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बिना परमिशन केबल डालने को खीदीं गलियां, विरोध पर भागे
पानीपत
Updated Sun, 17 Nov 2013 11:48 PM IST
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पानीपत में विकास नगर में एक कंपनी के कारिंदों ने बिना परमिशन के रात के अंधेरे में दो गलियों को तोड़कर केबल बिछा दी।
सुबह होने पर नई बनी गलियों को टूटी देख लोग भड़क गए और मौके पर मौजूद कारिंदों से इस बारे में पूछा। इस दौरान लोगों ने कारिंदों से केबल बिछाने की परमिशन मांगी तो कारिंदे परमिशन नहीं दिखा पाए और मशीन छोड़कर फरार हो गए।
लोगों ने मशीन को जब्त कर कार्रवाई की मांग की है। स्थानीय निवासियों ने इसे नगर निगम की अनदेखी बताया है और रोष व्यक्त किया है। निगम अधिकारी स्थानीय निवासियों की सूचना देने के बाद भी मौके पर नहीं पहुंचे।
वार्ड-14 के विकास नगर में बीती रात को दादा खेड़ा और भारती स्कूल वाली गली को एक कंपनी के कारिंदों ने केबल दबाने के नाम पर जगह-जगह से खोद दिया। रविवार सुबह जब लोग नींद से उठे तो बाहर का नजारा देखकर हतप्रभ रहे गए। दोनों गलियों में गड्ढे बने हुए थे।
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इस पर कॉलोनी के लोग एकजुट हो गए। सूचना मिलने पर वार्ड पार्षद के पति रामचंद्र मौके पर पहुंचे। उन्होंने कंपनी के कारिंदों से बात की और परमिशन दिखाने को कहा।
लेकिन कारिंदे परमिशन नहीं दिखा पाए। लोगों को आक्रोशित होते देख कारिंदे मशीन और अन्य सामान छोड़कर फरार हो गए। लोगों ने बताया कि वे बिना मंजूरी के गलियों को खोदकर केबल लाइन बिछा रहे हैं।
सरपंच की परमिशन लेकर निगम में कर दी खुदाई
कंपनी के कारिंदों ने सरपंच से गलियों में केबल लाइन दबाने के नाम पर परमिशन लेकर नगर निगम के क्षेत्र में केबल लाइन दबानी शुरू कर दी। इसे नगर निगम अधिकारियों की अनदेखी कहें या कंपनी अधिकारियों की चालबाजी। कंपनी के कारिंदों ने स्थानीय निवासियों को साथ लगती पंचायत के सरपंच की परमिशन दिखाई। पार्षद पति ने सरपंच से बात की तो सरपंच ने बताया कि उन्हें गांव के रकबे में केबल दबाने की परमिशन दी गई थी। इस पर कंपनी के कारिंदों ने कहा कि उन्होंने नगर निगम में केबल लाइन दबाने संबंधित फाइल जमा करा रखी है। जिसकी जल्द ही परमिशन मिल जाएगी।
छह माह पहले ही बनी थी दोनों गलियां
विकास नगर बाहरी कॉलोनियों में गिना जाता है और स्थानीय लोगों ने बड़ी मुश्किल से दादा खेड़ा और भारती स्कूल वाली गली बनवाई थी।
इन दोनों गलियों पर 30 से 35 लाख रुपये का खर्च आया था। जिसके बाद लोगों को कुछ राहत मिली थी। लेकिन शनिवार रात को कंपनी के कारिंदों ने दोनों गलियों को कोद दिया। इस समय दोनों गलियों में गड्ढे बने हुए हैं। जिनसे निकलने में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
निगम की नाक के तले अवैध कार्य
नगर निगम की नाक के तले शहर में अवैध कार्य चल रहा है। इसी कंपनी के कारिंदे कई माह पहले शहर में केबल लाइन दबाते पकड़े गए थे।
उस समय भी उन्होंने परमिशन की फाइल नगर निगम कार्यालय में जमा कराने की कही थी। नगर निगम अधिकारियों ने ‘अमर उजाला’ में समाचार प्रकाशित होने के बाद इस पर रोक लगा थी, लेकिन शहर में अब फिर दबे पांव केबल दबाने का काम शुरू हो गया। नगर निगम अधिकारी इस तरफ से अनदेखा बने हुए हैं।
सूचना देने के बाद भी नहीं पहुंचे अधिकारी
पार्षद पति ने मामले को समझते हुए नगर निगम अधिकारियों को सूचना दी और मौके पर आने की मांग की। एमई राहुल पुनिया ने परमिशन के बारे में स्पष्ट जवाब नहीं दिया और मौके पर आने का आश्वासन दिया।
इसके बाद लोग उन्हें फोन करते रहे, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। रविवार शाम तक नगर निगम का कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।
विकास का अधिकार नहीं तो उजाड़ने का भी नहीं
वार्ड-14 की पार्षद मंजू कादियान के पति राम चंद्र कादियान ने कहा कि नगर निगम विकास नगर को बाहरी कालोनियों में गिनता है और यहां पर फिलहाल सरकारी ग्रांट देने में हाथ खड़े कर रहा है।
नगर निगम को यहां पर कुछ विकास करवाने का अधिकार नहीं है तो उजाड़ने का अधिकार नहीं है। निगम अधिकारियों की दोगली नीति से लोगों में रोष है। लोगों ने कहा कि इस बारे में वे सोमवार को निगम के संयुक्त कमिश्नर से मिलेंगे और गलियों दोबारा ठीक नहीं किया गया तो आंदोलन करेंगे।
