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हाईकोर्ट खुद जांचेगा उत्तर पुस्तिकाएं
ब्यूरो/ अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 20 May 2014 11:55 PM IST
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हरियाणा में पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला के शासनकाल के दौरान वर्ष 2002 में हुई 65 एचसीएस अफसरों की भर्ती में कथित धांधली को परखने के लिए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कुछ उत्तर पुस्तिकाएं खुद परखने का फैसला लिया है।
जस्टिस एसके मित्तल की अगवाई वाली बेंच ने इस मामले की नियमित सुनवाई के दौरान मंगलवार को ऐसे चयनित उम्मीदवारों की उत्तर पुस्तिकाएं पेश करने के निर्देश सरकार को दिए, जिनका चयन कथित धांधली कर किए जाने का आरोप है।
बेंच ने कहा है कि वह 10-15 ऐसे उम्मीदवारों की उत्तर पुस्तिकाएं खुद परखना चाहता है।
याचिकाकर्ता पूर्व मंत्री करण सिंह दलाल ने आरोप लगाया था कि भर्ती में धांधली हुई है, लिहाजा भरती की सीबीआई जांच होनी चाहिए और भर्ती रद की जानी चाहिए।
दलाल के वकील ने मंगलवार को भी सीबीआई जांच की मांग की। यह मामला 12 साल से विचाराधीन है और एक बार इस मामले में दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया था, लेकिन दोबारा सभी पक्षों को दोबारा पक्ष पेश करने की छूट दी गई थी।
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इस मामले में लंबे समय से सुनवाई चल रही थी लेकिन एक साल तक सुनवाई नहीं होने के कारण हरियाणा सरकार की ओर से पेश होने वाले वरिष्ठ वकील ने यह कहते हुए मामले में पेश होने से इंकार कर दिया था कि उन्होंने दिल्ली से यहां आना पड़ता है।
अब हाईकोर्ट ने मामले की नियमित सुनवाई शुरू की है और उत्तर पुस्तिकाएं खुद परखने का फैसला लिया है।
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जस्टिस एसके मित्तल की अगवाई वाली बेंच ने इस मामले की नियमित सुनवाई के दौरान मंगलवार को ऐसे चयनित उम्मीदवारों की उत्तर पुस्तिकाएं पेश करने के निर्देश सरकार को दिए, जिनका चयन कथित धांधली कर किए जाने का आरोप है।
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बेंच ने कहा है कि वह 10-15 ऐसे उम्मीदवारों की उत्तर पुस्तिकाएं खुद परखना चाहता है।
याचिकाकर्ता पूर्व मंत्री करण सिंह दलाल ने आरोप लगाया था कि भर्ती में धांधली हुई है, लिहाजा भरती की सीबीआई जांच होनी चाहिए और भर्ती रद की जानी चाहिए।
दलाल के वकील ने मंगलवार को भी सीबीआई जांच की मांग की। यह मामला 12 साल से विचाराधीन है और एक बार इस मामले में दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया था, लेकिन दोबारा सभी पक्षों को दोबारा पक्ष पेश करने की छूट दी गई थी।
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इस मामले में लंबे समय से सुनवाई चल रही थी लेकिन एक साल तक सुनवाई नहीं होने के कारण हरियाणा सरकार की ओर से पेश होने वाले वरिष्ठ वकील ने यह कहते हुए मामले में पेश होने से इंकार कर दिया था कि उन्होंने दिल्ली से यहां आना पड़ता है।
अब हाईकोर्ट ने मामले की नियमित सुनवाई शुरू की है और उत्तर पुस्तिकाएं खुद परखने का फैसला लिया है।