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रेवाड़ी में शगुन कंपनी से मात्र 17 हजार रुपये का सर्जिकल उपकरण खरीदा
Updated Wed, 21 Mar 2018 12:13 AM IST
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रेवाड़ी में शगुन कंपनी से मात्र 17 हजार रुपये का सर्जिकल उपकरण खरीदा
रेवाड़ी। स्वास्थ्य विभाग में दवा घोटाले में जिले का नाम शामिल होने से विभाग के अधिकारियों की नींद उड़ गई है। हालांकि सरकार ने उच्च स्तर पर जांच के आदेश दे दिए हैं, लेकिन मंगलवार को दिनभर गुप्तचर विभाग द्वारा शहर के नागरिक अस्पताल में छापेमारी की खबर चर्चा का विषय रही है। हालांकि गुप्तचर विभाग की टीम के आने का पूरा अंदेशा था। उधर, अधिकारियों का कहना है कि विभाग की ओर से 2014-15 में सगुन नामक कंपनी से मात्र 17 हजार रुपये के सर्जिकल उपकरण खरीदा गया था। विभाग ने इस कंपनी से कोई दवाई नहीं खरीदी थी।
उल्लेखनीय है कि एक आरटीआई के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग में हुए दवा और उपकरणों के घोटाले की परतें खुलनी शुरू हुई, जिसमें रेवाड़ी नाम प्रमुख था। रेवाड़ी में नियमों को ताक पर रख कर दवा खरीदने की बात सामने आ रही है, लेकिन अधिकारियों की माने तो रेवाड़ी में सगुन नामक कंपनी से दवाइयां नहीं खरीदी गई थी। यहां केवल सर्जिकल का सामना खरीदा गया, जिसमें टेस्ट ट्यूब, जोंडिश ट्यूब, सीसियां आदि शामिल है। यहां दवाइयां अन्य कंपनियों से खरीदी गई थी। इस कंपनी से तीन आर्डर से सर्जिकल का सामान खरीदा गया था। गौरतलब है कि रेवाड़ी जिले में दवाइयों की खरीद के लिए पिछले तीन साल में करीब दो करोड़ रुपये का बजट अलॉट किया था। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रेवाड़ी में एजी द्वारा ऑडिट भी किया जा चुका है।
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इन कंपनियों से खरीदी दवाइयां
रेवाड़ी में जिन कंपनियों से दवाईयां खरीदी गई थी, उनमें आईएमआईसी फरीदाबाद, यूसेंट बायोलोजिकल रेवाड़ी, सोहन मेडिकल रेवाड़ी, देव सर्जिकल रेवाड़ी, व आरपी फार्मा कैथल, लिखा ट्रेडर्स हिसार कंपनियां शामिल हैं।
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-रेवाड़ी में छह कंपनियों को ठेका दिया गया था, लेकिन जिस कंपनी का नाम बोगस बताया जा रहा है उससे मात्र 17 हजार रुपये का सर्जिकल का सामना खरीदा गया था। दवाइयां खरीदने में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। ना ही यहां गुप्तचर विभाग की कोई टीम आई है।
डॉक्टर सुदर्शन पंवार, एसएमओ रेवाड़ी।
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रेवाड़ी। स्वास्थ्य विभाग में दवा घोटाले में जिले का नाम शामिल होने से विभाग के अधिकारियों की नींद उड़ गई है। हालांकि सरकार ने उच्च स्तर पर जांच के आदेश दे दिए हैं, लेकिन मंगलवार को दिनभर गुप्तचर विभाग द्वारा शहर के नागरिक अस्पताल में छापेमारी की खबर चर्चा का विषय रही है। हालांकि गुप्तचर विभाग की टीम के आने का पूरा अंदेशा था। उधर, अधिकारियों का कहना है कि विभाग की ओर से 2014-15 में सगुन नामक कंपनी से मात्र 17 हजार रुपये के सर्जिकल उपकरण खरीदा गया था। विभाग ने इस कंपनी से कोई दवाई नहीं खरीदी थी।
उल्लेखनीय है कि एक आरटीआई के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग में हुए दवा और उपकरणों के घोटाले की परतें खुलनी शुरू हुई, जिसमें रेवाड़ी नाम प्रमुख था। रेवाड़ी में नियमों को ताक पर रख कर दवा खरीदने की बात सामने आ रही है, लेकिन अधिकारियों की माने तो रेवाड़ी में सगुन नामक कंपनी से दवाइयां नहीं खरीदी गई थी। यहां केवल सर्जिकल का सामना खरीदा गया, जिसमें टेस्ट ट्यूब, जोंडिश ट्यूब, सीसियां आदि शामिल है। यहां दवाइयां अन्य कंपनियों से खरीदी गई थी। इस कंपनी से तीन आर्डर से सर्जिकल का सामान खरीदा गया था। गौरतलब है कि रेवाड़ी जिले में दवाइयों की खरीद के लिए पिछले तीन साल में करीब दो करोड़ रुपये का बजट अलॉट किया था। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रेवाड़ी में एजी द्वारा ऑडिट भी किया जा चुका है।
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इन कंपनियों से खरीदी दवाइयां
रेवाड़ी में जिन कंपनियों से दवाईयां खरीदी गई थी, उनमें आईएमआईसी फरीदाबाद, यूसेंट बायोलोजिकल रेवाड़ी, सोहन मेडिकल रेवाड़ी, देव सर्जिकल रेवाड़ी, व आरपी फार्मा कैथल, लिखा ट्रेडर्स हिसार कंपनियां शामिल हैं।
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-रेवाड़ी में छह कंपनियों को ठेका दिया गया था, लेकिन जिस कंपनी का नाम बोगस बताया जा रहा है उससे मात्र 17 हजार रुपये का सर्जिकल का सामना खरीदा गया था। दवाइयां खरीदने में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। ना ही यहां गुप्तचर विभाग की कोई टीम आई है।
डॉक्टर सुदर्शन पंवार, एसएमओ रेवाड़ी।