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भूख-प्यास से बिलखते रहे बच्चें, नहीं पसीजा अधिकारियों का मन---आठ फोटों है

Fri, 04 May 2018 01:00 AM IST
Updated Fri, 04 May 2018 01:00 AM IST
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भूख-प्यास से बिलखते रहे बच्चें, नहीं पसीजा अधिकारियों का मन---आठ फोटों है
शिक्षा के लिए दर-दर की ठोकरें: डीसी से मिलने पहुंचे बच्चे निराश लौटे
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अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
नियम 134 ए के तहत बावल के एक निजी स्कूल में प्रवेश पाए बच्चे लगातार तीसरे दिन उपायुक्त से मिलने पहुंचे लेकिन वीरवार को उन्हें बेहद ही उपेक्षा का सामना करना पड़ा। बच्चे सुबह दस बजे अभिभावकों के साथ उपायुक्त कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे रहे लेकिन उपायुक्त के जिले से बाहर होने के कारण किसी भी अधिकारी ने उनकी बात सुनने तक की जहमत नहीं उठाई। आखिरकार दिनभर इंतजार के बाद भूख-प्यासे बच्चे घरों को लौट गए। इस बात की आज दिनभर जिला सचिवालय में चर्चा भी रही। आखिरकार प्रशासन स्कूलों के सामने इतना असहाय कैसे हो गया है।
जिले के अधिकांश प्राइवेट स्कूलों ने नियम 134 ए के तहत प्रवेश पाए बच्चों को स्कूल में आनेजाने के लिए यातायात की सुविधा देने से साफ मना कर दिया है। बच्चों एवं अभिभावकों द्वारा मंगलवार को उपायुक्त पंकज कुमार से स्कूल संचालकों की शिकायत की थी। डीसी ने सभी प्राइवेट स्कूल संचालकों को बच्चों को यातायात की सुविधा देने के निर्देश दिए थे, लेकिन बावल औद्योगिक क्षेत्र में संचालित एक प्राइवेट स्कूल संचालक ने इसके बाद भी बच्चों को स्कूल के वाहनों में नहीं बैठाया। स्कूल संचालकों की मनमानी के खिलाफ बच्चे एवं अभिभावक वीरवार को फिर उपायुक्त से मिलने पहुंचे। उपायुक्त के नहीं होने के कारण बच्चे उनके कार्यालय के सामने ही धरने पर बैठ गए। बच्चे सुबह दस बजे से शाम पांच बजे तक अभिभावकों के साथ उपायुक्त कार्यालय के सामने भूखे-प्यासे बैठे रहे लेकिन प्रशासन और शिक्षा विभाग का कोई भी अधिकारी बच्चों से मिलने तक नहीं पहुंचा। आखिरकार बच्चे शाम को निराश ही लौट गए।
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अधिकारियों का मुंह ताकते रहे बच्चे
डीसी कार्यालय के सामने बैठे बच्चों के पास से दिनभर अधिकारियों का आवागमन बना रहा, लेकिन किसी अधिकारी ने बच्चों की समस्याएं सुनना मुनासिब नहीं समझा। अधिकारियों ने नगर परिषद क्षेत्र और अन्य गांवों से आए लोगों की समस्याएं सुनने के अलावा ज्ञापन भी लिए, लेकिन अधिकारी बच्चों और अभिभावकों से बचते दिखाई दिए।
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चार बजे तो रोने लगे बच्चे
सुबह से डीसी का इंतजार कर रहे बच्चे शाम करीब चार बजे भूख के कारण रोने लग गए थे। बच्चों के भूखे होने की जानकारी डीसी कार्यालय के कर्मचारियों को दी गई थी। इसके बाद भी किसी का दिल नहीं पसीजा। हालांकि बच्चों ने कर्मचारियों से कई बार कहा कि मंगलवार को डीसी अंकल फ्रूटी पिला रहे थे, लेकिन आज कोई उनकी बात तक नहीं सुन रहा है।
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अधिकांश स्कूलों की समस्या
