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Rewari News: सम्मेलन में 180 शोध पत्र किए प्रस्तुत
Sun, 01 Feb 2026 12:47 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 01 Feb 2026 12:47 AM IST
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मीरपुर स्थित इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय में आयोजित शिविर में पहुंचे प्रोफेसर व विद्यार्थी। स्रो
रेवाड़ी। मीरपुर स्थित इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय के विधि विभाग की तरफ से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार और उसकी सीमाएं विषय पर राष्ट्रीय विधि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर असीम मिगलानी ने की और कुलसचिव प्रोफेसर दिलबाग सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
सम्मेलन के मुख्य अतिथि डॉ. बीआर आंबेडकर नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर देविंदर सिंह रहे। विशिष्ट अतिथि प्रो. कविता ढुल तथा मुख्य वक्ता प्रो. भारत रहे। राष्ट्रीय विधि सम्मेलन का मंच संचालन सचिव डॉ. कुसुम यादव द्वारा किया गया।
राष्ट्रीय सम्मेलन के संयोजक डॉ. हेमंत कुमार यादव ने सम्मेलन के उद्देश्य एवं उसकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला। सम्मेलन के संचालक प्रोफेसर तेज सिंह ने आए हुए सभी अतिथियों, वक्ताओं, संसाधन व्यक्तियों तथा विश्वविद्यालय के कुलपति एवं कुलसचिव का धन्यवाद ज्ञापित किया। सम्मेलन में देश से गुणवत्तापूर्ण 180 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। सम्मेलन में सारगर्भित विवेचना के मुख्य बिंदु इस प्रकार रहे, भारतीय संविधान के विकसित होते परिदृश्य में एक समयोचित एवं बौद्धिक रूप से महत्वपूर्ण पहल रही।
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कार्यक्रम में व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सामूहिक उत्तरदायित्व के मध्य संतुलन पर गहन विमर्श किया गया। विचार-विमर्श में यह बात प्रमुख रूप से उभरकर आई कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को तकनीकी प्रगति के साथ विकसित होना चाहिए लेकिन उसे संवैधानिक मूल्यों से विमुख नहीं होना चाहिए।
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सम्मेलन के मुख्य अतिथि डॉ. बीआर आंबेडकर नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर देविंदर सिंह रहे। विशिष्ट अतिथि प्रो. कविता ढुल तथा मुख्य वक्ता प्रो. भारत रहे। राष्ट्रीय विधि सम्मेलन का मंच संचालन सचिव डॉ. कुसुम यादव द्वारा किया गया।
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राष्ट्रीय सम्मेलन के संयोजक डॉ. हेमंत कुमार यादव ने सम्मेलन के उद्देश्य एवं उसकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला। सम्मेलन के संचालक प्रोफेसर तेज सिंह ने आए हुए सभी अतिथियों, वक्ताओं, संसाधन व्यक्तियों तथा विश्वविद्यालय के कुलपति एवं कुलसचिव का धन्यवाद ज्ञापित किया। सम्मेलन में देश से गुणवत्तापूर्ण 180 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। सम्मेलन में सारगर्भित विवेचना के मुख्य बिंदु इस प्रकार रहे, भारतीय संविधान के विकसित होते परिदृश्य में एक समयोचित एवं बौद्धिक रूप से महत्वपूर्ण पहल रही।
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कार्यक्रम में व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सामूहिक उत्तरदायित्व के मध्य संतुलन पर गहन विमर्श किया गया। विचार-विमर्श में यह बात प्रमुख रूप से उभरकर आई कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को तकनीकी प्रगति के साथ विकसित होना चाहिए लेकिन उसे संवैधानिक मूल्यों से विमुख नहीं होना चाहिए।