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पल में बदली विवाह की खुशियां, आधे घटें में खाली हुआ पंडाल
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दुल्हन के घर से पांच किलोमीटर पहले ही मातम में बदली खुशियां, पांच घंटे बाद गमगीन माहौल में वर-वधू ने लिए फेरे
-बाराती बने दूल्हे के पिता और तीन भांजा-भांजियों की सड़क हादसे में मौत
अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी। झज्जर जिले के गांव बेरी से शुक्रवार शाम को करीब सात बजे दूल्हे जितेंद्र की बारात रेवाड़ी जिले के गोकलगढ़ के लिए रवाना हुई। बेटे जितेंद्र की बहू लाने के लिए पिता राजेंद्र घर से बेहद खुश सज-धज कर नाती-नातिन के साथ सफेद रंग की स्विफ्ट कार में सवार होकर निकले थे। दोनों परिवारों ने सपने में भी नहीं सोचा था कि शादी से पहले इतनी बड़ी अनहोनी हो जाएगी। यह दर्दनाक हादसा उस वक्त हुआ जब बाराती दुल्हन के घर से महज पांच किलोमीटर की दूरी पर थे। करीब आठ बजे का समय था जब गंगायचा टोल के समीप अचानक स्विफ्ट का टायर फट गया और कार आगे चल रहे ट्रॉले में जा घुसी। कार ट्रॉले में इस कदर फंसी थी कि उसे काट कर बाहर निकाला। राजेंद्र, कार चालक और तीन नाती-नातिनों ने तड़पते हुए मौके पर ही दम तोड़ दिया। कुल सात लोगों में राजेंद्र का दामाद संजय और नातिन आदिती ही बची। पीछे बारात की अन्य गाड़ियां हादसा देखकर रुकी और दोनों परिवारों को सूचना दी। सूचना मिलते ही शादी की खुशियां मातम में बदल गई। शहनाई, बैंड-बाजा थम गया। पंडाल में खाना-पीना बंद हो गया। नाते-रिश्तेदार और पड़ोसी किसी तरह भगवान की मर्जी बताकर दोनों परिवारों को ढाढ़स बंधाने लगे। रेवाड़ी के ट्रामा सेंटर पर वर-वधू पक्ष के लोगों का जमावड़ा लग गया। हादसे के करीब पांच घंटे बाद बड़े-बुजुर्गों के समझाने के बाद बेहद गमगीन माहौल में शादी की रस्में पूरी हुई।
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-बाराती बने दूल्हे के पिता और तीन भांजा-भांजियों की सड़क हादसे में मौत
अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी। झज्जर जिले के गांव बेरी से शुक्रवार शाम को करीब सात बजे दूल्हे जितेंद्र की बारात रेवाड़ी जिले के गोकलगढ़ के लिए रवाना हुई। बेटे जितेंद्र की बहू लाने के लिए पिता राजेंद्र घर से बेहद खुश सज-धज कर नाती-नातिन के साथ सफेद रंग की स्विफ्ट कार में सवार होकर निकले थे। दोनों परिवारों ने सपने में भी नहीं सोचा था कि शादी से पहले इतनी बड़ी अनहोनी हो जाएगी। यह दर्दनाक हादसा उस वक्त हुआ जब बाराती दुल्हन के घर से महज पांच किलोमीटर की दूरी पर थे। करीब आठ बजे का समय था जब गंगायचा टोल के समीप अचानक स्विफ्ट का टायर फट गया और कार आगे चल रहे ट्रॉले में जा घुसी। कार ट्रॉले में इस कदर फंसी थी कि उसे काट कर बाहर निकाला। राजेंद्र, कार चालक और तीन नाती-नातिनों ने तड़पते हुए मौके पर ही दम तोड़ दिया। कुल सात लोगों में राजेंद्र का दामाद संजय और नातिन आदिती ही बची। पीछे बारात की अन्य गाड़ियां हादसा देखकर रुकी और दोनों परिवारों को सूचना दी। सूचना मिलते ही शादी की खुशियां मातम में बदल गई। शहनाई, बैंड-बाजा थम गया। पंडाल में खाना-पीना बंद हो गया। नाते-रिश्तेदार और पड़ोसी किसी तरह भगवान की मर्जी बताकर दोनों परिवारों को ढाढ़स बंधाने लगे। रेवाड़ी के ट्रामा सेंटर पर वर-वधू पक्ष के लोगों का जमावड़ा लग गया। हादसे के करीब पांच घंटे बाद बड़े-बुजुर्गों के समझाने के बाद बेहद गमगीन माहौल में शादी की रस्में पूरी हुई।