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समालखा एनकाउंटर : पुलिस कोर्ट में साबित नहीं कर पाई मुठभेड़, आरोपी सोनू सबूतों के अभाव में बरी
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माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। समालखा-नारायणा रोड पर सात जुलाई 2023 को हुई पुलिस मुठभेड़ के मामले में अदालत ने आरोपी प्रवीन उर्फ सोनू जाट को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश संदीप सिंह की अदालत में पुलिस मुठभेड़ और फायरिंग की घटना को पर्याप्त साक्ष्यों से साबित नहीं कर सकी।
इस मुठभेड़ में सोनीपत निवासी राकेश उर्फ राका की मौत हो गई थी, जबकि पानीपत निवासी प्रवीन घायल हुआ था। घटना के समय परिजनों ने भी मुठभेड़ पर सवाल उठाते हुए इसे फर्जी बताया था। तत्कालीन सीआईए-टू प्रभारी पर गंभीर आरोप भी लगाए थे।
पुलिस के अनुसार, सात जुलाई 2023 को सीआईए-2 की टीम रोहतक बाईपास पर मौजूद थी। इसी दौरान सूचना मिली कि बलेनो कार में सवार दो संदिग्ध युवक वारदात की नीयत से समालखा-नारायणा रोड पर घूम रहे हैं। सूचना पर पुलिस की दो टीमों ने सुनसान स्थान पर घेराबंदी की। पुलिस का दावा था कि कार सवार युवकों ने टीम को देखकर वाहन मोड़ने का प्रयास किया और घिरने पर पुलिस पर फायरिंग कर दी।
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पुलिस के मुताबिक, जवाबी कार्रवाई में दोनों युवकों के पैरों में दो-दो गोलियां लगीं। दोनों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां सोनीपत के गढ़ी सिसाना निवासी राकेश उर्फ राका की मौत हो गई। वहीं, पानीपत के हरिनगर निवासी प्रवीन उर्फ सोनू जाट का इलाज कराया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस मुठभेड़ और फायरिंग से जुड़े आरोपों को अदालत में पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर साबित नहीं कर सकी। इसके चलते अदालत ने प्रवीन को बरी कर दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी के खिलाफ चार अन्य आपराधिक मामले विचाराधीन हैं। इन मामलों की सुनवाई पूरी होने तक उसे जेल में ही रखने के निर्देश दिए गए हैं।
परिजनों ने एनकाउंटर को बताया था फर्जी
घटना के बाद राकेश के परिजनों ने पुलिस के एनकाउंटर पर सवाल उठाए थे। उन्होंने जिला नागरिक अस्पताल में रोष जताते हुए तत्कालीन थाना प्रभारी और मुठभेड़ का नेतृत्व करने वाले पुलिस अधिकारी पर आरोप लगाए थे। परिजनों का आरोप था कि समाज विशेष के चुनाव को लेकर पुरानी रंजिश के चलते पुलिस ने कार्रवाई की। उस समय पुलिस ने मामले की जांच का भरोसा दिया था।
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पानीपत। समालखा-नारायणा रोड पर सात जुलाई 2023 को हुई पुलिस मुठभेड़ के मामले में अदालत ने आरोपी प्रवीन उर्फ सोनू जाट को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश संदीप सिंह की अदालत में पुलिस मुठभेड़ और फायरिंग की घटना को पर्याप्त साक्ष्यों से साबित नहीं कर सकी।
इस मुठभेड़ में सोनीपत निवासी राकेश उर्फ राका की मौत हो गई थी, जबकि पानीपत निवासी प्रवीन घायल हुआ था। घटना के समय परिजनों ने भी मुठभेड़ पर सवाल उठाते हुए इसे फर्जी बताया था। तत्कालीन सीआईए-टू प्रभारी पर गंभीर आरोप भी लगाए थे।
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पुलिस के अनुसार, सात जुलाई 2023 को सीआईए-2 की टीम रोहतक बाईपास पर मौजूद थी। इसी दौरान सूचना मिली कि बलेनो कार में सवार दो संदिग्ध युवक वारदात की नीयत से समालखा-नारायणा रोड पर घूम रहे हैं। सूचना पर पुलिस की दो टीमों ने सुनसान स्थान पर घेराबंदी की। पुलिस का दावा था कि कार सवार युवकों ने टीम को देखकर वाहन मोड़ने का प्रयास किया और घिरने पर पुलिस पर फायरिंग कर दी।
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पुलिस के मुताबिक, जवाबी कार्रवाई में दोनों युवकों के पैरों में दो-दो गोलियां लगीं। दोनों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां सोनीपत के गढ़ी सिसाना निवासी राकेश उर्फ राका की मौत हो गई। वहीं, पानीपत के हरिनगर निवासी प्रवीन उर्फ सोनू जाट का इलाज कराया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस मुठभेड़ और फायरिंग से जुड़े आरोपों को अदालत में पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर साबित नहीं कर सकी। इसके चलते अदालत ने प्रवीन को बरी कर दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी के खिलाफ चार अन्य आपराधिक मामले विचाराधीन हैं। इन मामलों की सुनवाई पूरी होने तक उसे जेल में ही रखने के निर्देश दिए गए हैं।
परिजनों ने एनकाउंटर को बताया था फर्जी
घटना के बाद राकेश के परिजनों ने पुलिस के एनकाउंटर पर सवाल उठाए थे। उन्होंने जिला नागरिक अस्पताल में रोष जताते हुए तत्कालीन थाना प्रभारी और मुठभेड़ का नेतृत्व करने वाले पुलिस अधिकारी पर आरोप लगाए थे। परिजनों का आरोप था कि समाज विशेष के चुनाव को लेकर पुरानी रंजिश के चलते पुलिस ने कार्रवाई की। उस समय पुलिस ने मामले की जांच का भरोसा दिया था।