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Rewari News: कोसली में जलनिकासी पर खर्च होंगे 30.50 करोड़, जल्द लगाया जाएगा टेंडर
Tue, 03 Mar 2026 12:09 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Tue, 03 Mar 2026 12:09 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कोसली। कोसली विधानसभा क्षेत्र के गांवों में बारिश में होने वाले जलभराव की समस्या को लेकर हरियाणा सरकार ने 30 करोड़ 50 लाख रुपये की परियोजनाएं तैयार की हैं। अगले सप्ताह में टेंडर हो जाने की उम्मीद है।
हर साल मानसून सीजन में कोसली हलका के करीब एक दर्जन से अधिक गांवों में जलभराव की गंभीर समस्या उत्पन्न हो जाती है जिस कारण फसलों की बर्बादी तो होती ही है, आम जनजीवन पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए सिंचाई विभाग ने एक बड़ी योजना तैयार की थी, जिसे चंडीगढ़ से स्वीकृति मिल चुकी है।
योजना के मुताबिक गांव लीलोढ़ के आसपास झाड़ली पावर प्लांट का लो-लाइन एरिया लगता है जिसमें बारिश के दिनों में भारी मात्रा में जलभराव होता है।
यहां सिंचाई विभाग 12 करोड़ की राशि खर्च कर परमानेंट पाइपलाइन व पंप हाउस आदि स्थापित कर पानी को महेंद्रगढ़ कैनाल व छुछकवास के नजदीक ड्रेन नंबर आठ में निकालेगा।
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गांव पहराजवास और पाल्हावास के समीप बरसात के मौसम में करीब 300 एकड़ की भूमि जलमग्न हो जाती है। यहां तीन किलोमीटर लंबी पाइपलाइन व पंप स्थापित कर पटौदी डिस्ट्रीब्यूटरी में पानी को निकालने की योजना बनाई गई है, जिस पर 7 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।
इसी प्रकार गांव खेड़ा रसूलपुर में 1.5 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछा कर पंप से बरसाती पानी को पटौदी डिस्ट्रीब्यूटरी में ड्रेन आउट किया जाएगा जिस पर 3.5 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
गांव सुमाखेड़ा में 6 करोड़ रुपए की लागत से ड्रेन रूपी पाइपलाइन बिछा कर जेएलएन बावल में बारिश के पानी को निकाला जाएगा। गांव नैन सुखपुरा में दो करोड़ रुपये की लागत से पंप हाउस व पाइपलाइन को बिछा कर पानी जेएलएन कैनाल में डाला जाएगा।
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कोसली। कोसली विधानसभा क्षेत्र के गांवों में बारिश में होने वाले जलभराव की समस्या को लेकर हरियाणा सरकार ने 30 करोड़ 50 लाख रुपये की परियोजनाएं तैयार की हैं। अगले सप्ताह में टेंडर हो जाने की उम्मीद है।
हर साल मानसून सीजन में कोसली हलका के करीब एक दर्जन से अधिक गांवों में जलभराव की गंभीर समस्या उत्पन्न हो जाती है जिस कारण फसलों की बर्बादी तो होती ही है, आम जनजीवन पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
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जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए सिंचाई विभाग ने एक बड़ी योजना तैयार की थी, जिसे चंडीगढ़ से स्वीकृति मिल चुकी है।
योजना के मुताबिक गांव लीलोढ़ के आसपास झाड़ली पावर प्लांट का लो-लाइन एरिया लगता है जिसमें बारिश के दिनों में भारी मात्रा में जलभराव होता है।
यहां सिंचाई विभाग 12 करोड़ की राशि खर्च कर परमानेंट पाइपलाइन व पंप हाउस आदि स्थापित कर पानी को महेंद्रगढ़ कैनाल व छुछकवास के नजदीक ड्रेन नंबर आठ में निकालेगा।
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गांव पहराजवास और पाल्हावास के समीप बरसात के मौसम में करीब 300 एकड़ की भूमि जलमग्न हो जाती है। यहां तीन किलोमीटर लंबी पाइपलाइन व पंप स्थापित कर पटौदी डिस्ट्रीब्यूटरी में पानी को निकालने की योजना बनाई गई है, जिस पर 7 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।
इसी प्रकार गांव खेड़ा रसूलपुर में 1.5 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछा कर पंप से बरसाती पानी को पटौदी डिस्ट्रीब्यूटरी में ड्रेन आउट किया जाएगा जिस पर 3.5 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
गांव सुमाखेड़ा में 6 करोड़ रुपए की लागत से ड्रेन रूपी पाइपलाइन बिछा कर जेएलएन बावल में बारिश के पानी को निकाला जाएगा। गांव नैन सुखपुरा में दो करोड़ रुपये की लागत से पंप हाउस व पाइपलाइन को बिछा कर पानी जेएलएन कैनाल में डाला जाएगा।