मजबूरन स्कूल संचालकों ने नियम 134 ए के तहत बच्चों को स्कूल में प्रवेश तो दे दिया, लेकिन स्कूल वाहनों में बैठाने से मना कर दिया है। यह समस्या जिले के अधिकांश स्कूलों की है। इसके अलावा बच्चों के साथ अन्य बच्चों की अपेक्षा व्यवहार भी ठीक नहीं किया जा रहा है।
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डाक्यूमेंटस की जांच कराने की दी जा रही धमकी
अधिकांश स्कूल संचालकों द्वारा अभिभावकों को उनके द्वारा जमा कराए गए डाक्यूमेंट्स की जांच कराने के नाम पर डराया जा रहा है। कभी बच्चों एवं अभिभावकों से बिजली बिल लाने एवं कभी आय के स्रोत बताने के लिए दबाव डाला जा रहा है। स्कूल संचालक अभिभावकों को परेशान करने के लिए अनेक तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं।
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क्या कहते हैं बच्चे
डीसी सर ने मंगलवार को कहा था कि अब कोई स्कूल संचालक बच्चों को बसों में बैठने से मना नहीं करेगा, लेकिन चालक-परिचालक उन्हें बस में से उतार देते हैं। डीसी से मिलने आए थे लेकिन कोई उनसे मिलने नहीं दिया गया है। - हिमानी, छात्रा आठवीं कक्षा।
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स्कूल के वाहनों में उन्हें बैठने से मना किया हुआ है अगर बैठ भी जाते है तो चालक-परिचालक उन्हें बसों से नीचे उतार देते हैं। कक्षा में भी बेरुखा व्यवहार किया जाता है। भूखे-प्यासे सुबह से डीसी कार्यालय के सामने बैठे हैं। कोई समस्या तक नहीं सुन रहा है। - दिव्या, छात्रा चौथी कक्षा।
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दो दिन पूर्व तो डीसी अंकल फ्रूटी पीने के कह रहे थे, लेकिन आज तो शाम पांच बजे तक कोई पूछने नहीं आया है। सुबह से ही डीसी कार्यालय के सामने भूख-प्यासे बैठे हैं। स्कूल संचालक बसों में नहीं बैठाते हैं। इससे तो बेहतर होगा कि हमको कोई दूसरा स्कूल अलॉट कर दें। - आरती, छात्रा सातवीं कक्षा
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क्या कहते हैं अभिभावक
बच्चों को स्कूल में प्रवेश तो मिल गया, लेकिन स्कूल वाले बच्चों को बसों में नहीं बैठाते ऐसे में बच्चों की पढ़ाई कैसे संभव हो पाएगी। हम तीन दिन से कभी उपायुक्त तो कभी पुलिस अधीक्षक के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन कोई सुन ही नहीं रहा है। आखिरकार यह कैसी सरकार है जब लोगों की बात सुनने वाला ही कोई नहीं हो। - प्रेमलता, अभिभावक
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बच्चों को स्कूल संचालकों द्वारा स्कूल वाहनों में बैठने से मना कर दिया गया है, जबकि डीसी साहब द्वारा स्कूलों संचालकों को बच्चों को बसों में बैठाने के निर्देश दिए हुए है। इसके अलावा बच्चे सुबह से भूखे-प्यासे बैठे हैं, लेकिन कोई अधिकारी उनसे मिलने नहीं आया है। स्कूल संचालकों के सामने जिला प्रशासन का निर्देश कोई मायने नहीं रखता है। राजू, अभिभावक

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बच्चों की समस्या को लेकर डीसी से मिलने आए थे, लेकिन शाम तक कोई अधिकारी उनसे मिलने नहंी आया है। जबकि बच्चे भूखे के मारे रोने लगे हैं। दूसरे अधिकारी इधर-उघर जा रहे है, लेकिन बच्चों से बात नहीं कर रहे हैं। पिछले तीन दिन से चक्कर लगा रहे हैं। लाली देवी, अभिभावक
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