राकेश टिकैत ने भरी हुंकार, गलतफहमी में न रहे केंद्र, फसलों को जला देंगे पर वापस नहीं जाएंगे किसान
सरकार कह रही है कि किसान को फसल कटाई करनी है, इसलिए दो महीने में अपने आप बॉर्डर से उठ जाएंगे। लेकिन सरकार ने ज्यादा परेशान किया तो किसान अपनी खड़ी फसल में आग लगा देगा और एक फसल की कुर्बानी देकर आंदोलन को जिंदा रखेगा।
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने गांव खरक पूनिया व बालसमंद में गुरुवार को आयोजित किसान महापंचायत को संबोधित करते हुए यह बातें कहीं। टिकैत ने उपस्थित जनसमूह से फसल की कुर्बानी देने के लिए समर्थन मांगा। किसानों ने हाथ उठाकर उन्हें अपना समर्थन दिया।
महापंचायत के दौरान टिकैत ने कहा कि सरकार इस गलतफहमी में न रहे कि आंदोलन दो महीने में खत्म हो जाएगा। किसान फसल भी काटेगा और आंदोलन भी चलता रहेगा। उन्होंने कहा कि सरकार हमें आपस में लड़ाना चाह रही है, तरह-तरह के हथकंडे किसानों के बीच फूट डालने के लिए अपना रही है। हम सरकार को बता देना चाहते हैं कि यह आंदोलन अकेले किसानों का न रहकर अब किसान, मजदूर, कर्मचारी, छोटा दुकानदार और हर एक छोटे से छोटा मुलाजिम का बन गया है।
अबकी दिल्ली में हल क्रांति होगी
भाकियू नेता ने कहा कि सरकार समझ रही है कि किसान ट्रैक्टर लेकर अपने गांव लौट गया है। लेकिन सरकार यह न भूले कि अब किसान 40 लाख ट्रैक्टर इकट्ठा कर दिल्ली पहुंचेगा। अबकी बार दिल्ली में हल क्रांति होगी। हल क्रांति में जो खेत में किसान औजार इस्तेमाल करता वह भी किसान-मजदूरों के साथ जाएंगे। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे अपने ट्रैक्टरों में तेल डलवाकर व कृषि औजारों को तेल लगाकर तैयार रखें किसी भी समय दिल्ली से बुलावा आ सकता है।
ये धर्मयुद्ध है, सभी इसमें हों : चढ़ूनी
महापंचायत में भारतीय किसान यूनियन के हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि आज सवाल हमारे रोजगार का है। हमारी लड़ाई अमीर बनने की नहीं है, बल्कि छीने जा रहे हमारे रोजगार को बचाने की है। जो कानून सरकार ने बनाए हैं। उन कानूनों से आमजन का रोजगार छिनने वाला है। ये कृषि के कानून न होकर खेती व्यापार कानून हैं। इन व्यापार कानूनों को रद्द करवाने के लिए यही यह धर्म युद्ध चल रहा है। इसमें सभी को शामिल होना चाहिए। जो भी व्यक्ति इस युद्ध में शामिल न हो उसे पंच से लेकर एमपी तक कभी भी वोट मत देना। हमें आंदोलन को शांतिपूर्ण बनाकर रखना है।
बैलगाड़ी लेकर धरने पर पहुंचे किसान
भिवानी रोहिल्ला गांव से काफी किसान अपनी-अपनी बैलगाड़ी लेकर धरने पर पहुंचे। किसान नेताओं ने भी उन किसानों के जज्बे की काफी सराहना की। इस दौरान किसानों ने बैलों के सींगों पर भी तिरंगे की तरह रंग-पेंट कर रखा था। वहीं रोहिल्ला गांव में कृषि मंत्री के बहिष्कार पर फैसला लेने के लिए 23 फरवरी को महापंचायत का निर्णय लिया गया।
अगली लड़ाई कर्मचारी भाइयों की
टिकैत ने कहा कि अभी तो कर्मचारियों की लड़ाई भी हम लड़ेंगे क्योंकि उन्हें भी पूरी तनख्वाह नहीं मिल रही है। हम सरकार से यह भी पूछेंगे कि अगर नेताओं को 10 दिन मंत्री बनने के बाद पेंशन मिल सकती है तो कर्मचारी भाइयों को पूरी 60 साल नौकरी करने के बाद भी पेंशन क्यों नहीं दी जा रही है। उन्हें दो-दो कमरों के क्वार्टर दिए जा रहे हैं। हमारे सैनिक जितनी ड्यूटी करते हैं, उन्हें उतनी तनख्वाह क्यों नहीं दी जा रही है।