फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rewari News ›   1251 cases of dog bites were reported in Civil Hospital in 2 months

Rewari News: सिविल अस्पताल में 2 माह में आए डॉग बाइट के 1251 मामले

Sat, 28 Jun 2025 11:42 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Sat, 28 Jun 2025 11:42 PM IST
विज्ञापन
1251 cases of dog bites were reported in Civil Hospital in 2 months
फोटो : 4शहर में घूम रहे कुत्ते। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन


रेवाड़ी। कुत्तों के काटने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। नागरिक अस्पताल में 60 दिन में कुत्ता काटने के 1251 मामले आ चुके हैं। ज्यादातर मामले गली में घूमने वाले कुत्तों के काटने के हैं। इसके बाद भी नगर परिषद की ओर से कुत्तों के बधियाकरण का अभियान नहीं शुरू किया गया। 2022 के बाद कुत्तों का बधियाकरण नहीं किया गया जबकि इनकी संख्या दोगुना से भी अधिक हुई है।
कुत्ता काटने के मामले बढ़ने के बाद भी गलियों में घूमने वाले कुत्तों का टीकाकरण नहीं किया गया और न ही इनका पंजीकरण किया गया। विशेषज्ञों का कहना है गर्मी से कुत्ते हीट स्ट्रोक के शिकार होकर आक्रामक हो जाते हैं। बारिश में स्किन इंफेक्शन से भी कुत्ते आक्रामक होते हैं और लोगों को काट लेते हैं। इसलिए कुत्ते काटने के मामले ज्यादा आते हैं।
विज्ञापन

कुत्तों की संख्या पर नियंत्रण के लिए शहर में वर्ष 2022 में कुत्तों का बधियाकरण कराया गया था। इस पर 49 लाख रुपये खर्च किए गए थे लेकिन कुत्तों के बधियाकरण का असर नजर नहीं आया। कुत्तों के बधियाकरण में भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। इसके बाद कुत्तों का बधियाकरण नहीं कराया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

सुरक्षित कहे जाने वाले सेक्टरों में भी कुत्तों का उत्पात जारी है। रात में 9 बजे के बाद कोई पैदल सेक्टर से निकलता है तो कुत्ते उसे भोंकते हुए दौड़ा लेते हैं। सेक्टर 1 निवासी मोहन, सुनील और विकास ने बताया कि रात के समय कोई घर से बाहर नहीं निकलता है। अक्सर कुत्ते लोगों को काटते रहते हैं। कुत्तों के डर से रात में कोई निकलना नहीं चाहता है।



बीपीएल को मुफ्त, अन्य को 100 रुपये में लगता है टीका


कुत्ता काटने के बाद पीड़ित बीपीएल कार्ड धारक को सरकारी अस्पताल में निशुल्क एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाया जाता है जबकि अन्य को 100 रुपये की रसीद टकवाकर टीके लगवाने पड़ते हैं। सिविल अस्पताल में एंटी रेबीज के टीके उपलब्ध हैं। सीएचसी में टीके न होने से वहां इंजेक्शन लगवाने के लिए जाने वाले पीड़ितों को लौटना पड़ता है। ऐसे लोगों को बाहर से टीका खरीद करना लगवाना पड़ता है। बाहर से टीका 350 रुपये में आता है। ऐसे में 4 टीका लगवाने के लिए कम से कम 1400 रुपए खर्च हो जाते हैं। पीड़ितों ने सीएचसी में भी टीका उपलब्ध करवाने की मांग की है।





भारी पड़ सकती है थोड़ी सी लापरवाही


रेबीज जानलेवा बीमारी है। किसी व्यक्ति में रेबीज के वायरस होते हैं तो लक्षण दिखने तक इलाज का समय निकल चुका होता है। कुत्ते, बिल्ली, बंदर आदि जानवरों के काटने से लार का संपर्क जब व्यक्ति के खून से होता है तो ये वायरस फैलता है। रेबीज के आम लक्षण में बुखार आना, सिरदर्द, घबराहट या बेचैनी, खाना-पीना निगलने में कठिनाई, बहुत अधिक लार निकलना, पानी से डर लगना, पागलपन के लक्षण, अनिद्रा, एक अंग में लकवा होना आदि प्रमुख हैं।


वर्जन
नगर परिषद की ओर से बंदरों को पकड़ने के लिए जल्द ही टेंडर जारी किया जाएगा। कुत्तों के बधियाकरण की अभी कोई योजना नहीं बनाई गई है। इस पर चर्चा चल रही है। यह कार्य भी शुरू कराया जाएगा।-पूनम यादव, चेयरपर्सन, नगर परिषद रेवाड़ी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed