वच्छ पेयजल मुहैया कराया जाए। इसके साथ ही उन औद्योगिक इकाइयों की जांच की जांच की जाए, जिन पर भूमिगत जल को दूषित करने के आरोप हैं, अगर आरोप सही साबित होते है उन पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
एनजीटी के आदेश मिल चुके हैं। भूजल विभाग की ओर से बोरवेल पर कार्रवाई की जाएगी। स्वच्छ पेयजल के बारे में भी निर्देश आए हैं। हमारे विभाग से जुड़े सभी आदेशों को पूरा कराया जाएगा। अगर कोई कंपनी दोषी मिली तो उन पर कार्रवाई होगी।
भूपेंद्र सिंह, रीजनल ऑफिसर, पाल्यूशन कंट्रोल बोर्ड, रेवाड़ी