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सुबह होने पर नई बनी गलियों को टूटी देख लोग भड़क गए और मौके पर मौजूद कारिंदों से इस बारे में पूछा। इस दौरान लोगों ने कारिंदों से केबल बिछाने की परमिशन मांगी तो कारिंदे परमिशन नहीं दिखा पाए और मशीन छोड़कर फरार हो गए।
लोगों ने मशीन को जब्त कर कार्रवाई की मांग की है। स्थानीय निवासियों ने इसे नगर निगम की अनदेखी बताया है और रोष व्यक्त किया है। निगम अधिकारी स्थानीय निवासियों की सूचना देने के बाद भी मौके पर नहीं पहुंचे।
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वार्ड-14 के विकास नगर में बीती रात को दादा खेड़ा और भारती स्कूल वाली गली को एक कंपनी के कारिंदों ने केबल दबाने के नाम पर जगह-जगह से खोद दिया। रविवार सुबह जब लोग नींद से उठे तो बाहर का नजारा देखकर हतप्रभ रहे गए। दोनों गलियों में गड्ढे बने हुए थे।
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इस पर कॉलोनी के लोग एकजुट हो गए। सूचना मिलने पर वार्ड पार्षद के पति रामचंद्र मौके पर पहुंचे। उन्होंने कंपनी के कारिंदों से बात की और परमिशन दिखाने को कहा।
लेकिन कारिंदे परमिशन नहीं दिखा पाए। लोगों को आक्रोशित होते देख कारिंदे मशीन और अन्य सामान छोड़कर फरार हो गए। लोगों ने बताया कि वे बिना मंजूरी के गलियों को खोदकर केबल लाइन बिछा रहे हैं।
सरपंच की परमिशन लेकर निगम में कर दी खुदाई
कंपनी के कारिंदों ने सरपंच से गलियों में केबल लाइन दबाने के नाम पर परमिशन लेकर नगर निगम के क्षेत्र में केबल लाइन दबानी शुरू कर दी। इसे नगर निगम अधिकारियों की अनदेखी कहें या कंपनी अधिकारियों की चालबाजी। कंपनी के कारिंदों ने स्थानीय निवासियों को साथ लगती पंचायत के सरपंच की परमिशन दिखाई। पार्षद पति ने सरपंच से बात की तो सरपंच ने बताया कि उन्हें गांव के रकबे में केबल दबाने की परमिशन दी गई थी। इस पर कंपनी के कारिंदों ने कहा कि उन्होंने नगर निगम में केबल लाइन दबाने संबंधित फाइल जमा करा रखी है। जिसकी जल्द ही परमिशन मिल जाएगी।
छह माह पहले ही बनी थी दोनों गलियां
विकास नगर बाहरी कॉलोनियों में गिना जाता है और स्थानीय लोगों ने बड़ी मुश्किल से दादा खेड़ा और भारती स्कूल वाली गली बनवाई थी।
इन दोनों गलियों पर 30 से 35 लाख रुपये का खर्च आया था। जिसके बाद लोगों को कुछ राहत मिली थी। लेकिन शनिवार रात को कंपनी के कारिंदों ने दोनों गलियों को कोद दिया। इस समय दोनों गलियों में गड्ढे बने हुए हैं। जिनसे निकलने में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
निगम की नाक के तले अवैध कार्य
नगर निगम की नाक के तले शहर में अवैध कार्य चल रहा है। इसी कंपनी के कारिंदे कई माह पहले शहर में केबल लाइन दबाते पकड़े गए थे।
उस समय भी उन्होंने परमिशन की फाइल नगर निगम कार्यालय में जमा कराने की कही थी। नगर निगम अधिकारियों ने ‘अमर उजाला’ में समाचार प्रकाशित होने के बाद इस पर रोक लगा थी, लेकिन शहर में अब फिर दबे पांव केबल दबाने का काम शुरू हो गया। नगर निगम अधिकारी इस तरफ से अनदेखा बने हुए हैं।
सूचना देने के बाद भी नहीं पहुंचे अधिकारी
पार्षद पति ने मामले को समझते हुए नगर निगम अधिकारियों को सूचना दी और मौके पर आने की मांग की। एमई राहुल पुनिया ने परमिशन के बारे में स्पष्ट जवाब नहीं दिया और मौके पर आने का आश्वासन दिया।
इसके बाद लोग उन्हें फोन करते रहे, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। रविवार शाम तक नगर निगम का कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।
विकास का अधिकार नहीं तो उजाड़ने का भी नहीं
वार्ड-14 की पार्षद मंजू कादियान के पति राम चंद्र कादियान ने कहा कि नगर निगम विकास नगर को बाहरी कालोनियों में गिनता है और यहां पर फिलहाल सरकारी ग्रांट देने में हाथ खड़े कर रहा है।
नगर निगम को यहां पर कुछ विकास करवाने का अधिकार नहीं है तो उजाड़ने का अधिकार नहीं है। निगम अधिकारियों की दोगली नीति से लोगों में रोष है। लोगों ने कहा कि इस बारे में वे सोमवार को निगम के संयुक्त कमिश्नर से मिलेंगे और गलियों दोबारा ठीक नहीं किया गया तो आंदोलन करेंगे।