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Haryana: पानीपत में आग में झुलसे श्रमिक की आठ दिन बाद मौत, पत्नी बोली- बच्चों को कैसे पालूंगी

Fri, 13 Dec 2024 05:34 PM IST
नवीन दलाल माई सिटी रिपोर्टर, पानीपत (हरियाणा)
माई सिटी रिपोर्टर, पानीपत (हरियाणा) Published by: नवीन दलाल Updated Fri, 13 Dec 2024 05:34 PM IST
सार

पानीपत के जिला नागरिक अस्पताल में सबनम रोते बिलखते हुए बार बार बार अपने बच्चों की तरफ देख रही थी। एक साल की बेटी खुशनूर तो अब तक गोद में ही है। चारों छोटे बच्चे मां को बिलखते हुए उनकी ही तरफ देख रहे थे।

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worker who was burnt in the fire in Panipat died after eight days, his wife said- how will I raise the childre
पीड़ित - फोटो : संवाद

विस्तार

पानीपत के बलाना स्थित धागा फैक्ट्री में आग लगने से झुलसे एक श्रमिक की आठ दिन बाद असंध रोड स्थित एक निजी अस्पताल में मौत हो गई। वह हादसे में 80 प्रतिशत तक झुलसा था। वह तब से आईसीयू में था। श्रमिक चार छोटे बच्चों का पिता था और कमाने वाला भी इकलौता था। पत्नी जिला नागरिक अस्पताल में बिलख बिलख कह रही थी कि बच्चें को वो कैसे पालेगी। परिजनों ने श्रमिक की मौत का जिम्मेदार फैक्ट्री मालिक को ठहराया है। मृतक चार बच्चों का पिता था। परिजनों ने प्रशासन से भी आर्थिक मदद की मांग की है। इसराना थाना पुलिस ने पंचनामा भर पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिया है। इसराना थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है।

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सबनम ने बताया कि उसके पति काबिल (31) मूलरूप से पश्चिमी बंगाल के उत्तर दिनाजपुर के बंसतपुर गांव का रहने वाला था। उनकी आठ साल पहले शादी हुई थी। वह चार बच्चों की मां है। सबसे बड़ा बेटा छह वर्षीय शहनाज, चार वर्षीय फैजान, तीन वर्षीय अरमान व एक साल की बेटी खुशनूर है। वह छह साल से बलाना गांव स्थित फैक्टरी शिवा फेब्रिकेटर प्राइवेट लिमिटेड में रहते थे। काबिल धागा बनाने वाली मशीन चलाता था।
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पांच दिसंबर की रात को शिवा फेब्रिकेटर प्राइवेट लिमिटेड में संदिग्ध परिस्थितियों में आग लगा गई थी। आग लगने से दो श्रमिकों की मौत हो गई थी। काबिल समेत तीन श्रमिक गंभीर रूप से झुलस गए थे। वह काबिल को रोहतक पीजीआई लेकर गए थे। डॉक्टरों ने बताया था कि काबिल 80 प्रतिशत तक झुलसा है। वह तीन दिन पहले काबिल को असंध रोड स्थित निजी अस्पताल में लेकर आए थे। यहां वह उधार पैसे लेकर उसका इलाज करवा रहे थे। शुक्रवार सुबह काबिल की मौत हो गई।
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चार छोटे बच्चे कैसे पालूंगी
जिला नागरिक अस्पताल में सबनम रोते बिलखते हुए बार बार बार अपने बच्चों की तरफ देख रही थी। एक साल की बेटी खुशनूर तो अब तक गोद में ही है। चारों छोटे बच्चे मां को बिलखते हुए उनकी ही तरफ देख रहे थे। सबनम रोते हुए कह रही थी कि वह इन बच्चों को कैसे पालेगी। वह न तो पढ़ी लिखी है और न कोई काम जानती है।

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