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Rewari News: देरी से एनओसी देने पर 20 हजार का जुर्माना
Fri, 22 Mar 2024 01:05 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Fri, 22 Mar 2024 01:05 AM IST
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रेवाड़ी। जिला उपभोक्ता आयोग ने अपने फैसले में फाइनेंस कंपनी पर 20 हजार का जुर्माना लगाया है। जुर्माना शिकायतकर्ता को देरी से एनओसी देने के कारण लगाया गया है।
गांव सालावास निवासी भूपेंद्र ने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराकर मांग की थी कि बजाज फाइनेंस कंपनी से उन्होंने अपनी मोटरसाइकिल फाइनेंस कराई थी। फाइनेंस की किस्त अदा करने के बावजूद भी बजाज फाइनेंस कंपनी ने एनओसी जारी नहीं की। जबकि फाइनेंस कंपनी की ओर से जारी की गई एओसी दूसरी मोटरसाइकिल के नाम की थी। इस कारण फाइनेंस कंपनी ने शिकायत दर्ज करने के चार माह बाद शिकायतकर्ता को एनओसी जिला उपभोक्ता आयोग के समक्ष पेश की थी।
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष संजय खंडूजा और राजेंद्र प्रसाद ने फाइनेंस कंपनी की लापरवाही एवं सेवाओं में कोताही का मामला मानते हुए अपने आदेश में स्पष्ट किया कि फाइनेंस कंपनी ने शिकायतकर्ता को बिना किसी कारण के शिकायत दायर करने एवं कोर्ट की लिटिगेशन में फंसाने का नाजायज कार्य किया है। इसलिए फाइनेंस कंपनी पर 20 हजार जुर्माना जो 9 प्रतिशत ब्याज सहित शिकायतकर्ता को अदा करने के आदेश दिए हैं। यह राशि 45 दिन के अंदर शिकायतकर्ता को देनी होगी अन्यथा उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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गांव सालावास निवासी भूपेंद्र ने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराकर मांग की थी कि बजाज फाइनेंस कंपनी से उन्होंने अपनी मोटरसाइकिल फाइनेंस कराई थी। फाइनेंस की किस्त अदा करने के बावजूद भी बजाज फाइनेंस कंपनी ने एनओसी जारी नहीं की। जबकि फाइनेंस कंपनी की ओर से जारी की गई एओसी दूसरी मोटरसाइकिल के नाम की थी। इस कारण फाइनेंस कंपनी ने शिकायत दर्ज करने के चार माह बाद शिकायतकर्ता को एनओसी जिला उपभोक्ता आयोग के समक्ष पेश की थी।
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जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष संजय खंडूजा और राजेंद्र प्रसाद ने फाइनेंस कंपनी की लापरवाही एवं सेवाओं में कोताही का मामला मानते हुए अपने आदेश में स्पष्ट किया कि फाइनेंस कंपनी ने शिकायतकर्ता को बिना किसी कारण के शिकायत दायर करने एवं कोर्ट की लिटिगेशन में फंसाने का नाजायज कार्य किया है। इसलिए फाइनेंस कंपनी पर 20 हजार जुर्माना जो 9 प्रतिशत ब्याज सहित शिकायतकर्ता को अदा करने के आदेश दिए हैं। यह राशि 45 दिन के अंदर शिकायतकर्ता को देनी होगी अन्यथा उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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