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रोडवेज को मिले 43 चालक, ग्रामीण रूटों की सेवाएं सुधरेंगी
Updated Fri, 04 May 2018 01:00 AM IST
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रोडवेज को मिले 43 चालक, ग्रामीण रूटों की सेवाएं सुधरेंगी
अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
लंबे समय से चालक और परिचालकों की कमी से जूझ रही रोडवेज को 43 नए चालक मिलेंगे। फिलहाल इन चालकों की ज्वाइनिंग से संबंधित प्रक्रिया पूरी की जा रही है। इसके बाद इन सभी को अलग-अलग रूटों पर तैनात किया जाएगा। नए चालक मिलने से रोडवेज प्रबंधन की तरफ से ग्रामीण रूटों पर बस सेवाओं में सुधार किया जाएगा।
रेवाड़ी डिपो के पास फिलहाल 141 बसों का बेड़ा है। इसके लिए 215 चालक और परिचालकों की जरूरत है। डिपो में फिलहाल 172 चालक और 209 परिचालक है। चालकों की कमी की वजह से परिचालकों को भी रोडवेज प्रबंधन को इधर-उधर के कार्यों में लगाना पड़ रहा है। इस वजह से डिपो की मुश्किल 100 के करीब बसें ही ऑनरोड रहती हैं। इसकी वजह से ग्रामीण रूटों पर बसों का संचालन सबसे अधिक प्रभावित रहता है। रेवाड़ी डिपो की तरफ से 24 ग्रामीण रूटों पर बसों का संचालन किया जाता है। इसमें से कई रूट तो ऐसे हैं जहां पर स्टाफ के अभाव में पांच से छह टाइमिंग मिस रहते हैं। अब चालकों के आने के बाद प्रबंधन की तरफ से उन ग्रामीण रूटों पर बसों की संख्या को बढ़ाया जाएगा जहां पर पर्याप्त यात्री होने के बावजूद भी बेहतर बस सेवा नहीं दी जा रही है। इसमें पटौदी, सोहना, कोटकासिम, राजगढ़ रूट हैं। यहां पर बसों की कमी रहती है। अब इन रूटों के यात्रियों को रोडवेज की पर्याप्त बसें मिलेंगी। वहीं उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के साथ हुए समझौते के बाद रेवाड़ी डिपो की तरफ से देहरादून, नैनीताल, हरिद्वार के लिए भी नई बसों का संचालन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त उन लंबे रूटों पर बसें चलाई जाएंगी जो कि पिछले वर्ष प्रबंधन के निर्देश बाद लंबी दूरी की बसों का बंद कर दिया था। फिलहाल अलवर को छोड़कर सभी रूटों पर बसें चल रही हैं। नए चालक आने के बाद अलवर रूट पर भी बस चलने की संभावना बढ़ गई है।
14 ने किया ज्वाइन शेष की प्रक्रिया जारी
मुख्यालय की तरफ से रेवाड़ी डिपो के पास 43 चालक भेजे गए हैं। इनमें से 14 चालकों ने डिपो में ज्वाइन कर लिया है जबकि शेष चालकों के दस्तावेजों की जांच की जा रही है। इसमें लाइसेंस और अन्य शैक्षणिक दस्तावेज है। इनकी जांच पूरी होने के बाद इनको भी ज्वाइनिंग दे दी जाएगी।
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डिपो को 43 चालक मिले हैं, इनकी ज्वाइनिंग प्रक्रिया अभी चल रही है। नए चालक मिलने से निश्चित रूप से सेवाओं को बेहतर किया जाएगा। ग्रामीण रूटों के साथ नए रूटों पर बसों का संचालन प्रारंभ किया जाएगा। - बलवंत सिंह गोदारा, महाप्रबंधक।
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अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
लंबे समय से चालक और परिचालकों की कमी से जूझ रही रोडवेज को 43 नए चालक मिलेंगे। फिलहाल इन चालकों की ज्वाइनिंग से संबंधित प्रक्रिया पूरी की जा रही है। इसके बाद इन सभी को अलग-अलग रूटों पर तैनात किया जाएगा। नए चालक मिलने से रोडवेज प्रबंधन की तरफ से ग्रामीण रूटों पर बस सेवाओं में सुधार किया जाएगा।
रेवाड़ी डिपो के पास फिलहाल 141 बसों का बेड़ा है। इसके लिए 215 चालक और परिचालकों की जरूरत है। डिपो में फिलहाल 172 चालक और 209 परिचालक है। चालकों की कमी की वजह से परिचालकों को भी रोडवेज प्रबंधन को इधर-उधर के कार्यों में लगाना पड़ रहा है। इस वजह से डिपो की मुश्किल 100 के करीब बसें ही ऑनरोड रहती हैं। इसकी वजह से ग्रामीण रूटों पर बसों का संचालन सबसे अधिक प्रभावित रहता है। रेवाड़ी डिपो की तरफ से 24 ग्रामीण रूटों पर बसों का संचालन किया जाता है। इसमें से कई रूट तो ऐसे हैं जहां पर स्टाफ के अभाव में पांच से छह टाइमिंग मिस रहते हैं। अब चालकों के आने के बाद प्रबंधन की तरफ से उन ग्रामीण रूटों पर बसों की संख्या को बढ़ाया जाएगा जहां पर पर्याप्त यात्री होने के बावजूद भी बेहतर बस सेवा नहीं दी जा रही है। इसमें पटौदी, सोहना, कोटकासिम, राजगढ़ रूट हैं। यहां पर बसों की कमी रहती है। अब इन रूटों के यात्रियों को रोडवेज की पर्याप्त बसें मिलेंगी। वहीं उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के साथ हुए समझौते के बाद रेवाड़ी डिपो की तरफ से देहरादून, नैनीताल, हरिद्वार के लिए भी नई बसों का संचालन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त उन लंबे रूटों पर बसें चलाई जाएंगी जो कि पिछले वर्ष प्रबंधन के निर्देश बाद लंबी दूरी की बसों का बंद कर दिया था। फिलहाल अलवर को छोड़कर सभी रूटों पर बसें चल रही हैं। नए चालक आने के बाद अलवर रूट पर भी बस चलने की संभावना बढ़ गई है।
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14 ने किया ज्वाइन शेष की प्रक्रिया जारी
मुख्यालय की तरफ से रेवाड़ी डिपो के पास 43 चालक भेजे गए हैं। इनमें से 14 चालकों ने डिपो में ज्वाइन कर लिया है जबकि शेष चालकों के दस्तावेजों की जांच की जा रही है। इसमें लाइसेंस और अन्य शैक्षणिक दस्तावेज है। इनकी जांच पूरी होने के बाद इनको भी ज्वाइनिंग दे दी जाएगी।
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डिपो को 43 चालक मिले हैं, इनकी ज्वाइनिंग प्रक्रिया अभी चल रही है। नए चालक मिलने से निश्चित रूप से सेवाओं को बेहतर किया जाएगा। ग्रामीण रूटों के साथ नए रूटों पर बसों का संचालन प्रारंभ किया जाएगा। - बलवंत सिंह गोदारा, महाप्रबंधक।