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युवा अपने संस्कार को अपनाएं : वैष्णवी भारती
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पानीपत। भागवत भास्कर साध्वी वैष्णवी भारती ने कहा कि व्यक्ति के लिए उसके संस्कार बहुत बड़े होते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को इनको अपनाकर चलना होगा। खासकर युवाओं को संस्कारों को अपनाना होगा।
उन्होंने ये शब्द श्रीमद्भागवत महापुराण साप्ताहिक कथा ज्ञानयज्ञ में ध्रुव प्रसंग का व्याख्यान करते हुए कहे। कथा दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा कटारिया लैंड नतदीक नवांकोट गुरुद्वारा, सेक्टर 12 में चल रही है। उन्होंने कहा कि संस्कार विहीनता के वातावरण में पल रही युवा पीढ़ी की दशा बेहतर चिंतनीय है। युवा संस्कारों के अभाव में पश्चिमी सभ्यता का अनुकरण कर रहा है। भारतीय परंपराओं का उपहास करना और उन्नति के नाम पर नैतिकता का परित्याग करना उनके जीवन की उपलब्धि बन गई है। फिल्मी सितारे, माॅडल आदि को जीवन का आदर्श बनाया हैं। इनमें से किसी का परिधान इनको भाता है तो किसी की चाल-ढाल। स्मरण रहे युवाओं द्वारा चुने इन आदर्शों ने व्यक्तिगत कितनी भी प्राप्तियां कर ली हों पर उनके त्याग, सेवा व परोपकार के कोई बड़े आदर्श स्थापित नहीं किए। साध्वी ने जड़भरत प्रसंग को प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि जड़भरत को उसके परिवार के सदस्यों ने निकम्मा जानकर खेतों में फसल की रखवाली करने के लिए भेज दिया। वहां से जड़भरत को काली माता के सामने बलि के रूप में चढ़ाने के लिए भील जाति के सैनिक ले गए।
काली मां ने मूर्ति में से प्रकट होकर जड़भरत की रक्षा की। जड़भरत ने एक हिरण के शावक की रक्षा की, परंतु स्वयं ही उसे के मोह पाश में बंध गए। कहते हैं कि नाव जल में रहे तो ठीक है। यदि जल नाव में भीतर आ जाए तो समस्या है। ठीक ऐसे ही हमारे महापुरुषों ने समझाया है यदि संसार में रहना है तो कमल के फूल की तरह बनो। उस का संबंध सीधा सूर्य के प्रकाश से रहता है। हमारा मन भी यदि भगवान से जुड़ जाए तब हम मोह से मुक्त रह सकते हैं। इस अवसर पर डॉ सुनील संदूजा, डॉ. शान महाजन, डॉ भावना महाजन, बेला भाटिया, उर्वशी गोयल, नीरज सिंगला, डॉली अरोड़ा, शकुंतला गर्ग, पवन पाठक, श्यामलाल शर्मा, सुरेश तायल, सुरेंद्र सिंगला सीए, अमित गंभीर, राजेश सिंह व प्रोमिला मलिक मौजूद रहीं।
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उन्होंने ये शब्द श्रीमद्भागवत महापुराण साप्ताहिक कथा ज्ञानयज्ञ में ध्रुव प्रसंग का व्याख्यान करते हुए कहे। कथा दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा कटारिया लैंड नतदीक नवांकोट गुरुद्वारा, सेक्टर 12 में चल रही है। उन्होंने कहा कि संस्कार विहीनता के वातावरण में पल रही युवा पीढ़ी की दशा बेहतर चिंतनीय है। युवा संस्कारों के अभाव में पश्चिमी सभ्यता का अनुकरण कर रहा है। भारतीय परंपराओं का उपहास करना और उन्नति के नाम पर नैतिकता का परित्याग करना उनके जीवन की उपलब्धि बन गई है। फिल्मी सितारे, माॅडल आदि को जीवन का आदर्श बनाया हैं। इनमें से किसी का परिधान इनको भाता है तो किसी की चाल-ढाल। स्मरण रहे युवाओं द्वारा चुने इन आदर्शों ने व्यक्तिगत कितनी भी प्राप्तियां कर ली हों पर उनके त्याग, सेवा व परोपकार के कोई बड़े आदर्श स्थापित नहीं किए। साध्वी ने जड़भरत प्रसंग को प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि जड़भरत को उसके परिवार के सदस्यों ने निकम्मा जानकर खेतों में फसल की रखवाली करने के लिए भेज दिया। वहां से जड़भरत को काली माता के सामने बलि के रूप में चढ़ाने के लिए भील जाति के सैनिक ले गए।
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काली मां ने मूर्ति में से प्रकट होकर जड़भरत की रक्षा की। जड़भरत ने एक हिरण के शावक की रक्षा की, परंतु स्वयं ही उसे के मोह पाश में बंध गए। कहते हैं कि नाव जल में रहे तो ठीक है। यदि जल नाव में भीतर आ जाए तो समस्या है। ठीक ऐसे ही हमारे महापुरुषों ने समझाया है यदि संसार में रहना है तो कमल के फूल की तरह बनो। उस का संबंध सीधा सूर्य के प्रकाश से रहता है। हमारा मन भी यदि भगवान से जुड़ जाए तब हम मोह से मुक्त रह सकते हैं। इस अवसर पर डॉ सुनील संदूजा, डॉ. शान महाजन, डॉ भावना महाजन, बेला भाटिया, उर्वशी गोयल, नीरज सिंगला, डॉली अरोड़ा, शकुंतला गर्ग, पवन पाठक, श्यामलाल शर्मा, सुरेश तायल, सुरेंद्र सिंगला सीए, अमित गंभीर, राजेश सिंह व प्रोमिला मलिक मौजूद रहीं।
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