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मिडिल स्कूल: तीन शिक्षकों पर नहीं कोई भी विद्यार्थी
Updated Tue, 12 Sep 2017 01:05 AM IST
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मिडिल स्कूल: तीन शिक्षकों पर नहीं कोई भी विद्यार्थी
प्रवीण शर्मा
रेवाड़ी।
प्रदेश में एक तरफ जहां स्कूलों में शिक्षकों की किल्लत है वहीं रेवाड़ी में एक स्कूल ऐसा भी है जहां तीन शिक्षकों पर छात्र संख्या शून्य है। ऐेसे में इन शिक्षकों को लगाने का उद्देश्य ही पूरा नहीं हो पा रहा है। अब शिक्षा विभाग के निर्देशों के बाद स्कूल में विद्यार्थियों के दाखिले के प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर दूरी पर स्थित बांबड़ गांव में राजकीय मिडिल स्कूल है। यहां कक्षा छह से आठ तक छात्र संख्या शून्य है। वहीं एक मुख्य अध्यापक सहित दो हिंदी के शिक्षक लगे हैं। हालांकि इन शिक्षकों की नियुक्ति पिछले दिनों ही हुई है, लेकिन बिना छात्र संख्या के शिक्षक लगाने का कोई औचित्य नजर नहीं आ रहा। अब ये शिक्षक स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या पूरी करने में जुटे हैं।
यह है मामला
राजकीय स्कूल बांबड़ को वर्ष 2009-10 में मिडिल स्कूल का दर्जा दिया गया। लेकिन शिक्षकों की पोस्ट नहीं दी। इस वर्ष मिडिल कक्षाओं में 10 छात्र अध्ययनरत थे। एक डेपुटेशन पर नियुक्त शिक्षक ने ही इन्हें पढ़ाया। बाद ये विद्यार्थी स्कूल से पासआउट होकर निकल गए। शिक्षक भी चला गया। वर्ष 2012-13 के बाद यह स्कूल बिना शिक्षकों और विद्यार्थियों के ही चला। पिछले दिनों एक मुख्य अध्यापक का स्थानांतरण इस स्कूल में हुआ है। इसके बाद दो हिंदी के अध्यापक भी स्कूल में लगाए गए, लेकिन अब स्कूल में विद्यार्थी नहीं हैं। ऐसे में ये अध्यापक अब आसपास के गांवों से स्कूल में एडमिशन के लिए प्रयासरत हैं।
प्राथमिक स्तर पर 30 विद्यार्थी
इस स्कूल में प्राथमिक स्तर पर 30 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। इन्हें शिक्षक पढ़ा रहे हैं। मिडिल होने के बाद भी शिक्षक और बच्चे नहीं होने से बहुत परेशानी हो रही है। अभिभावक अपने बच्चों को श्योराज माजरा सहित अन्य गांवों के स्कूलों में पढने के लिए भेजते थे। ऐसे में उन्हें परेशानी होती थी।
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हां यह सही है कि बांबड़ के मिडिल स्कूल में एक भी बच्चा नहीं है। प्राथमिक कक्षाओं में बच्चे पढ़ रहे हैं। पिछले दिनों ही शिक्षक आएं हैं। अब स्कूल में छात्र बढ़ाए जा रहे हैं। - भीमसैन गौड, खंड मौलिक शिक्षा अधिकारी, रेवाड़ी
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प्रवीण शर्मा
रेवाड़ी।
प्रदेश में एक तरफ जहां स्कूलों में शिक्षकों की किल्लत है वहीं रेवाड़ी में एक स्कूल ऐसा भी है जहां तीन शिक्षकों पर छात्र संख्या शून्य है। ऐेसे में इन शिक्षकों को लगाने का उद्देश्य ही पूरा नहीं हो पा रहा है। अब शिक्षा विभाग के निर्देशों के बाद स्कूल में विद्यार्थियों के दाखिले के प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर दूरी पर स्थित बांबड़ गांव में राजकीय मिडिल स्कूल है। यहां कक्षा छह से आठ तक छात्र संख्या शून्य है। वहीं एक मुख्य अध्यापक सहित दो हिंदी के शिक्षक लगे हैं। हालांकि इन शिक्षकों की नियुक्ति पिछले दिनों ही हुई है, लेकिन बिना छात्र संख्या के शिक्षक लगाने का कोई औचित्य नजर नहीं आ रहा। अब ये शिक्षक स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या पूरी करने में जुटे हैं।
यह है मामला
राजकीय स्कूल बांबड़ को वर्ष 2009-10 में मिडिल स्कूल का दर्जा दिया गया। लेकिन शिक्षकों की पोस्ट नहीं दी। इस वर्ष मिडिल कक्षाओं में 10 छात्र अध्ययनरत थे। एक डेपुटेशन पर नियुक्त शिक्षक ने ही इन्हें पढ़ाया। बाद ये विद्यार्थी स्कूल से पासआउट होकर निकल गए। शिक्षक भी चला गया। वर्ष 2012-13 के बाद यह स्कूल बिना शिक्षकों और विद्यार्थियों के ही चला। पिछले दिनों एक मुख्य अध्यापक का स्थानांतरण इस स्कूल में हुआ है। इसके बाद दो हिंदी के अध्यापक भी स्कूल में लगाए गए, लेकिन अब स्कूल में विद्यार्थी नहीं हैं। ऐसे में ये अध्यापक अब आसपास के गांवों से स्कूल में एडमिशन के लिए प्रयासरत हैं।
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प्राथमिक स्तर पर 30 विद्यार्थी
इस स्कूल में प्राथमिक स्तर पर 30 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। इन्हें शिक्षक पढ़ा रहे हैं। मिडिल होने के बाद भी शिक्षक और बच्चे नहीं होने से बहुत परेशानी हो रही है। अभिभावक अपने बच्चों को श्योराज माजरा सहित अन्य गांवों के स्कूलों में पढने के लिए भेजते थे। ऐसे में उन्हें परेशानी होती थी।
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हां यह सही है कि बांबड़ के मिडिल स्कूल में एक भी बच्चा नहीं है। प्राथमिक कक्षाओं में बच्चे पढ़ रहे हैं। पिछले दिनों ही शिक्षक आएं हैं। अब स्कूल में छात्र बढ़ाए जा रहे हैं। - भीमसैन गौड, खंड मौलिक शिक्षा अधिकारी, रेवाड़ी